राजकपूर भी बन गये थे मन्ना डे के दीवाने

बतौर गायक मन्ना डे की सफलता की कहानी भी बहुत चैंकाने वाली है। मन्ना ने फिल्मों में गायकी की शुरुआत सन् 1942-1943 से की थी। उनकी शुरुआती फिल्मों में शामिल हैं- तमन्ना और राम राज्य। तमन्ना में उन्होंने जागो आई उषा पंछी बोले गाना गाया था। उस गाने में मन्ना डे के साथ तब की मशहूर गायिका सुरैया ने साथ दिया था। वहीं राम राज्य में उन्हें पहली बार एकल स्वर देने का अवसर मिला। राम राज्य के बारे में माना जाता है कि यही एकमात्र फिल्म है, जिसे महात्मा गांधी ने पहली और आखिरी बार देखा। गीत के बोल थे- गई तू गई सीता सतीइस प्रकार मन्ना डे की शुरुआत तो हो गई लेकिन सफलता अब भी इंतजार कर रही थी। मन्ना ने जिस वक्त फिल्मों में गाना शुरू किया, उस वक्त केएल सहगल के बाद मुकेश और मो। रफी साहब का प्रभाव तेजी से बढ़ने लगा था।
राजकपूर को फिल्म के विषय, कलाकार, कहानी और गीत-संगीत पक्ष से खास प्रेम था और अच्छा खासा ज्ञान भी था। उनके प्रिय संगीतकार थे-शंकर जयकिशन, चहेते गायक कलाकार थे- मुकेश और गीतकार- शैलेंद्र तथा हसरत जयपुरी। लेकिन मन्ना डे की गायकी भी उनको विशेष तौर पर प्रभावित करती थी। यही वजह है कि राज कपूर अपनी अधिकतम फिल्मों में तमाम गाने भले ही मुकेश और लता मंगेशकर से गवाते थे लेकिन एक गाना मन्ना डे की आवाज में जरूर रखते थे। प्यार हुआ इकरार हुआ, ये रात भीगी भीगी, लागा चुनरी में दाग से लेकर चलत मुसाफिर मोह लिया रे आदि तक। मनोज कुमार ने भी मन्ना डे की आवाज को फिल्म में वजन प्रदान करने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया- मसलन उपकार में कस्मे वादे प्यार वफा सब आदि। (हिफी)



