सपा कार्यकर्ताओं का अति उत्साह

उत्तर प्रदेश मंे विधानसभा चुनाव अब नजदीक आ रहे हैं। सभी राजनीतिक दल जोर-शोर से तैयारियों मंे जुटे हैं। सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दल भी अपने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक की तैयारी करने को कह रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का लखनऊ दौरा इसी संदर्भ में देखा जाता है। उनकी सहयोगी अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भी गत 2 जुलाई को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान मंे जन स्वाभिमान दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर अनुप्रिया पटेल ने कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनाव में जुट जाने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं मंे जोश भरते हुए कहा कि हमारे दल को राजनीतिक विरोधी कभी वोट कटवा कहकर उपहास उड़ाते थे लेकिन आज वह 13 विधायकों के साथ सरकार मंे साझेदार है। इसी प्रकार कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र गौतम अपने कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि भाजपा को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती है। हालांकि इस संदेश का निशाना समाजवादी पार्टी की तरफ ज्यादा है जो 2027 मंे प्रदेश में सरकार बनाने की प्रबल संभावनाएं देख रही है। इसका कारण 2024 के लोकसभा चुनाव हैं जिनमंे अखिलेश यादव के पीडीए समीकरण ने भाजपा को पछाड़ दिया था। सपा कार्यकर्ताओं मंे अति उत्साह देखा जा रहा है। अभी गत 1 जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाया गया। इस अवसर पर बनारस मंे सपा कार्यकर्ताओं ने एक ऐसा पोस्टर जारी किया जिसमंे उन्हंे भगवान विष्णु (कृष्ण रूप) के अवतार में दिखाकर उनकी पूजा-अर्चना की गयी। सपा कार्यकर्ताओं का यह अति उत्साह अखिलेश यादव के लिए भारी पड़ सकता है। बिहार में तेजस्वी यादव के लिए इसी तरह का अति उत्साह राजद कार्यकर्ता भी दिखा रहे थे जिसका मतदाताओं पर गलत असर पड़ा था। हालांकि सपा नेताओं ने अखिलेश यादव के जन्मदिन से ही गांव-गांव डिजिटल ऐप के जरिए सदस्य बनाने की शुरुआत की है। अखिलेश यादव को यह याद रखना होगा कि योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी की गुण्डागर्दी की याद अक्सर दिलाते रहते हैं।
बनारस में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन पर एक विवादित पोस्टर जारी किया गया था। इस पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान विष्णु (कृष्ण रूप) के अवतार में दिखाकर उनकी पूजा-अर्चना की गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घटना के बाद से सनातन धर्म के अनुयायियों, संतों, महंतों और ब्रजवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। मामले पर आपत्ति जताते हुए फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने कहा है कि किसी भी इंसान की तुलना भगवान से नहीं की जा सकती। उन्होंने इसे सनातन धर्म का उपहास उड़ाने वाला कृत्य बताते हुए सरकार से दोषी कार्यकर्ताओं पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
श्री कृष्ण जन्मभूमि केस के मुख्य पक्षकार फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या सामान्य इंसान की तुलना भगवान से करना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। उन्होंने कहा कि भगवान के स्वरूप का इस प्रकार राजनीतिक प्रचार या व्यक्तिपूजा के लिए उपयोग करना सनातन परंपरा का अपमान है। इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर सभी राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं को संयम बरतना चाहिए। इस घटना के बाद ब्रज क्षेत्र के कई संतों और धर्माचार्यों ने भी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था
का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार का ऐसा कृत्य, जिससे समाज में विवाद या धार्मिक भावनाएं आहत हों, उससे बचना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 53वां जन्मदिन ऐसे समय पर आया है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव के जन्मदिन के साथ ही समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज कर दिया है। जन्मदिन के अवसर पर अखिलेश यादव ने प्रदेशव्यापी डिजिटल सदस्यता अभियान की शुरुआत की है और समाजवादी पार्टी ऐप भी लांच किया है। उन्होंने कहा कि सदस्यता अभियान के जरिए पार्टी बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचेगी और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि आज से पार्टी का चुनावी अभियान शुरू हो गया है। पार्टी जनता के बीच बेरोजगारी, महंगाई, किसानों को समय पर खाद न मिलना, किसानों की समस्याओं का समाधान न होना, नीट पेपर लीक और राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी जैसे मुद्दों को लेकर जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिस राजनीतिक जमीन को तैयार किया है, उसी आधार पर पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का फार्मूला हर मोर्चे पर सफल साबित होगा।
टिकट वितरण के सवाल पर फखरुल हसन चांद ने कहा कि अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे। उन्होंने कहा कि लगभग हर विधानसभा सीट पर कई दावेदार हैं, लेकिन पार्टी उसी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, जिसकी जीत की संभावना सबसे अधिक होगी। उन्होंने कहा कि जब से अखिलेश यादव ने राजनीति में कदम रखा है, तब से वह लगातार उनके साथ हैं और उन्हें करीब से जानते हैं। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव आज भी पहले की तरह सरल और कार्यकर्ताओं के बीच रहने वाले नेता हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष, सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी के लिए संघर्ष किया है। अब पार्टी का लक्ष्य 2027 में विधानसभा चुनाव जीतकर उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाना है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि जिस तरह पीडीए प्रहरियों ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अभियान चलाया, उसी तरह अब सदस्यता अभियान को भी गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। इससे एक ओर संगठन मजबूत होगा तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में नए लोग समाजवादी पार्टी से जुड़ेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी कई स्तरों पर चुनावी अभियान पहले ही शुरू कर चुकी है। पीडीए सम्मेलनों के जरिए विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाई गई है। कार्यकर्ता गांव-गांव और पंचायत स्तर तक जाकर सरकार की नीतियों और कथित विफलताओं को जनता के सामने रख रहे हैं।
सपा हिन्दुत्व की बात भी अब जोर शोर से कर रही है। फखरुल हसन चांद ने कहा कि आने वाले दिनों में केदारेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण कार्य पूरे होने के बाद वहां अखिलेश यादव का एक भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद उनके अयोध्या जाकर राम मंदिर में दर्शन करने की भी संभावना है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर दर्शन के बाद पार्टी प्रदेशभर में राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी को मुद्दा बनाएगी
और जनता के बीच जाकर यह बताएगी कि आस्था के नाम पर भाजपा ने
लोगों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने जिस
तरह पार्टी को नई दिशा दी है,
वह अपने आप में इतिहास है। विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के 37 सांसदों का जीतकर संसद पहुंचना पार्टी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन
रहा है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



