रूस ने चीन को दिया ज्यादा तेल बेचने का आफर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब 28 फरवरी को जंग शुरू करने का आदेश दिया था तो उनका मकसद केवल एक था- ईरान को घुटनों पर लाना। जंग महीने से अधिक चला और फिर 2 हफ्ते के लिए सीजफायर हुआ। इस्लामाबाद वार्ता में बात नहीं बनी तो ईरान की तरह ही ट्रंप ने भी होर्मुज की नाकेबंदी कर दी- इस बार मकसद था का ईरान अकेला इस समुद्री रास्ते से तेल बेचकर फायदा न कमाए। ट्रंप हर पैंतरा आजमा रहे हैं लेकिन इन सबके बीच रूस की चांदी हो रही है। जिस रूस के तेल पर कल तक ट्रंप ने प्रतिबंध लगा रखे थे, आज उस पर कोई प्रतिबंध नहीं और वह तेल बेचकर खूब पैसा बना रहा है। अब तो रूस ने चीन को भी ज्यादा तेल बेचने का ऑफर दे दिया है।
चीन दौरे पर पहुंचे रूस के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश चीन की ऊर्जा की कमी को पूरा कर सकता है, क्योंकि हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही युद्ध के कारण रुक गई है। यह जानकारी बुधवार, 15 अप्रैल को रूसी सरकारी मीडिया ने दी। सेर्गेई लावरोव ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “रूस बिना किसी शक के चीन और उन दूसरे देशों के लिए संसाधनों की कमी को पूरा कर सकता है, जो हमारे साथ काम करना चाहते हैं।” उन्होंने यह बात हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जुड़े सवाल के जवाब में कही। लावरोव 14 अप्रैल को दो दिन के दौरे पर बीजिंग पहुंचे और अगले दिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले। उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते को “किसी भी मुश्किल में न टूटने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों के संबंध “दुनिया के मामलों में स्थिरता लाने का काम करते हैं” और “उन देशों के लिए और भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, जो समस्याएं या अशांति नहीं चाहते।”
लावरोव का यह दौरा उसी हफ्ते हो रहा है, जब कई विदेशी नेता भी बीजिंग में शी जिनपिंग से मिल रहे हैं। इनमें वियतनाम के तो लाम और स्पेन के पेड्रो सांचेज भी शामिल हैं।



