अभिनय व गायन दोनों में सुरैया ने कमाया नाम

सुरैया भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे लोकप्रिय और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों और गायिकाओं में से एक थीं। 1940 के दशक से 1950 के दशक के मध्य तक वे हिंदी फिल्म उद्योग की सबसे अधिक कमाई करने वाली स्टार थीं। उन्होंने अपने पूरे करियर में 70 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और 338 गाने गाए। सुरैया का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। उनके मामा जहूर हिंदी फिल्मों में एक प्रसिद्ध खलनायक थे। 12 वर्ष की आयु में, जब वह अपने मामा के साथ मोहन स्टूडियो में ताजमहल फिल्म की शूटिंग देखने गईं, तो निर्देशक नानूभाई वकील की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने सुरैया को मुमताज महल के बचपन का किरदार दे दिया। गायिकी की दुनिया में उनका प्रवेश भी एक इत्तेफाक था। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर बच्चों के कार्यक्रमों में गाना शुरू किया, जहाँ संगीतकार नौशाद ने उनकी आवाज को पहचाना।
इसके बाद उन्होंने फिल्म शारदा (1942) से बतौर पार्श्व गायिका (प्लेबैक सिंगर) अपना सफर शुरू कियासुरैया ने प्यार, अनमोल घड़ी, दस्तान, बड़ी बहन जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अभिनय किया। उनकी सबसे बेहतरीन फिल्मों में मिर्जा गालिब (1954) को गिना जाता है, जिसमें उनके अभिनय और गायिकी को राष्ट्रव्यापी पहचान मिली। उनकी इस फिल्म को देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भावुक हो गए थे और उन्होंने सुरैया की जमकर तारीफ की थी। अपनी अद्भुत गायिकी और खूबसूरती के कारण उन्हें उपमहाद्वीप की मलिका-ए-तरन्नुम भी कहा गया
सुरैया और देव आनंद की प्रेम कहानी भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित और दुखद किस्सों में से एक है। दोनों ने जीत, शायर, अफसर और दो सितारे जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया। सुरैया देव आनंद का पहला प्यार थीं लेकिन सुरैया के परिवार, खासकर उनकी नानी, इस रिश्ते के खिलाफ थीं। अपने परिवार की रूढ़िवादी परंपराओं और विरोध के कारण, सुरैया ने देव आनंद से शादी नहीं की और आजीवन अविवाहित रहीं। (हिफी)



