लेखक की कलम

लद्दाख में पांच नये जिलों का गठन

इन दिनों परिसीमन की राजनीति चल रही है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर भी विपक्षी दलों की मुख्य आपत्ति परिसीमन को लेकर ही बतायी गयी थी। इसी के चलते राज्यों में नये-नये जिले बनते हैं। घोषित रूप से मकसद क्षेत्र का विकास ही होता है लेकिन विपक्षी दलों की तरफ से सवाल हमेशा उठाया जाता है और आम जनता ने भी यह महसूस किया कि नये राज्य बनने अथवा नया जिला बनने से समस्या ज्यादा खड़ी होती है और विकास कम होता है। इसलिए जम्मू-कश्मीर राज्य को तोड़कर लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाते समय गृह मंत्री अमित शाह ने जनता से जो वादा किया था उसे उप राज्यपाल लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) वीके सक्सेना ने अब पूरा कर दिया है। उप राज्यपाल सक्सेना ने लद्दाख में पांच नये जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। अब नये जिलों के साथ लद्दाख में सात जिले हो गये हैं और उप राज्यपाल की तरफ से कहा जा रहा है कि नागरिकों को करीब लाने के अलावा विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी मिलेंगे। यह भी ध्यान रहे कि गृह मंत्री अमित शाह ने 2004 में जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करते समय राज्य में पांच नये जिले गठित करने का निर्णय भी लिया था। लद्दाख में नागरिक सुविधाओं के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोमन वांगचुक की गिरफ्तारी और अर्से बाद रिहाई से भी उप राज्यपाल का यह कदम जुड़ा हुआ माना जाता है। लद्दाख के पूर्व उप राज्यपाल कविन्दर गुप्ता के इस्तीफे के बाद दिल्ली से आये वीके सक्सेना अब राज्य में अशांति पैदा होने की संभावनाएं खत्म कर रहे हैं।
लद्दाख के उपराज्यपाल ने पांच नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पांच नए जिलों के गठन के साथ ही अब लद्दाख में कुल जिलों की संख्या सात हो जाएगी। इसके अलावा उन्होंने इस फैसले को शासन को नागरिकों के करीब लाने के अलावा, विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करने वाला बताया। उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक दिन। मैंने लद्दाख में पांच नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है, जिससे लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया जा रहा है। नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास – इन पांच नए जिलों के गठन के साथ, लद्दाख में अब दो के बजाय सात जिले हो जाएंगे। यह विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और समृद्ध लद्दाख के विजन के अनुरूप है। उपराज्यपाल ने आगे लिखा, गृह मंत्रालय द्वारा अगस्त 2024 में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पहले ही अनुमोदित यह परिवर्तनकारी निर्णय जमीनी स्तर पर शासन को मजबूत करेगा, प्रशासन का विकेंद्रीकरण करेगा और लद्दाख के लोगों, विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वालों को सार्वजनिक सेवाओं की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, नए जिलों का गठन, शासन को नागरिकों के करीब लाने के अलावा, विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा करेगा। मैं इस ऐतिहासिक निर्णय से लद्दाख के प्रत्येक नागरिक को लाभान्वित करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता हूं, क्योंकि हम सब मिलकर एक उज्जवल, मजबूत और अधिक समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। यहां पर ध्यान देने की बात है कि लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लम्बा अनशन किया। उनकी मांग पूर्ण राज्य का दर्जा देने के साथ विकास की भी थी। उन्होंने गत महीने रैलियां आयोजित की थी। लेह और करगिल में हुई रैलियों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस रैली के आयोजन की तैयारी वांगचुक के रिहाई से पहले ही होने लगी थी।कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई के दो दिन बाद, लेह और करगिल शहरों में रैलियां निकाली गईं। केंद्र सरकार पर लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची लागू करने की मांगों पर जल्द बातचीत फिर शुरू करने को लेकर दबाव बनाने के लिए ये रैलियां आंदोलनकारी संगठनों के आह्वान पर आयोजित की गई। लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के प्रदर्शन के आह्वान के मद्देनजर, करगिल और उससे सटे द्रास में भी पूर्ण बंद देखा गया। ये दोनों समूह पिछले पांच सालों से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रदर्शन के आह्वान के मद्देनजर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। सितंबर में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से एलएबी द्वारा यह पहली बड़ी रैली थी। यह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत लगभग छह महीने की हिरासत के बाद केंद्र द्वारा रिहा किए जाने के दो दिन बाद हुई है। वांगचुक की रिहाई से पहले एलएबी और केडीए ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ अगले दौर की बातचीत की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था, जैसा कि उच्चाधिकार समिति की बैठक के दौरान वादा किया गया था।
एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे के नेतृत्व में, प्रदर्शनकारियों ने सिंगे नामग्याल चैक से शुरुआत की और लेह पोलो मैदान तक मार्च किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं सहित अन्य ने लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांगों के समर्थन में नारे लगाए। आंदोलन के एक प्रमुख नेता वांगचुक को सितंबर में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र ने घोषणा की कि वह सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को सुगम बनाने के लिए वांगचुक की हिरासत रद्द कर रहा है।
लद्दाख में असंतोष मुख्य रूप से राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, और स्थानीय नौकरियों की मांग को लेकर है। 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, स्थानीय लोगों को डर है कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, जमीन और पर्यावरण (जैसे सोनम वांगचुक का आंदोलन) बाहरी निवेश के कारण खतरे में हैं। 2025 में यह आंदोलन हिंसक भी हुआ। लद्दाख के नेता अपनी जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा (छठी अनुसूची) चाहते हैं, ताकि बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने पर रोक लग सके। इसके साथ ही 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, लद्दाख में अपनी विधानसभा नहीं है। लोग चाहते हैं कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, न कि प्रशासन सिर्फ उपराज्यपाल या केंद्र के हाथ में हो।
माना जा रहा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से स्थानीय युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़ी है (18 प्रतिशत से अधिक), और गेस्टेड पदों पर नियुक्ति का अधिकार भी खत्म हो गया है। लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र, ग्लेशियरों और पानी की कमी को लेकर चिंता है, विशेष रूप से बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के आने की खबरों के बाद। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध, अनशन और पदयात्रा के माध्यम से जागरूकता फैला रहे हैं। (हिफी)

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