पंजाब में कांग्रेस की गृह कलह

रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने बताया है कि जहां सुमति तहं सम्पति नाना, जहां कुमति तहं विपति निदाना अर्थात् जहां सद्बुद्धि है, वहां हर प्रकार से समृद्धि रहती है और जहां मति भ्रष्ट हो गयी है, वहां विपत्ति को रोका नहीं जा सकता। राजनीति में भी यह सिद्धांत प्रासंगिक रहता है। पंजाब मंे भी अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। यहां पर कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है। सरकार भी बनी लेकिन केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने छीन ली। अब वहां भाजपा भी एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरी है। उधर, कांग्रेस में गृह कलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। राज्य मंे जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार हुआ करती थी, तब नवजोत सिद्धू उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। नतीजा यह हुआ कि कांगे्रस की सरकार ही नहीं गयी बल्कि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांगे्रस छोड़कर भाजपा के साथ चले गये हैं। अब पंजाब मंे प्रदेश कांग्रेस की बागडोर संभाल रहे राजा वडिंग के खिलाफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी मोर्चा खोले हैं। हालांकि पंजाब कांगेस प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी रिपोर्ट में राजा वडिंग को ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाये रखने की सिफारिश की है। जाहिर है कि चरण सिंह चन्नी के समर्थक खामोश नहीं बैठेंगे। इस प्रकार पंजाब कांग्रेस मंे विधानसभा चुनाव से पहले ही गृहकलह प्रारम्भ हो गयी है। चन्नी और रंधावा दिल्ली पहुंच गये। अंतिम फैसला राहुल गांधी लेंगे।
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक बघेल की रिपोर्ट में राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखे जाने की पैरवी की गई है और कहा गया है पंजाब के 29 में से 25 जिला अध्यक्ष और 7 में से 4 सांसद राजा के साथ हैं। दिल्ली में केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद बघेल ने पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन नहीं होने के संकेत देते हुए दुहराया। उन्होंने कहा ये गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है। ऐसा ही बयान बघेल ने चंडीगढ़ में भी दिया था। कांग्रेस नेतृत्व ने एक जुलाई को राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस का
अध्यक्ष बनाए रखने का एलान किया था। नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इस मुहिम में कई वरिष्ठ नेता भी चन्नी के साथ हैं।
विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की नई टीम के एलान के बाद भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में छह दिनों तक अलग-अलग नेताओं से मुलाकात की। आखिरी दिन बघेल ने चन्नी की अगुवाई में नाराज नेताओं से मुलाकात की थी। अब उन्होंने अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंप दी है। हालांकि जिस तरह पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का बड़ा तबका राजा वडिंग के खिलाफ है ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान विकल्पों पर विचार कर रहा है। राहुल गांधी ने 14 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से मुलाकात की थी। केसी वेणुगोपाल भी बैठक में मौजूद थे। पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच केसी वेणुगोपाल ने अगले दिन पंजाब में विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा से भी मुलाकात की।
पंजाब कांग्रेस में पिछले पांच दिनों में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला है। क्योंकि पंजाब में कांग्रेस की कलह निपटाने गए प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल अब चंडीगढ़ से दिल्ली लौट चुके हैं। इसके पहले बघेल ने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक चन्नी और उनके समर्थकों ने भूपेश बघेल को बता दिया है कि उन्हें किसी भी हालत में पंजाब कांग्रेस के प्रधान के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग मंजूर नहीं हैं। उधर, भूपेश बघेल का कहना था कि वो अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंपेंगे। वहीं चन्नी कैंप के नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा है कि उन्हें कॉम्प्रोमाइज्ड लीडर नहीं चाहिए उनका इशारा राजा वडिंग की तरफ है और उनका मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंजाब सरकार के खिलाफ उतने सख्त नहीं हैं।
पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से राजनीति बदल रही है उससे 2022 वाला सियासी घटनाक्रम फिर से ताजा हो गया है। पंजाब के महासचिव भूपेश बघेल की इस रिपोर्ट के अलावा कांग्रेस आलाकमान के पास एक और कमेटी की रिपोर्ट है जो अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव ने दी है। उसके पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पंजाब कांग्रेस के नेताओं से बैठक कर चुके हैं और सबको मिलजुल कर काम करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात पंजाब कांग्रेस के नेताओं को बता चुके हैं लेकिन उसके बाद भी इन नेताओं का झगड़ा खत्म नहीं हो रहा है।
़पंजाब कांग्रेस में बगावत पर राहुल गांधी खासे नाराज हैं। सूबे में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेताओं के विद्रोह ने हाईकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाईकमान ने रायपुर से विधानसभा सत्र बीच में छुड़वाकर पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल को दिल्ली तलब कर लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई। इस दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी, नेतृत्व विवाद और साल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर समीक्षा की गई। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। बघेल ने अपने पंजाब दौरे की रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थकों की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठाए गए सवालों पर चर्चा हुई। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बढ़ती खींचतान को गंभीर माना। राहुल और खरगे ने विधानसभा चुनाव से पहले इस पर खासी नाराजगी जाहिर की।
सूत्र बताते हैं कि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक दल के नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। हालांकि बैठक के बाद इस संदर्भ में अभी किसी फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इसके अलावा हाईकमान ने बैठक में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करने, संगठन को मजबूत करने और आम आदमी पार्टी के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने पर भी विमर्श हुआ।
पंजाब कांग्रेस में छिड़े विद्रोह को शांत करवाने और पार्टी को एकजुट करने की बड़ी जिम्मेदारी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल को सौंपी थी। इसके लिए बघेल 6 जुलाई को चंडीगढ़ पहुंचे और 11 जुलाई तक उन्होंने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी समेत करीबन सभी नाराज नेताओं से सामूहिक व वन-टू-वन चर्चा की। इसके बाद 13 जुलाई को बघेल ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी थी। इस मसले पर वरिष्ठ नेताओं की चर्चा के बाद अब किसी बड़े फैसले का इंतजार किया जा रहा है मगर फैसला लेने से पहले राहुल गांधी रूबरू होकर प्रभारी बघेल को सुनना व उनसे कुछ तथ्यों पर चर्चा करना चाहते हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



