स्मृति विशेष

सच को वरीयता देने वाले पत्रकार अरविन्द

पत्रकारिता का स्वरूप ही नहीं सिद्धांत भी बदल गये हैं। प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया और डिजिटल मीडिया के इस युग मंे भी सबेरे-सबेरे ज्यादातर लोग अखबार पढ़ते हुए ही चाय पीते हैं। पत्रकारिता का सबसे दुखद पक्ष यह है कि अब इसे मिशन की श्रेणी से हटा दिया गया है और पूरी तरह व्यापार की श्रेणी में रख दिया गया है। आज से चार दशक पूर्व प्रिंट मीडिया मंे सकारात्मक बातों को वरीयता दी जाती थी। गाजियाबाद के महान स्वाधीनता सेनानी मोहन स्वामी के सुपुत्र अरविन्द मोहन स्वामी ने भी 24 अप्रैल 1990 को जब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा लि. (हिफी) शुरू की तब अच्छाई को वरीयता देने वाली पत्रकारिता और स्थानीय मझोले एवं छोटे समाचार पत्र-पत्रिकाओं को मदद करने का लक्ष्य ही सामने रखा था। यह संस्था अब नये तेवर और कलेवर के साथ 36 वर्ष की हो चुकी है।
स्व. अरविन्द मोहन स्वामी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में एक ऐसे पुष्प का सृजन किया था जिसके बीज धरती पर पड़े और आज देश भर के लगभग दो हजार पत्र-पत्रिकाएं विविध विषयों के ज्ञानवर्द्धन आलेखों व समाचारों का प्रकाशन कर रहे हैं। पत्रकारिता में प्रतिद्वन्दिता, इलेक्ट्रानिक मीडिया और सोशल मीडिया के चलते बहुत बढ़ गयी है और पिंट मीडिया में छोटे और मंझोले समाचार पत्र-पत्रिकाओं का टिकपाना बहुत मुश्किल हो गया है। हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा (हिफी) ने मौलिक लेखन को प्राथमिकता दी। हिफी फीचर आलेखों का सामाजिक एवं बौद्धिक महत्व हमेशा बना रहता है। अरविन्द मोहन स्वामी ने पत्रकारिता को समाज के हित में कार्य करने का एक संसाधन बनाया और स्वार्थ पूर्ति से हमेशा दूर रखा। पत्रकारिता को मिशन बनाना आज दुरूह जरूर है लेकिन असंभव भी नहीं, अरविन्द मोहन स्वामी ने इसीलिए हिफी के माध्यम से विज्ञापन आलेखों का सहारा लिया और इससे छोटे – मझोले समाचार पत्रों को भी आर्थिक संबल मिला। हिफी ने रचनात्मक पत्रकारिता से गांव, कस्बों और शहरों को भी जोड़ा। इस प्रकार हिफी का बीज पत्रकारिता की धरती पर कई छायादार और फलदार वृक्षों में मौजूद है, जो अपने बीजों से नये-नये वृक्ष पैदा कर रहे हैं, वहीं पत्रकारिता की गरिमा रूपी सुगंध भी दूर-दूर तक बिखरी हुई है।
अरविन्द मोहन स्वामी को बहुत बड़े क्षेत्र में कार्य करना था इसलिए वह थोड़ी-बहुत पंूजी लेकर गाजियाबाद से प्रदेश की राजधानी लखनऊ आ गये। यहीं से उन्होंने पत्रकारिता शुरू की। सन् 1949 के दिसम्बर महीने में श्री शिवशंकर आप्टे ने मुंबई में हिन्दुस्थान समाचार प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी से पहली भारतीय हिन्दी समाचार एजेंसी शुरू की थी। जून 1957 में हिन्दुस्थान समाचार प्राइवेट लिमिटेड का विलय कर हिन्दुस्थान समाचार सहकारी समिति लिमिटेड के नाम से एक सहकारी संस्थान बना। श्रीमती इन्दिरा गांधी ने 1975 में जब देश में आपातकाल लागू किया तो समाचार पत्रों पर भी नकेल कस दी गयी और सभी समाचार एजेंसियों को मिलाकर ‘समाचार’ नाम से हिन्दी समाचार एजेंसी बनायी गयी। इस ‘समाचार’ एजेंसी में हिन्दुस्थान समाचार सहकारी समिति लि. भी समाहित हो गयी। श्रीमती इन्दिरा गांधी की सत्ता पलटने के बाद सन् 1978 में इस संस्था का पुनः गठन हुआ। अरविन्द मोहन स्वामी के पत्रकारिता अनुभव को देखते हुए 3 जुलाई 1987 को उन्हें हिन्दुस्थान समाचार सहकारी समिति लि. का प्रबंध निदेशक बनाया गया। जून 1988 में इंडोनेशिया में सम्पन्न समाचार एजेंसियांे के सम्मेलन में श्री अरविन्द मोहन स्वामी ने विचार रखा कि समाचारों के साथ समाचार विश्लेषण और विभिन्न विषयों पर फीचर को प्रमुखता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को समाचार विश्लेषण और फीचर के रेडी-टू-प्रिंट मिल जाएं तो उनका आर्थिक बोझ कम हो सकता है। उनके इस विचार को जब तवज्जों नहीं मिला तो श्री अरविन्द मोहन स्वामी ने हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा
