सुरक्षा परिषद में भारत ने पाक से कहा, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को साफ कर दिया है कि जब तक इस्लामाबाद में बैठी नापाक सरकार सीमा-पार आतंकवाद को अपनी नेशनल पॉलिसी के तौर पर बढ़ावा देती रहेगी, तब तक सिंधु जल संधि रुकी रहेगी। खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 22 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान से कहा कि सिंधु जल संधि पर हमारा रुख साफ और एक जैसा रहा है। जब सीमा-पार आतंकवाद का इस्तेमाल सरकारी नीति के तौर पर लगातार किया जा रहा हो, तो आपसी भरोसे और अच्छी भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। साथ ही उन्होंने दोहराया कि पूरा जम्मू- कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा।
भारत के प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस्लामाबाद को यह कड़ी बात तब याद दिलाई जब पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने प्राकृतिक संसाधन प्रशासन शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव पर हुई उच्च-स्तरीय खुली बहस में सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का पूर्वी पड़ोसी एकतरफा और गैर-कानूनी तरीके से सिंधु जल संधि को स्थगित कर रहा है और यह सब जम्मू-कश्मीर विवाद की पृष्ठभूमि में हो रहा है। पी. हरीश ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है, है और रहेगा। उन्होंने कहा, यह वह संवैधानिक और कानूनी सच्चाई है जिसे पाकिस्तान जान-बूझकर नजरअंदाज करता है। जम्मू-कश्मीर से जुड़ा एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के संप्रभु क्षेत्र पर खुला आक्रमण और गैर-कानूनी कब्जा है।
सुरक्षा परिषद ने 21 अप्रैल 1948 को पारित अपने प्रस्ताव में मांग की थी कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना और नागरिकों को हटाए, वहां घुसपैठ रोके और राज्य में लड़ रहे लोगों की मदद न करे। पाकिस्तान अपने अंदर नहीं देखता। वह खुद अपने कब्जे वाले इलाके में कश्मीरियों के विरोध-प्रदर्शनों को बेरहमी से दबा रहा है।



