
काॅकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में दिल्ली के जंतर-मंतर में आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक अपने बीस दिनों के उपवास के बाद अपने इस बयान कि ‘‘मैं 20 जुलाई तक निश्चित जीवित रहूंगा और अपने समर्थकों के साथ मिलकर संसद तक शान्तिपूर्ण मार्च करूंगा।’’ से अधिक चर्चा में आ गए हैं
यहां अब जरूरी हो जाता है कि हम सोनम वांगचुक के जीवन के बारे में भी कुछ जानें।
सोनम वांगचुक का जन्म और शिक्षा-वांगचुक का जन्म 1 सितम्बर 1966 को इलेक्टोक्यो के अलची गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा लद्दाख में हुई। उनके पिता का नाम सोनम वांग्याल था। वे वर्ष 1979 से जम्मू-कश्मीर सरकार
में कैबिनेट मंत्री थे। उन्होंने भी लद्दाख के लिए काम किया।
उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से
तकनीकी शिक्षा (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) ग्रहण की। वे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किये गये अपने प्रयासों के कारण प्रसिद्ध हुए। वांगचुक 1988 में स्थापित ‘‘स्टूडेन्टस एजूकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट आॅफ लद्दाख’’ के संस्थापक निदेशक भी हैं यह संस्थान बिना किसी जीवाश्म ईंधन के पूरी तरह सौर ऊर्जा ये चलता है।
. लद्दाख में क्या किया-लद्दाख की शिक्षा प्रणाली को सही नहीं मानते और उनका मानना है कि यह लद्दाख पर थोपी गई शिक्षा प्रणाली है जिसमें आमूल चूल परिवर्तन के साथ उनके सुधार की भी आवश्यकता है। उन्होंने 1994 में सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से ‘आॅपरेशन न्यू होप’ शुरू किया। सोनम ने बर्फ स्तूप तकनीक का आविष्कार किया जो कृत्रिम ग्लेशियरों का निर्माण करता है। इस ‘आइस स्तूप’ तकनीक विकसित करने के लिए उन्हें देश-विदेश में पहचान मिली। यह उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
3. इंजीनियर ही नहीं समाज सुधारक भी-एक इंजीनियर होने के साथ-साथ वे शिक्षा एवं समाज-सुधारक, इनोवेटर और पर्यावरणविद् भी हैं। 59 वर्षीय सोनम वांगचुक लद्दाख क्षेत्र के पर्यावरणीय हितों के संरक्षण के लिए एक मुखर आवाज माने जाते हैं। लद्दाख को अधिक संवैधानिक संरक्षण दिलाने की मांग को लेकर भी वे अनेक जन-आंदोलन कर चुके हैं। भारतीय सेना के लिए उन्होंने अत्यधिक ऊँचाई और ठंडे इलाकों में रहने के लिए ख़ास और ऊर्जा से संचालित होने वाले टेंट भी बनाएं।
4. पुरस्कार और सम्मान-शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में अपने असाधारण योगदान के लिए उन्हें सन् 2018 में प्रतिष्ठित ‘‘रैमन मैग्सेसे पुरस्कार’’ से सम्मानित किया गया।
5. सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन-वर्तमान में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक इससे पहले भी कई बार अनशन कर चुके हैं। उनके अधिकांश आंदोलन शिक्षा और पर्यावरण पर केन्द्रित रहे हैं। वे आज भी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
6. वांगचुक का धर्म-सोनम वांगचुक लद्दाखी बौद्ध धर्म को ही मानते हैं। यहां के मूल निवासियों की भांति उनका लगाव भी बौद्ध धर्म और उसकी मान्यताओं से है। वे धर्म और आधुनिक जीवन शैली को जोड़ने में विश्वास रखते हैं और कई बार इस सम्बन्ध में अपने विचार भी व्यक्त कर चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान को भी वे धर्म का ही एक रूप मानने पर जोर देते रहे हैं।
7. वांगचुक पर एनएसए लगा भी और हटा भी-सोनम वांगचुक ने लेह एपेक्स बाॅडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के आंदोलन का समर्थन किया। ये संगठन लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और अन्य संवैधानिक गारंटियों की मांग कर रहे थे। इस दौरान भी वे अनशन पर थे। केन्द्र सरकार से बात होने के बावजूद नतीजा कुछ नहीं निकला। बाद में यह आंदोलन हिंसक हो गया। इस हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराते हुए एनएसए लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया। वे जेल भी गये। मार्च 2025 में उन पर लगाया गया एनएसए हटा दिया गया।
8. वांगचुक की पत्नी-गीताजंलि जे. अंगमो सोनम वांगचुक की पत्नी हैं। वे भी सामाजिक उद्यमी, शिक्षाविद् और हिमालयन इंस्टीट्यूट आॅफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख की सह-संस्थापक एवं निदेशक हैं। वे लद्दाख में आॅप्शनल और इनोवेशन बेस्ड एजूकेशन को बढ़ावा देने के लिए लम्बे समय से कार्य कर रही हैं।
9. फुनसुख वांगडू ही सोनम वांगचुक-सुपरहिट फिल्म 3 ‘इडियट्स’ के लोकप्रिय किरदार ‘फुनसुख वांगडू’ की वास्तविक प्रेरणा भी सोनम ही माने जाते हैं फिल्म में यह किरदार आमिर खान ने निभाया है जिसके बाद वांगचुक को देश-विदेश में पहचान मिली।
(कुमकुम शर्मा-हिफी फीचर)