प्राइवेट लिमिटेड की नींव डाली
और छोटे, मझोले अखबारों, पत्रिकाओं को रेडी-टू-प्रिंट उपलब्ध कराने
लगे।
14 मई सन् 2000 को एक बड़ा झटका लगा जब मात्र 52 वर्ष की अवस्था में श्री अरविन्द मोहन स्वामी हृदयगति रुकने से ब्रह्मलीन हो गये। एक समय तो लगा कि जैसे सब कुछ बिखर जाएगा लेकिन अरविन्द मोहन स्वामी की बेटी मनीषा स्वामी, पुत्र युधिष्ठिर स्वामी, दामाद ऋषि कपूर तथा बहू मोहिता स्वामी ने हिफी की गाड़ी को गतिमान रखा। इस प्रकार हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा लि. का कार्य क्षेत्र विस्तृत होता चला गया। एक तरफ समाचार विश्लेषण, देश के प्रमुख समाचार और विभिन्न विषयों पर सारगर्भित लेख प्रकाशित होते थे तो दूसरी तरफ अपना प्रिंटिंग प्रेस जाॅब वर्क कर रहा था। हिफी की विश्वसनीयता को देखते हुए हिन्दुस्तान यूनी लीवर, महिन्द्रा जैसी नामी गिरामी कंपनियों ने विज्ञापन मिश्रित आलेख के लिए हिफी को दायित्व सौंपा।
हाल ही में वर्ष 2023 मंे हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा को आईएनएस की मान्यता प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उससे कुछ समय पूर्व फीचर का कार्य एक पृथक संस्था हिफी फीचर एल.एल.पी. द्वारा सफल रूप से क्रियान्वित किया जाने लगा।
हिफी फीचर एलएलपी के आलेख देश के कई राज्यों में लगभग 2400 समाचार पत्र-पत्रिकाओं में दैनिक रूप से प्रकाशित होते हैं। ये सामयिक एवं ज्ञानवर्द्धक लेख ईमेल द्वारा भी उपलब्ध हैं। इनमें दैनिक विषयों का आकलन होता है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में भी काम आ सकता है तथा अद्यतन जानकारी देता है।
इस प्रकार अरविन्द मोहन स्वामी ने हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा के जिस रचनात्मक आंदोलन की कल्पना की थी उसे मनीषा स्वामी कपूर और हिफी के कर्मठ कर्मचारियों ने एक मजबूत और प्रेरणादायी आधार दे दिया है। हिफी में प्रकाशित समाचार विश्लेषण, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, खेल जगत, फिल्म जगत, कृषि बागवानी, सौंदर्य-स्वास्थ्य पर छोटे लेकिन गंभीर लेख बड़े चाव से पढ़े जाते हैं और छोटे व मंझोले समाचार पत्र व पत्रिकाओं को बहुत ही कम कीमत पर उपलब्ध हो जाते हैं। इन समाचार पत्रों-पत्रिकाओं के लिए लेखकों का पारिश्रमिक उनकी आर्थिक सीमा से बाहर हो जाता है, इसलिए हिफी उनके लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
आईएनएस मान्यता के बाद हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा को राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन का बड़ा क्षितिज मिल गया है। हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का प्राण प्रतिष्ठा समारोह संदेश हिन्दी, अंग्र्रेजी और अन्य भाषाओं के समाचार पत्रों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया था। समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य करना ही इस संस्था की पहचान है और मनीषा स्वामी कपूर इसका विशेष ध्यान रखती हैं। (मनीषा-हिफी फीचर)

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