तेलंगाना में राजनीति का सुखद अध्याय

दक्षिण भारत के राज्य तेलंगाना में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने मशहूर क्रिकेटर अजहरुद्दीन और प्रोफेसर एम कोडंडाराम रेड्डी को विधान परिषद का सदस्य नामित किया है। दोनों कांग्रेस के नेता हैं और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मर्जी से राज्यपाल ने अपने कोटे से इन्हें नामित किया है। वैसे तो यह सामान्य प्रक्रिया लगती है लेकिन मौजूदा राजनीति में यह एक सुखद अध्याय माना जा रहा है। अमूमन केन्द्र सरकार से इतर राज्य में किसी दल या दलों की सरकार होती है तो राज्यपाल वहां की सरकार के कार्य में रोड़े अटकाते हैं। कांग्रेस के शासन काल में भी यही होता था और अब भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सरकार के समय भी उन सभी राज्यों की सरकार को राज्यपाल से शिकायतें हैं जहां भाजपा विरोधी सरकार हैं। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड और हिमाचल प्रदेश इसके उदाहरण हैं। तेलंगाना में भी कांग्रेस की सरकार है लेकिन राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने सरकार की राय को मान लिया। पूर्व में नामित दो सीटों के खाली होने पर उन्हें भरा गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी, जिसका पहले नाम तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) हुआ करता था और अब उसने अपना नाम भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) कर लिया है, के नेता ने मुख्यमंत्री पर भाजपा से साठगांठ करने का आरोप लगाया हालांकि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी परिसीमन का विरोध कर चुके हैं जिसके आधार पर एनडीए सांसदों की संख्या बढ़ाना चाहती है।
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कांग्रेस नेता और राज्य मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन और प्रोफेसर एम. कोडंडाराम रेड्डी को तेलंगाना विधान परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया है। राज्यपाल द्वारा नामांकन के बाद दोनों कांग्रेस नेताओं ने एमएलसी पद की शपथ ली है। दोनों के नामांकन को राज्य की सियासत में अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों सदस्यों का नामांकन राज्यपाल के कोटे से किया गया है। यह नामांकन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत राज्यपाल को प्राप्त अधिकारों के अंतर्गत किया गया है। जारी हुई अधिसूचना में बताया गया है कि पूर्व में नामित सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन दो खाली सीटों को भरने के लिए यह निर्णय लिया गया है। दोनों सदस्यों का कार्यकाल अधिसूचना की तारीख से 6 साल तक प्रभावी रहेगा।
यह आदेश 26 अप्रैल 2026 को जारी किया गया, जिसे राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला की स्वीकृति के बाद लागू किया गया। आदेश पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सरकार के सचिव सी सुदर्शन रेड्डी के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। तेलंगाना कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की थी। तेंलगाना कांग्रेस ने कहा कि मोहम्मद अजरुद्दीन और प्रो. एम. कोडंडाराम रेड्डी एमएलसी के रूप में शपथ ली।
राज्यपाल और सरकार के बीच तालमेल के लिए मुख्यमंत्री रेेवंत रेड्डी की भूमिका की भी तारीफ करनी होगी। संभवतः इसीलिए मुख्य विपक्षी बीआरएस के नेता उनकी आलोचना करते हैं। तेलंगाना में नगर पालिका चुनावों के लिए जोरदार प्रचार अभियान चल रहा था और नेता एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधते हए नजर आ रहे थे। इस दौरान भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने रेवंत रेड्डी को कांग्रेस में बीजेपी का ट्रोजन हॉर्स बताया, यानी एक ऐसा छिपा हुआ दुश्मन जो अंदर से हमला करता है। एक बड़े रोडशो के बाद सभा को संबोधित करते हुए केटीआर ने मतदाताओं से, खासकर अल्पसंख्यकों से अपील की कि वे कांग्रेस का मुखौटा हटाकर उसके नीचे छिपे भगवा रंग को देखें।
केटीआर ने कहा, रेवंत दिल से कभी कांग्रेसी नहीं थे, वे पूरी तरह बीजेपी वाले हैं। वे दिल्ली के बड़े भाई के छोटे भाई जैसे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री और बीजेपी के शीर्ष नेताओं के बीच कोई गुप्त समझौता है। केटीआर ने मुख्यमंत्री के बढ़ते हुए आक्रामक और अक्सर गंदी भाषा वाले राजनीतिक अंदाज पर तंज कसा। उन्होंने रेवंत को लगुला थोंडाला रेड्डी (पैंट में छिपी छिपकली वाला रेड्डी) कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि रेवंत शासन के बजाय गाली-गलौज पर ध्यान देते हैं। जब विपक्ष उनसे 420 असफल वादों की जवाबदेही मांगता है, तो वे आंतें निकालने या आंखों से गोटियां खेलने जैसी सड़क छाप धमकियां देते हैं। केटीआर ने कहा, 2 साल से उनकी सरकार का एक ही एजेंडा है, केसीआर की आलोचना करना। वे केसीआर का नाम इतना जपते हैं जितना कोई भक्त राम कोटि लिखता है। बीआरएस की आलोचना से परे रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए जनसंख्या को एकमात्र पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि इस तरह के मानदंड से लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में छह प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। प्रस्ताव पेश करने वाले मुख्यमंत्री रेड्डी ने दावा किया कि यदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो लोकसभा की सीट संख्या में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व 24 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत रह जाने की आशंका है।
रेड्डी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करके केंद्र सरकार के गठन में उन्हें अप्रासंगिक बनाने की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने तेलंगाना के सभी दलों से राज्य के हितों की रक्षा के लिए केंद्र से मिलकर बात करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘अगर केंद्र (हमारे मुद्दे पर) एकमत है तो ठीक है, अन्यथा हमें संघर्ष करना होगा। रेवंत रेड्डी ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे परिसीमन पर उनकी सरकार द्वारा आयोजित की राजनीतिक दलों और जन संगठनों की बैठक में शामिल हों। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल होने वाले लोगों को केंद्र के साथ मुद्दों को सुलझाने में एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन केंद्र ने कहा था कि वह 2026 की जनगणना के बाद ही निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करेगा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि तेलंगाना और अन्य दक्षिणी राज्यों को उनके द्वारा दिए गए करों के अनुपात में केंद्र से धन नहीं मिल रहा है, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को अधिक धन दिया जा रहा है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



