शिवसेना में फिर टूट के आसार

राजनीति में अब सत्ता का सुख पार्टी निष्ठा पर भारी पड़ने लगा है। पश्चिम बंगाल में सत्ता जाते ही टीएमसी में जिस तरह भगदड मची उससे यही साबित हुआ। इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना टूट गयी थी। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) जल्द ही एक बार फिर बड़े विभाजन का सामना कर सकती है। खबरें हैं कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले ही दल के सांसद बगावत कर सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। पार्टी के असंतुष्ट सांसदों की संख्या 7 बताई जा रही है। ये घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस में जारी टूट के बीच हो रहे हैं। शिवसेना यूबीटी क्यों टूट रही है। इसपर एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा, श्पता नहीं उनकी पार्टी में क्या है। वो तो वही लोग जानते हैं लेकिन शिंदे साहब की जो कार्यशैली है, जिस तरह से वह सभी सामान्य जनता को न्याय देने का काम करते हैं। …उनका काम करने का तरीका इन लोगों को पसंद आया है। इसलिए वह चाहते हैं कि उनके मतदाताओं का विकास भी हो। इसलिए वो हमारे साथ आ रहे हैं। उद्धव ठाकरे के वापसी के दावे पर उन्होंने कहा, यह उनकी सोच है। उनकी सोच के बारे में हमारा बोलना उचित नहीं है लेकिन सभी 7 सांसदों को कुछ न कुछ तकलीफ होगी। इसलिए वो हमारे साथ आना चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमारी चर्चाएं एक महीने से चल रही थीं। अब वह अंतिम चरण में। जैसे ही डॉक्टर समय देंगे, वह ऑपरेशन करेंगे। उन्होंने कहा, शिवसेना मजबूत है और आगे और मजबूत होगी। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि 14 से 16 विधायक पार्टी से अलग हो सकते हैं। साथ ही कहा है कि यह टूट आने वाले 6 से 7 दिनों के अंदर हो सकती है। खास बात है कि अगर ऐसा होता है, तो उद्धव गुट में यह दूसरा सबसे बड़ा विभाजन होगा। हालांकि शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने अतीत में कांग्रेस छोड़कर नया दल बनाने वाले तमाम नेताओं से फिर से वापस आकर एकजुट होने की मांग की है। उन्होंने शरद पवार से इसकी पहल करने के लिए कहा है। उधर, महाराष्ट्र सरकार में शामिल एनसीपी में भी नेतृत्व का विरोध दिख रहा है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजीत पवार के छोटे बेटे जय पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की शीर्ष कार्यकारिणी में एंट्री हो गई है। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जय पवार का पार्टी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाली समिति में शामिल होना महज एक पारिवारिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पार्टी के भीतर बढ़ते अविश्वास और सियासी संकट का संकेत बताया जा रहा है।
एकनाथ शिन्दे की शिवसेना के एमएलसी कृपाल तुमाने ने उद्धव की शिवसेना यूबीटी में टूट के संकेत दिए हैं। उन्होंने इसे एक ऑपरेशन करार दिया है। साथ ही कहा है कि इसे लेकर काफी दिनों से बैठकों का दौर चल रहा है था। उन्होंने जानकारी दी है कि अब चर्चाओं का दौर कुछ ही समय में पूरा होने वाला है। उनका दावा है कि 7 सांसदों ने पाला बदलने का मन बना लिया है। तुमाने ने कहा, श्ऐसा है कि ऑपरेशन टाइगर के मामले में जो 7 सांसदों के साथ हमारी चर्चा अंतिम चरण में आ चुकी है। उन्होंने कहा जब हम ऑपरेशन करने किसी अस्पताल में जाते हैं, तो पहले जांच की जाती है। जांच हो चुकी है, रिपोर्ट्स आ चुकी है और बस अब ऑपरेशन का दिन तय होना है। उन्होंने कहा, मॉनसून सत्र के पहले ही हो जाएगा। उन्होंने विलय की अटकलों को लेकर स्थिति साफ नहीं की। शिवसेना नेता ने कहा, हमारी सारी बातें हैं। आपको बताना अभी ठीक नहीं है। ये हमारे साथ आएंगे, ये बात पक्की है। आ गए हैं लगभग।
शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ऐसी अटकलों से इनकार किया है। तुमाने के बयान पर उन्होंने कहा, वह हैं कौन। महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है। आज शिंदे गुट में कुछ लोग हैं और कुछ भी कहते हैं। पार्टी को कौन तोड़ेगा। बीते 12 सालों में भाजपा ने राजनीतिक दलों को सिर्फ तोड़ने का काम किया है। उन्होंने टीएमसी तोड़ दी। इससे पहले उन्होंने ऐसा एनसीपी और शिवसेना के साथ किया।
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 13 जून को कहा कि कांग्रेस कोई डूबता हुआ जहाज नहीं है और उन्होंने एक बार फिर कहा कि अतीत में कांग्रेस छोड़कर अलग दल बनाने वाले नेताओं को फिर से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत करना चाहिए। राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार से इस दिशा में पहल करने की अपील करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विकृत राजनीति का मुकाबला करने के लिए सभी को एक साथ आना होगा। उनकी यह टिप्पणी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा एक दिन पहले कांग्रेस को डूबता हुआ जहाज बताए जाने और यह कहे जाने के बाद आई है कि कोई समझदार व्यक्ति उसमें (कांग्रेस में) सवार नहीं होगा। राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, श्श्यदि हम वास्तव में भाजपा की विकृत राजनीति के खिलाफ लड़ना चाहते हैं, तो सभी को एकजुट होना होगा। कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनना चाहिए। कांग्रेस छोड़कर गए सभी नेताओं को पहले एक साथ आना चाहिए। यदि वरिष्ठ नेता शरद पवार पहल करें तो यह संभव हो सकता है। हम एक क्षेत्रीय पार्टी हैं और हम आपके साथ खड़े रहेंगे।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता ने कहा, आज भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कांग्रेस से डरते हैं। कांग्रेस कभी डूबता हुआ जहाज नहीं रही। शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में कथित असंतोष और ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर का इस्तेमाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सौ बार कर चुके हैं। उन्होंने कहा, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को तोड़ना लोकतंत्र की विकृति को दर्शाता है।
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ कथित तौर पर सत्तारूढ़ शिवसेना द्वारा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को अपने पक्ष में लाने की राजनीतिक रणनीति और गतिविधियों को कहा जाता है। राज्यसभा सदस्य ने कहा कि वर्तमान भाजपा नेतृत्व के दौर में यह विकृति अपने चरम पर पहुंच गई है, लेकिन एक दिन इसका अंत भी होगा। राज्य और देश, दोनों में इस तरह की राजनीति के खिलाफ विद्रोह होगा। राउत ने यह आरोप भी लगाया कि निर्वाचन आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है।
शिवसेना, भारत में स्थापित एक दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी राजनीतिक दल है।बाल ठाकरे ने 19 जून, 1966 को शिवसेना की स्थापना की थी। इसके सबसे अधिक अनुयायी मुंबई (बॉम्बे) और महाराष्ट्र राज्य के अन्य हिस्सों में हैं। प्रारंभ में शिवसेना की विचारधारा महाराष्ट्रीयन गौरव और क्षेत्रीय विशिष्टता तथा महाराष्ट्रियों को प्राथमिकता देने पर केंद्रित थी। पार्टी मुंबई में आने वाले प्रवासियों, विशेष रूप से दक्षिण भारत से आने वाले प्रवासियों से उत्पन्न आर्थिक और सांस्कृतिक खतरे का विरोध करती थी। यह विदेशियों के प्रति द्वेषपूर्ण और विशिष्ट विचारधारा बाद में दक्षिणपंथी मुस्लिम-विरोधी और साम्यवाद-विरोधी धारा में परिवर्तित हो गई, जो एक हिंदू राष्ट्रवादीविचारधारा के रूप में विकसित हुई। इसके सदस्यों और अनुयायियों को, जिन्हें शिवसैनिक कहा जाता है, कट्टर हिंदू चरमपंथी, अत्यधिक रूढ़िवादी और सामान्यतः मुस्लिम-विरोधी माना जाता है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



