फिर भड़के किसान

पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध अब आंदोलन का रूप लेने लगा है। गत 21 जुलाई को दिल्ली मंे किसान महापंचायत बुलाई गयी थी। उसी दिन काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जोरदार प्रदर्शन हो रहा था। इन तीन राज्यों के किसानों का विरोध बताता है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (आप) विरोध कर रही हैं। हरियाणा मंे भाजपा की सरकार है तो हिमाचल प्रदेश मंे कांग्रेस सत्तारूढ़ है। पंजाब मंे आम आदमी पार्टी सत्तासीन है। दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत की घोषणा की गयी थी। किसानों की महापंचायत को देखते हुए हरियाणा सरकार ने शंभू बार्डर सील करने के साथ ही दिल्ली की सीमाओं से जुड़े रास्तों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी थी। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के चढूनी गुट के नेता गुरुनाम सिंह चढूनी को 20 जुलाई को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। विशेष रूप से किसानों को कृषि एवं डेयरी उद्योगों में अमेरिका का दखल पसंद नहीं है किसानो ंने चेतावनी
दी है कि अगर सब्सिडी वाले
अमेरिकी कृषि एवं डेयरी उत्पादों के लिए भारत का बाजार खोल दिया गया तो भारत के छोटे और सीमांत किसान प्रतिस्पद्र्धा नहीं कर पाएंगे। हालंाकि किसानों को अब वैश्विक प्रतिस्पद्र्धा के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि अब व्यपार का दायरा सीमित नहीं रह
गया है।
भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते के विरोध में गत 21 जुलाई को दिल्ली जा रहे पंजाब के किसानों को रोके जाने के बाद शंभू बॉर्डर पर फिर से बैरिकेड लगा दिए गए हैं। शंभू बॉर्डर एक बार फिर किसानों के विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना। हरियाणा पुलिस ने पंजाब से दिल्ली जा रहे सैकड़ों किसानों को रोक दिया। ये किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के खिलाफ किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे। वहीं गाजियाबाद बॉर्डर पर भी दिल्ली जा रहे किसान संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका गया. उनकी पुलिस से झड़प भी हुई। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर बैरिकेडिंग से फरवरी 2024 के दिल्ली चलो-2 आंदोलन की यादें ताजा हो गईं। उस समय किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए बॉर्डर को कंक्रीट ब्लॉक, लोहे की कीलों और कई परतों वाले बैरिकेड लगाकर एक किले में बदल दिया गया था। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर एक साल से ज्यादा समय तक शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे रहे थे। सोमवार को आगे बढ़ने से रोके जाने पर किसानों ने शंभू बॉर्डर को ही विरोध प्रदर्शन की जगह बना लिया। उन्होंने हरियाणा और पंजाब सरकारों पर दिल्ली में इकट्ठा होने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने का आरोप लगाया। नेता तेजवीर सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा पुलिस ने पंजाब की सीमा के अंदर बैरिकेड लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने इस कदम का विरोध करने के बजाय मूक दर्शक की भूमिका निभाई जहां पंजाब से आ रहे किसानों के काफिले को रोक दिया गया वहीं हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र और आस-पास के जिलों के किसान दिल्ली की ओर अपनी यात्रा जारी रखे हुए थे।
उधर, देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले बुलाई गई महापंचायत में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की है. किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर), आजाद किसान मोर्चा और एकता संघर्ष के जत्थे पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से निकले थे, लेकिन उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक दिया गया।
पंधेर ने कहा कि फरवरी 2026 में जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में दोनों देशों ने 2026 की शरद ऋतु तक कई क्षेत्रों वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत करने का वादा किया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रस्तावित समझौता आम व्यापार समझौतों से कहीं बढ़कर है। इससे कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, निवेश, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र पर बातचीत हो सकती है। किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका की पिछली व्यापार रिपोर्टों में लगातार भारत के कृषि और डेयरी बाजारों तक बेहतर पहुंच की मांग की गई। इसके लिए सोयाबीन, मक्का, कपास, एथेनॉल, सेब, बादाम, डेयरी उत्पादों, पोल्ट्री और मछली पालन जैसे उत्पादों पर कम टैरिफ और कम पाबंदियों की बात कही गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए भारत का बाजार खोल दिया गया, तो लाखों छोटे और सीमांत भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बातचीत में पारदर्शिता की कमी पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि प्रस्तावित समझौते की मुख्य बातें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। किसान संगठनों ने कहा कि अकेले भारत का डेयरी क्षेत्र लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों की आजीविका का साधन है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका बुरा असर पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जिससे डेयरी उत्पादक, छोटे व्यापारी, कृषि-आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण करने वाले और सूक्ष्म उद्यम प्रभावित होंगे।
फरवरी 2026 में भारत एवं अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता संपन्न हुआ, जिसके अंतर्गत अमेरिका ने भारत से आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस कदम से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही रूसी तेल के व्यापार के लिए भारत से आयात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया है। साथी ही, 25 प्रतिशत के रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इस प्रकार भारत से अमेरिका को निर्यात पर प्रभावी शुल्क 18 प्रतिशत हो गया है। इसके संबंध में भारत एवं अमेरिका ने 7 फरवरी, 2026 एक संयुक्त बयान जारी किया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2026 एक रणनीतिक आर्थिक पुनर्संरचना है जिसकी घोषणा 2 फरवरी, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी। यह द्विपक्षीय समझौता 2025 के अंत में उभरे व्यापार संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय निर्यातकों
को अमेरिकी बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मिली है जबकि अमेरिका को ऊर्जा एवं कृषि क्षेत्र में
बड़े पैमाने पर दीर्घकालिक खरीद सुनिश्चित हुई है। किसान इसीलिए विरोध कर रहे हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



