यूक्रेन में पुतिन का घातक प्रहार

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। सोमवार तड़के रूस द्वारा किए गए बड़े पैमाने के मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, 53 से अधिक लोग घायल हुए और लाखों लोगों के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा। इस हमले की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इसकी चपेट में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि यूक्रेन की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें भी आ गईं। राजधानी कीव स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल प्रसिद्ध कीव-पेचेर्स्क लाव्रा मठ परिसर के डॉर्मिशन कैथेड्रल में लगी आग ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार रूस ने रातभर मिसाइलों और कामिकाजे ड्रोन की मदद से कई शहरों को निशाना बनाया। राजधानी कीव, खार्किव और अन्य प्रमुख शहरों पर हुए हमलों में आवासीय इमारतें, ऊर्जा ढांचे और सांस्कृतिक संस्थान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। लगभग 1.4 लाख घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे आम नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गईं।
इस हमले का सबसे प्रतीकात्मक और भावनात्मक असर कीव-पेचेर्स्क लाव्रा पर पड़ा। 11वीं शताब्दी में स्थापित यह मठ परिसर पूर्वी यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। ड्नीप्रो नदी के किनारे स्थित यह परिसर सदियों से ईसाई श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थस्थल रहा है। यहां मौजूद भूमिगत गुफाओं का जाल 600 मीटर से अधिक लंबा है और यह यूक्रेन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि एक रूसी कामिकाजे ड्रोन ने सीधे डॉर्मिशन कैथेड्रल की छत पर हमला किया, जिससे लगभग 800 वर्ग मीटर क्षेत्र में आग फैल गई। आग इतनी भीषण थी कि मठ के साधुओं और बचावकर्मियों को मानव श्रृंखला बनाकर धार्मिक प्रतीकों, प्राचीन मूर्तियों और बहुमूल्य धार्मिक अवशेषों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। घंटों की मशक्कत के बाद दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक ऐतिहासिक भवन का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका था।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले को रूस की युद्ध जारी रखने की मंशा का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल यूक्रेन पर हमला नहीं है, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और मानवता पर भी हमला है। जेलेंस्की ने जी-7 देशों से रूस पर और अधिक दबाव बनाने तथा यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की अपील की। विशेष रूप से उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली आधुनिक रक्षा प्रणालियों की मांग की।
हमले का असर केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रहा। यूक्रेन के संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि प्रसिद्ध ओलेक्सांद्र दोवझेंको राष्ट्रीय फिल्म स्टूडियो भी हमले की चपेट में आ गया। स्टूडियो के मुख्य परिधान भंडार को भारी नुकसान पहुंचा और लगभग एक लाख ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की वेशभूषाएं जलकर नष्ट हो गईं। यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि यूक्रेन की सांस्कृतिक स्मृति और फिल्म इतिहास के लिए भी अपूरणीय माना जा रहा है।
यूक्रेन के ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख मेट्रोपॉलिटन एपिफानियस प्रथम ने इस हमले को “मानवता, इतिहास और ईसाई धर्म के विरुद्ध अपराध” बताया। वहीं उप प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने कहा कि इस घटना ने रूस के तथाकथित धार्मिक और नैतिक मूल्यों की वास्तविकता को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
रूस के इस हमले की एक और भयावह घटना खार्किव शहर में सामने आई। यहां एक मिसाइल हमले के बाद लगी आग बुझाने पहुंचे आपातकालीन सेवा कर्मियों को दोबारा ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया। इस तथाकथित ष्डबल-टैपष् रणनीति में पहले हमला कर बचाव दल को मौके पर बुलाया जाता है और फिर उन पर दूसरा हमला किया जाता है। इस घटना में पांच बचावकर्मियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार ऐसे हमलों को अत्यंत गंभीर माना जाता है क्योंकि वे सीधे राहत और बचाव कार्यों को निशाना बनाते हैं।
इस हमले का समय भी महत्वपूर्ण है। एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग फोन कॉल में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की थी। जेलेंस्की ने कहा कि बातचीत में शांति की दिशा में संभावित कदमों पर चर्चा हुई, जबकि क्रेमलिन के अनुसार पुतिन और ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।
हालांकि, इन कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद रूस द्वारा किया गया यह हमला संकेत देता है कि युद्ध के मैदान में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस सैन्य दबाव बढ़ाकर संभावित शांति वार्ताओं में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। दूसरी ओर यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और अपनी वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
यह हमला एक बार फिर उस प्रश्न को सामने लाता है कि आधुनिक युद्धों में सांस्कृतिक विरासत और नागरिक ढांचे की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। यूनेस्को द्वारा संरक्षित स्थलों पर हमले केवल किसी एक देश की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि मानव सभ्यता की साझा धरोहर को भी खतरे में डालते हैं। जब ऐतिहासिक चर्च, संग्रहालय, पुस्तकालय और सांस्कृतिक संस्थान युद्ध का शिकार बनते हैं, तब नुकसान केवल वर्तमान पीढ़ी का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी होता है।
कुल मिलाकर, रूस का यह ताजा हमला यूक्रेन युद्ध की भयावहता को एक बार फिर उजागर करता है। नागरिकों की मौत, सांस्कृतिक धरोहरों का विनाश, ऊर्जा ढांचे पर हमले और बचावकर्मियों को निशाना बनाना इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाते हैं। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने चुनौती केवल युद्ध रोकने की नहीं, बल्कि मानवता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की भी है। आने वाले दिनों में जी-7 देशों और अन्य वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया इस संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



