धामी ने दिया चुनाव जीतने का मंत्र

अगले वर्ष 2027 में पांच राज्यों के साथ उत्तराखण्ड विधानसभा के भी चुनाव होने हैं। यहां अब तक भाजपा और कांग्रेस में ही बीच मुख्य मुकाबला होता रहा है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी (आप) ने भी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इससे मुकाबला त्रिकोणात्मक होने की संभावना बन रही है। सत्तारूढ़ भाजपा अभी पुष्कर सिंह धामी को ही मुख्य चेहरा बनाए हुए है जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सीएम फेस के बारे मंे कोई संकेत नहीं दिया है। उत्तराखण्ड मंे इस बार एक बड़ा मुद्दा बड़ी संख्या में मतदाताओं को चुनाव से बाहर करना भी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राज्य के करीब 8 लाख मतदाता चुनाव से बाहर हो सकते हैं। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को अपडेट करते हुए डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम सूची से हटा रहा है। इसीलिए भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी में बूथ और मतदाता सूची पर अपना विशेष फोकस कर रखा है। गत दिनों संगठनात्मक बैठक मंे राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को एक-एक बूथ और एक-एक वोट पर ध्यान केन्द्रित करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी बूथ और वोट के महत्व को समझा रहे हैं। उन्हांेने मंत्र दिया जहां कम, वहां हम। अर्थात् जिन सीटों पर पिछली बार पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा, वहां संगठन को अधिक सक्रिय रहना होगा।
इस बार उत्तराखंड की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम संदेह के घेरे में आ चुके हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने इन सभी को फिलहाल ‘अनकलेटेड’ श्रेणी में रखा है। वहीं सत्यापन के दौरान सामने आया है कि इनमें से 1.23 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 4.77 लाख लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके हैं। ऐसे में आयोग वोटर लिस्ट को अपडेट करते हुए अपात्र और डुप्लीकेट नाम हटाने की प्रक्रिया में जुटा है। उत्तराखंड में वर्तमान में करीब 80 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। एसआईआर के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है तो वहीं इस दौरान जिन मतदाताओं की जानकारी सत्यापित नहीं हो पाई, उन्हें अस्थायी रूप से “अनकलेक्टेड” श्रेणी में रखा गया है, हालांकि सत्यापन पूरा होने के बाद योग्य मतदाताओं के नाम बरकरार रहेंगे, जबकि अपात्र पाए जाने वालों के नाम हटाए जा सकते हैं। आयोग का मानना है कि इनमें ऐसे मतदाता भी हो सकते हैं, जिनके नाम एक से अधिक स्थानों की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर बीजेपी ने बूथ और मतदाता सूची पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। देहरादून के हरिद्वार रोड स्थित कुआंवाला में आयोजित प्रदेश बीजेपी की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से एक-एक बूथ और एक-एक वोट पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। बैठक में सीएम पुष्कर सिंह धामी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। तरुण चुग ने प्रदेश में चल रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तराखंड में बीजेपी के पक्ष में सकारात्मक वातावरण है। प्रदेश की जनता पार्टी के साथ खड़ी है, लेकिन कार्यकर्ताओं को प्रत्येक समर्थक मतदाता का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित कराने और उसे मतदान केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी को आगामी चुनाव में अब तक की सर्वाधिक विधानसभा सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है। कार्यकर्ताओं के परिश्रम और केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों के आधार पर उत्तराखंड में एक बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस की सरकार बनने का पुराना मिथक टूट चुका है। अब लक्ष्य उत्तराखंड को बीजेपी का अभेद्य राजनीतिक किला बनाने का है।
बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची के शुद्धिकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। तरुण चुग ने कार्यकर्ताओं से संवैधानिक प्रक्रिया में सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी करने को कहा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यकर्ताओं से ‘जहां कम, वहां हम’ की नीति पर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन बूथों और क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, वहां संगठन को अधिक सक्रियता और मेहनत के साथ काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व की अपेक्षाओं के अनुरूप उत्तराखंड में बीजेपी को बड़ी विजय दिलाने के लिए चुनाव प्रबंधन की कुशलता को और प्रभावी बनाना होगा। इसके लिए सही और त्रुटिहीन मतदाता सूची पहली महत्वपूर्ण सीढ़ी है। उन्होंने पार्टी के बीएलए-2 कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर पात्र नागरिकों को जागरूक करने और तय प्रक्रिया के तहत उनके नाम मतदाता सूची में जुड़वाने में सहयोग करने को कहा। मुख्यमंत्री ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पूरी क्षमता और अनुशासन के साथ निर्वहन करने पर भी जोर दिया।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने का स्पष्ट अर्थ है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न कटे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में बना न रहे।
2022 में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीतकर सरकार बनाई। यह पार्टी के लिए ऐतिहासिक था, लेकिन 2017 की तुलना में 10 सीटों का नुकसान हुआ। कांग्रेस का वोट शेयर 33.5 फीसद से बढ़कर 37.9 फीसद हो गया। सबसे बड़ा झटका खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लगा, जो खटीमा से 6,579 वोटों से हार गए थे। बाद में वे चंपावत उपचुनाव से जीते, लेकिन खटीमा का घाव अब भी ताजा है। खटीमा सीट भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है। 2022 में कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी ने 52 फीसद वोट पाकर धामी को हराया। तराई क्षेत्र होने के कारण यहां सिख और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार भी कांग्रेस इस सीट पर मजबूत दावा कर रही है। इसी प्रकार हरिद्वार ग्रामीण सीट पर कांग्रेस की अनुपमा रावत (हरीश रावत की बेटी) ने भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद को 4,472 वोटों से हराया था। 2017 में हरीश रावत खुद यहां हारे थे, लेकिन 2022 में उनकी बेटी ने पार्टी को मजबूत वापसी दिलाई। धार्मिक नगरी के निकट होने के बावजूद भाजपा यहां कमजोर नजर आती है।
अल्मोड़ा जिले की द्वाराहाट सीट पर कांग्रेस के मदन बिष्ट ने भाजपा के अनिल शाही को मात्र 182 वोटों से हराया। इतने कम अंतर वाली सीट पर 2027 में दोनों पार्टियां पूरी ताकत झोंकेंगी। पहाड़ी मुद्दों- पलायन, रोजगार और स्थानीय विकास पर यहां मुकाबला तय होगा। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



