लेखक की कलम

गौरव गोगोई की पराजय का यथार्थ

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे जब 4 मई को घोषित हो रहे थे, तभी रुख काफी साफ हो चुका था कि कहां किसकी सरकार बनने वाली है। मोटे रूप से कहा जाए तो मतदाताओं ने विकल्प तलाशा। पश्चिम बंगाल मंे भाजपा अच्छा विकल्प दिखी तो तमिलनाडु में थलपति विजय की टीवीके को मतदाताओं ने अच्छा विकल्प माना। असम मंे भाजपा का विकल्प नहीं मिला तो उसे फिर से सत्ता सौंप दी है। वहां गौरव गोगोई की पराजय का यथार्थ भी यही है। वह जोर हाट सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। उनके मुकाबले मंे भाजपा ने हितेन्द्र नाथ गोस्वामी को खड़ा किया था। गोस्वामी ने गोगोई को 23 हजार से ज्यादा वोटों के अन्तर से हराया है। दो साल मंे ही कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता कैसे कम हो गयी? साल 2024 के लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई ने भाजपा के तपन कुमार गोगोई को 1 लाख 44 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया था। इस बार विधानसभा चुनाव के मतदान से पहले ही कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ गये थे। इसका कारण भी गौरव गोगोई ही बताये जा रहे थे। असंतुष्टों ने इसकी शिकायत राहुल गांधी से भी की थी लेकिन राहुल गांधी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। इसका नतीजा अब विधानसभा चुनाव के नतीजे में दिख रहा है। असम मंे हिमंता विस्वा सरमा पर जनता ने पूर्ण विश्वास जताया है। गौरव गोगोई असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनके समय ही कई दिग्गज कांग्रेस से अलग हुए। हिमंता भी पहले कांग्रेस मंे ही थे।
असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई चुनाव हार गए हैं। बीजेपी के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने उन्हें 23 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है। वोटों की गिनती में पिछड़ने के बीच असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाना शुरू कर दिया था। गोगोई ने कहा कि प्रशासन की ओर से काफी लापरवाही देखने को मिली। असम में बीजेपी बंपर जीत की ओर बढ़ रही थी। ऐसे में गुवाहाटी स्थित बीजेपी ऑफिस में सेलिब्रेशन शुरू हो गया। बीजेपी कार्यकर्ता ढोल-नगाड़े बजा अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे। गौरव गोगोई की जोरहाट सीट से हार कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। वह असम में कांग्रेस के सबसे दिग्गज नेता हैं। प्रदेशाध्यक्ष भी हैं। असम में कांग्रेस को जीत दिलाने का जिम्मा गौरव गोगोई के कंधों पर था लेकिन गौरव गोगोई असम में अपनी जोरहाट सीट को ही नहीं बचा पाए। जोरहाट सीट पर उन्हें छोटी नहीं, बल्कि बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। गौरव गोगोई को जोरहाट सीट पर 46257 वोट मिले वहीं, बीजेपी के हितेंद्र को यहां 69439 वोट मिले हैं। हितेंद्र नाथ ने गोगोई को 23 हजार 182 वोटों के अंतर से हराया है। ऐसे में कांग्रेस की ताकत असम में और कमजोर होगी।
गौरव गोगोई विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरे थे, जबकि पांच बार के विधायक गोस्वामी इस सीट को बरकरार रखने की कोशिश कर रहे थे जिसमें वह कामयाब रहे। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गोगोई ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के तपन कुमार गोगोई को 1,44,393 मतों के अंतर से हराकर जोरहाट लोकसभा सीट जीती थी। इधर, असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के शैलेन सोनोवाल को 32, 229 मतों के अंतर से हराकर धेमाजी सीट जीत ली।
गौरव गोगोई का जन्म 4 सितंबर 1982 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता, तरुण गोगोई , 2001 से 2016 तक असम के मुख्यमंत्री रहे और राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री थे। गौरव गोगोई ने दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 2004 में गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री पूरी की और फिर एयरटेल की मार्केटिंग टीम में शामिल हो गए। उन्होंने 2005 में एयरटेल की नौकरी छोड़कर दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन प्रवाह में काम करना शुरू किया। बाद में वे लोक प्रशासन का अध्ययन करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। उनके पास न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री है। उन्हें नृत्य और कोरियोग्राफी का भी शौक है। गोगोई ने ब्रिटेन में जन्मी एलिजाबेथ कोलबोर्न से शादी की। 2014 में, वे कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और कालीबोर से भारतीय संसद के सदस्य के रूप में कार्य किया। भारत लौटने के बाद, गोगोई ने राजनीति में प्रवेश किया और कहा कि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए कोई भी भूमिका निभाने को तैयार हैं। मार्च 2014 में, कांग्रेस ने गोगोई को कालीबोर लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया। घोषणा के बाद, गोगोई ने 19 मार्च 2014 को कालीबोर से अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार मृणाल कुमार सैकिया के खिलाफ 93,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 2019 में गोगोई कालीबोर से पुनः निर्वाचित हुए। उन्होंने असम गण परिषद के उम्मीदवार मोनी माधव महंत को 786,092 वोटों से हराया और 209,994 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 2024 में, गोगोई ने जोरहाट से चुनाव लड़ा, जहां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक तोपन कुमार गोगोई को 751,771 वोटों से हराया और 144,393 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इसके बावजूद उनके नेतृत्व में 2026 में असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को बड़े झटके लगे हैं, जिसमें कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। प्रद्युत बोरदोलोई नौगांव से कांग्रेस सांसद और पूर्व मंत्री ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए। इससे पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया। नवज्योति तालुकदार असम कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी। पार्टी छोड़ने के प्रमुख कारण में नेताओं ने संगठन में अनदेखी और आंतरिक असंतोष का हवाला दिया। टिकट वितरण में असहमति भी बतायी। बता दें कि 2015 में वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत विस्वा सरमा ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
इस प्रकार 9 अप्रैल को असम में वोटिंग हुई। लेकिन कांग्रेस अपनी तैयारी शुरू करने से पहले ही अपने दो ‘सेनापति’ को खो चुकी थी। चुनाव से ठीक पहले पार्टी के भीतर भगदड़ जैसे हालात हो गये।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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