विदेश से लाये तोहफे दोस्तों को नहीं दे सके राजेश खन्ना

हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का स्टारडम आज भी मिसाल माना जाता है। 60 और 70 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर उनका ऐसा जादू था कि हर फिल्म सुपरहिट साबित होती थी। काका के नाम से मशहूर इस अभिनेता की दीवानगी का आलम यह था कि फैंस उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहते थे। कहा जाता है कि लड़कियां उनकी कार को चूमकर लिपस्टिक के निशान छोड़ देती थीं। अपनी शानदार लाइफस्टाइल और दरियादिली के लिए पहचाने जाने वाले राजेश खन्ना का 18 जुलाई 2012 को निधन हो गया, लेकिन उनके जाने के बाद एक ऐसा राज सामने आया जिसने सभी को चैंका दिया। राजेश खन्ना जब भी विदेश यात्रा पर जाते थे, अपने दोस्तों और करीबियों के लिए ढेरों महंगे तोहफे लेकर आते थे लेकिन अपनी व्यस्त जिंदगी और भूलने की आदत के चलते वह अक्सर ये गिफ्ट्स बांट नहीं पाते थे। उनके निधन के बाद जब मुंबई स्थित उनके बंगले आशीर्वाद में 64 बंद सूटकेस खोले गए, तो सभी हैरान रह गए। इन सूटकेस में वही अनखुले तोहफे थे, जिन्हें वह अपने चाहने वालों को देना चाहते थे, लेकिन कभी दे नहीं पाए। इस हैरान कर देने वाले किस्से का जिक्र लेखक गौतम चिंतामणि ने अपनी किताब डार्क स्टार: द लोलनीनेस ऑफ बीइंग राजेश खन्ना में किया है। किताब के मुताबिक, राजेश खन्ना स्वभाव से बेहद भावुक और उदार इंसान थे। उन्हें लोगों से प्यार था, लेकिन वह अक्सर अकेलापन भी महसूस करते थे।
राजेश खन्ना ने 1966 में फिल्म ‘आखिरी खतश् से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिनमें आराधना, आनंद, कटी पतंग, हाथी मेरे साथी, नमक हराम और ‘बावर्चीश् जैसी फिल्में शामिल हैं। उनके निधन के बाद भले ही इंडस्ट्री ने एक बड़ा सितारा खो दिया, लेकिन उनकी कहानियां, किस्से और फिल्में आज भी उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा हैं।
बॉलीवुड के इतिहास में जिस एक्टर के साथ सबसे पहले सुपरस्टार
शब्द जुड़ा, वह राजेश खन्ना थे। 1969 से 1972 के बीच लगातार 15 गोल्डन जुबली हिट देकर उन्होंने जो रिकॉर्ड बनाया, उसे आज भी तोड़ना नामुमकिन लगता है। (हिफी)



