लेखक की कलम

ईंधन संकट पर योगी का कड़ा कदम

दुनिया में कहीं भी अशांति होती है तो उसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। प्रमुख तेल उत्पदक देश ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से दुनिया भर में ईंधन संकट महसूस किया जा रहा है लेकिन मौजूदा समय में ऐसा नहीं है। देर-सबेर ऐसी समस्या आ सकती है, इसमें कोई संदेह नहीं। इसीलिए भारत में भी ईंधन संकट के प्रति सतर्कता बरती जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जनता को आश्वासन भी दिया है और सख्त कदम भी उठाए हैं। दरअसल जमाखोरी ने ईंधन संकट पैदा कर दिया है। हापुड़ में गत 12 मार्च को एक ही घर में 32 सिलेण्डर बरामद होना इसका ज्वलंत प्रमाण है। उधर, गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर गैस सिलेण्डर लेने वालों की लाइन लगी है तो सामान्य रूप से यही लगता है कि सचमुच ईंधन का संकट है। केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बताया कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस व मिट्टी तेल की कोई कमी नहीं है। हरदीप सिंह पुरी कहते हैं कि एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से 20 प्रतिशत जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और 40 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से आ रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि प्रदेश में रसोई गैस (एलपीजी) की निर्बाध और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिये गये हैं। आम जनता में घबराहट की स्थिति न बनने दी जाए। इसीलिए संदिग्ध स्थलों पर छापेमारी की जा रही है और इसके नतीजे भी मिल रहे हैं। इस दिशा में मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गयी है। गैस लेने वालों की लम्बी-लम्बी लाइन दिखाने के बजाय उन जमाखोरों में दहशत पैदा करने का प्रयास इस समय जरूरी है ताकि कोराना काल की तरह कृत्रिम संकट न पैदा किया जा सके। कोरोना काल में भी आक्सीजन सिलेण्डरों की जमाखोरी हुई थी।
हापुड़ में 12 मार्च की रात स्थानीय अधिकारियों की छापेमारी के दौरान एक घर से 32 सिलेंडर जब्त किए गए, जिनमें 18 भरे हुए सिलेंडर शामिल हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी सीमा बलियान ने कहा, डीएम ने हर तहसील में टीमें बनाई हैं, जो गश्त कर रही हैं और कार्रवाई की जा रही है। गत रात करीब 9 बजे एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने निजी घर में 18 भरे हुए और 14 खाली सिलेंडर रखे हुए थे। विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और सभी सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया है। मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा, हापुड़ में घरेलू गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। लोग ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाकर अपनी गैस एजेंसियों से सिलेंडर ले सकते हैं। गौरतलब है कि देश में जगह-जगह से गैस सिलेंडरों की किल्लत के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में कई लोग सिलेंडरों की कालाबाजारी में लग गए हैं और उसका स्टॉक जमा कर रहे हैं। वह मनमाने दामों में इन्हें बेच रहे हैं। ऐसा ही मामला हापुड़ से भी सामने आया, जहां एक ही घर से 32 सिलेंडर जब्त किए गए।
सरकार का कहना है कि देश में गैस और तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई चेन में कोई रुकावट नहीं है। इसके बावजूद यूपी के नोएडा में लोग गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगाकर खड़े हैं। लोगों का कहना है कि वह तीन दिन से गोदामों के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया है। हालात ये हैं कि नोएडा में लोग सुबह 3 बजे से ही गोदामों के बाहर लाइनें लगाकर खड़े हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश में एलपीजी गैस की कमी और कालाबाजारी की खबरों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सीएम योगी ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सीएम ने सभी जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों को गैस एजेंसी और पेट्रोल पंपों की जांच करने और छापा मारने के निर्देश दिए हैं। गैस की किल्लत की खबरों के बीच, एहतियात के तौर पर 80 लाख लीटर केरोसिन का बैकअप तैयार रखा गया है।
गैस की किल्लत को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। इस उच्च स्तरीय बैठक में रसोई गैस की आपूर्ति और वितरण प्रणाली की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में डीजल और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है, इसलिए जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे रसोई गैस की कमी से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। खाद्य एवं रसद विभाग को हर जिले में 24×7 मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने का आदेश दिया गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एलपीजी वितरण केंद्रों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनता को पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता के बारे में लगातार आश्वस्त किया जाए। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के साथ-साथ अब ओटीपी माध्यम से पारदर्शी रिफिल डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार ने सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने वाले चैनलों और वीडियो पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। गैस सिलेंडर ले जाने वाले वाहनों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वितरण के दौरान किसी प्रकार की अराजकता न फैले। राजस्व, खाद्य
विभाग और तेल कंपनियों के नोडल अधिकारियों को स्थानीय पुलिस के साथ निरंतर क्षेत्र में भ्रमणशील रहने को कहा गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून व्यवस्था से संबंधित सूचना तत्काल होम कंट्रोल रूम को देने की व्यवस्था की गई है।
सीएम के निर्देश के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने कई जिलों में फील्ड पर उतरकर कार्रवाई शुरू कर दी है खासतौर पर कुछ बड़े जिलों जैसे नोएडा, लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज सहित राज्य के अन्य जिलों में जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें पेट्रोल पंपों, गैस गोदामों और गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर रही हैं। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि कहीं जानबूझकर गैस या पेट्रोल-डीजल की कमी तो नहीं बनाई जा रही है। कई स्थानों पर स्टॉक रजिस्टरए सप्लाई रिकॉर्ड और वितरण व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
सरकार के इस सख्त रूख से उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश में एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति जल्द ही सामान्य हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी। बताया गया कि बरेली में ब्लैक सिलेंडर के लिए लोग 200 से 500 रुपए तक ले रहे हैं। वहीं पीलीभीत में ब्लैक में सिलेंडर के 100 से 200 रुपए अधिक लिए जा रहे हैं। बात अगर मेरठ की करें, तो यहां ऑनलाइन बुकिंग की जगह अब पर्ची को ज्यादातर अहमियत दी जा रही है। ब्लैक में भी आसानी से सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ जगह ब्लैक में सिलेंडर मिल रहे हैं, उनकी कीमत 1400 रुपए से अधिक हो गई है। मिर्जापुर में सिलेंडर 1300 रुपये में मिल रहा है। हालांकि, जिनकी बुकिंग है, उन्हें सामान्य दर पर ले रहे हैं। गाजियाबाद में सिलेंडर के दाम से 100 रुपए ऊपर लिए जा रहे हैं। ये जमाखोरी और अफवाह का दुष्परिणाम है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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