भारतीय नाविकों की सुरक्षा

अमेरिका-ईरान की जंग ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को भी खतरे मंे डाल दिया है। इसलिए पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालात और होरमुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 14 जुलाई को सीफेयरर-फर्स्ट पहल की घोषणा करते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इस पहल का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की निगरानी, सुरक्षा और आपातकालीन सहायता को और मजबूत बनाना है।
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब होरमुज जलडमरूमध्य में दो व्यापारिक जहाजों- एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इन दोनों जहाजों पर कुल 46 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 30 भारतीय नाविक शामिल थे। हमलों में एक भारतीय नाविक की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। एमटी अल बहियाह पर एक भारतीय की जान गई और एक अन्य घायल हुआ, वहीं एमटी मोम्बासा पर नौ भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नागरिक व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नाविक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों और घायल भारतीय नागरिकों को हर संभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सोनोवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि फारस की खाड़ी, होरमुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में संचालित प्रत्येक भारतीय नाविक की वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक व्यापक डिजिटल ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक भारतीय नाविक और उसके जहाज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।
इस डैशबोर्ड में जहाज की वर्तमान स्थिति, स्वामित्व, माल का विवरण, चालक दल की स्थिति, सुरक्षा जोखिम का स्तर, यात्रा का निर्धारित मार्ग, अगला बंदरगाह, भोजन, ईंधन, दवाइयों तथा संचार सुविधाओं की उपलब्धता जैसी जानकारियां शामिल होंगी। इससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में सरकार तुरंत आवश्यक कार्रवाई कर सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रभावित भारतीय नाविक के लिए एक समर्पित संपर्क अधिकारी (लायजन ऑफिसर) नियुक्त किया जाए। यह अधिकारी संबंधित नाविक और उसके परिवार के बीच संपर्क बनाए रखेगा, आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा तथा किसी भी संकट की स्थिति में तत्काल सहायता सुनिश्चित करेगा।
इस पूरे अभियान का संचालन पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय करेगा। मंत्रालय 24 घंटे निगरानी रखेगा और विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, नौवहन महानिदेशालय , ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावासों तथा अन्य समुद्री एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। इस संयुक्त प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकटग्रस्त क्षेत्र में मौजूद प्रत्येक भारतीय नागरिक तक समय पर सहायता पहुंच सके।
सोनोवाल ने जहाज मालिकों, पोत प्रबंधन कंपनियों तथा नाविकों की भर्ती करने वाली लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी भारतीय नाविक पर्याप्त सुरक्षा जानकारी, जोखिम का आकलन और आवश्यक सुरक्षा उपायों के बिना संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित एजेंसियों को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि सुरक्षा संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन किया गया है।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने निर्देश दिया है कि होरमुज जलडमरूमध्य और आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज को यात्रा शुरू करने से पहले नए सिरे से सुरक्षा जोखिम का मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा। यदि किसी मार्ग पर खतरे का स्तर अधिक पाया जाता है, तो वैकल्पिक व्यवस्था या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।
होरमुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत सहित अनेक देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में यहां बढ़ता सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में से एक है। हजारों भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हैं और वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा केवल मानवीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई श्सीफेयरर-फर्स्टश् पहल समय की आवश्यकता है। रियल-टाइम निगरानी, समर्पित संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति, डिजिटल डैशबोर्ड और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी व्यवस्थाएं संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार खतरा बना हुआ है। ऐसे समय में भारत का यह कदम न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि वैश्विक समुद्री व्यापार में योगदान देने वाले भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आने वाले समय में इस पहल के माध्यम से भारतीय नाविकों को अधिक सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने और समुद्री संकटों से प्रभावी ढंग से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



