आज भी याद आते आनंद के संवाद व गाने

आनंद फिल्म के गाने जिंदगी कैसी है पहेली की, जिसके लिरिक्स योगेश ने लिखे थे, जो कुछ इस प्रकार थे।
जिंदगी कैसी है पहेली, हाय
कभी तो हंसाए, कभी ये रुलाये
जिंदगी कैसी है पहेली, हाय
कभी तो हंसाए, कभी ये रुलाये
साढ़े 3 सेकंड के गाने जिंदगी कैसी है पहेली असल में फिल्म के टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए सोचा गया था। लेकिन राजेश खन्ना ने जब गाना सुना तो उन्हें लगा कि इतने अच्छे गाने को टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करना बेकार होगा। इसलिए उन्होंने डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी को गाने के लिए कोई सिचुएशन बनाने का सुझाव दिया। उन दिनों टाइटल के लिए बैकग्राउंड में बजने वाले गाने रेडियो पर कम ही बजाए जाते थे। इसलिए राजेश खन्ना ने इसे सीन में अपनी अदायगी से फिल्माया। वहीं मन्ना डे की आवाज को अपनी आवाज बना दिया। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन ने पहली बार इस फिल्म में साथ काम किया था। वहीं फिल्म के गाने कहीं दूर जब दिन ढल जाए, मैं तेरे लिए, जिंदगी कैसी है पहेली और ना जिया लगे ना आज भी खूब सुनने को मिलते हैं जबकि राजेश खन्ना के कल्ट गानों में जिंदगी कैसी है पहेली शामिल है।
इसके अलावा बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी शानदार होती है। जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं। मौत तो आनी ही है। लेकिन उससे पहले जिंदगी जी लो। जिंदगी में एक बार जो अच्छा वक्त आता है, वो बार-बार नहीं आता। मैं तो मर भी जाऊंगा तो भी हंसते हुए मरूंगा। क्योंकि मैंने जिंदगी हंसते हुए जिया है। क्या फर्क पड़ता है कि मौत कितनी दूर है। फर्क तो इस बात का पड़ता ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म आनंद के डायलॉग मौत एक पल है बाबूमोशाय, बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं। जब तक जिंदा हूं तक तक मरा नहीं ने फैंस के दिलों में छाप छोड़ी लेकिन इस मूवी के डायलॉग के अलावा गानों की भी खूब चर्चा हुई। (हिफी)



