पंजाब में सियासी घात-प्रतिघात

पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात ने दल-बदल कर नया गुट बनाया और भारतीय जनता पार्टी में अपने गुट अर्थात दल का विलय कर लिया। इस विलय पर कानूनी बहस भी छिड़ी थी क्योंकि राज्यसभा में भेजे गये सांसद पार्टी विशेष की मर्जी से ही जाते हैं। बहरहाल इस बहस के बीच ही राज्य सभा के उप सभापति ने विलय की अनुमति दे दी। इस सियासी घात-प्रतिघात की शुरुआत राज्य सभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा पंजाब सरकार द्वारा वापस लेने और उन्हें राज्य सभा में पार्टी के उप नेता पद से हटाने के बाद हुई थी। राघव चड्ढा पर उनकी पार्टी ने जो घात किया था उसका जवाब केन्द्र सरकार ने दिया और राघव चड्ढा को जेड श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करा दी। उसी समय एक घटना और उल्लेखनीय है। आम आदमी पार्टी के ही राज्य सभा सदस्य, अशोक मित्तल जिनको राघव चड्ढा की जगह उपनेता बनाया गया था उनके ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की थी। इसके तीसरे दिन ही आप के 7 राज्य सभा सदस्यों ने अलग दल बनाया। इनमें अशोक मित्तल और पंजाब की सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले संदीप पाठक भी शामिल हैं। संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब के ही दो अलग-अलग जिलों में गैर जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की गयी है। दोनों ही एफआईआर अलग-अलग घटनाओं से जुड़ी है। इन दोनों एफआईआर को लेकर आम आदमी पार्टी और सांसद संदीप पाठक दोनों ने ही अनभिज्ञता जताई है। उधर, भाजपा के अनुसार इन दोनों मामलों में कार्रवाई के सिलसिले में पंजाब पुलिस दिल्ली पहुंची। यह भी बताया गया कि राज्य सभा सदस्य संदीप पाठक ने अपना मोबाइल बंद कर दिया है और सरकारी आवास छोड़कर कहीं बाहर चले गये हैं। आम आदमी पार्टी (आप ) के पूर्व सदस्य और राज्यसभा सांसद संदीप पाठक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पंजाब में दो अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। जानकारी के मुताबिक, दोनों ही मामले गैर जमानती धाराओं में दर्ज हैं, जिससे कानूनी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों एफआईआर अलग अलग घटनाओं से जुड़ी हैं। हालांकि, अभी तक आरोपों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। मामले की जांच पंजाब पुलिस कर रही है और आगे की कार्रवाई तेज किए जाने के संकेत हैं। जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी की जा सकती है। बीजेपी के मुताबिक, इन मामलों में कार्रवाई के सिलसिले में पंजाब पुलिस दिल्ली पहुंची है। पार्टी का आरोप है कि जब यह जानकारी मीडिया के जरिए सामने आई, उसके बाद संदीप पाठक ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और फिलहाल किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं, क्योंकि उन्हें गिरफ्तारी की आशंका है। एक समय आप के भीतर पंजाब के चाणक्य कहे जाने वाले संदीप पाठक पर दर्ज इन मामलों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी एफआईआर की कोई जानकारी नहीं है और न ही किसी पुलिस अधिकारी ने इस संबंध में उनसे संपर्क किया है। मैंने पूरी जिंदगी ईमानदारी और निष्ठा के साथ देश की सेवा की है। देश किसी भी पार्टी से बड़ा है। मैं कभी इसे धोखा नहीं दूंगा और न किसी को देने दूंगा। अगर मेरे जैसे व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है, तो यह दिखाता है कि वे कितने डरे हुए हैं। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी लीगल सेल को भी इस मामले में शामिल किया गया है। पार्टी का दावा है कि लीगल सेल की भूमिका संदीप पाठक के लिए कानूनी राहत सुनिश्चित करने से जुड़ी है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। इन दावों के बीच यह भी साफ किया गया है कि पंजाब पुलिस या संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों का पूरा विवरण भी सार्वजनिक नहीं है।
संदीप पाठक ने खुद पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पृष्ठभूमि- संदीप पाठक अप्रैल 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था। वह 10 साल तक आप में रहने के बाद हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए थे। गिरफ्तारी की संभावनाओं के बीच राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को दिल्ली स्थित अपने घर से गाड़ी में बैठकर बाहर निकलते हुए देखा गया है।
संदीप पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने आप छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है। आप को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात- संदीप पाठक, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिन्दर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी अपने सिद्धांतों, मूल्यों और बुनियादी आदर्शों से भटक गई है। इन सात सांसदों में से छह पंजाब से हैं। वहीं बाद में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने बीजेपी में उनके शामिल होने को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया, जिससे राज्य सभा में ‘आप’ के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई। बता दें कि आम आदमी पार्टी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को गद्दार कहा था। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों ने जनता के जनादेश का अपमान किया है, वे किसी भी तरह की दया के पात्र नहीं हैं, क्योंकि वे पंजाब और पंजाबियों के गद्दार हैं। पंजाब में भगवंत मान की सरकार ने विश्वास भी प्रस्ताव लाया जो सर्वसम्मति से पास हो गया। अपने संबोधन में सदन में सीएम भगवंत मान ने आप छोड़कर बीजेपी में
शामिल हुए राघव चड्ढा का जिक्र किया और निशाना साधा। उन्होंने राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने पर कहा कि चाय और समोसे का मेल हो गया।
दरअसल, राघव चड्ढा ने समोसे का मुद्दा राज्यसभा में उठाया था। पीएम नरेंद्र मोदी और राघव चड्ढा पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि चाय और समोसे का मेल हो गया है। सीएम ने कहा कि हमने पार्टी को खून-पसीने से बनाया है। अरविंद केजरीवाल के लिए चट्टान बनकर खड़े हैं। इस पार्टी के लिए जान भी हाजिर है। सीएम मान ने कहा कि बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ने जो संविधान लिखा वो आज देश में तार-तार हो रहा है। जगह-जगह लोकतंत्र की हत्या हो रही है। कहीं वोट काटे जा रहे हैं तो कहीं जाली वोट बनाए जा रहे हैं। ईडी के छापे, किसी को डराया और लालच दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि बीजेपी के पास अपने लोग नहीं हैं। ये खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहते हैं लेकिन इनके पास लड़ने के लिए लोग नहीं हैं।
पंजाब विधानसभा में सरकार के पक्ष में विश्वासमत सर्वसम्मत्ति से पारित हुआ। कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। कुल 94 विधायकों में आम आदमी पार्टी के 88 विधायक सदन में मौजूद रहे। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



