लेखक की कलम

बांकीपुर में प्रतिष्ठा का बांकापन

बिहार में भाजपा की पहली बार सरकार बनी है। वहां सरकार में साझेदारी तो रही लेकिन भाजपा का मुख्यमंत्री पहली बार ही बन पाया है। नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी और चिराग पासवान सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं। बिहार से ही नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। वह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब यह सीट रिक्त है और तय समय में उप चुनाव होना है। आगामी 30 जुलाई को मतदान होना है। विधानसभा सीट पर उप चुनाव यूं तो सामान्य घटना है और आमतौर पर सत्ताधारी दल ही उस पर विजयी भी हो जाते हैं

लेकिन इस बार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। यह प्रतिष्ठा का सवाल सबसे पहले तो भाजपा के लिए है क्योंकि उसी के विधायक रहे नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद उप चुनाव हो रहा है। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार की पार्टी ने भी 85 विधायक जुटा लिये थे। हालांकि भाजपा के विधायक (89) ज्यादा थे फिर भी नीतीश कुमार ने ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्हें बीच सफर में राज्यसभा भेजा गया और भाजपा के सम्राट चैधरी मुख्यमंत्री बने। इस तालमेल की भी इस उपचुनाव में परीक्षा होनी है। उधर, चुनावी रणनीतिकार से सीधे राजनीति में उतरे प्रशांत किशोर को विधानसभा चुनाव में कोई सफलता नहीं मिली लेकिन बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर भी मैदान में उतर आये हैं। इस प्रकार बांकीपुर में प्रतिष्ठा की जंग देखने को मिलेगी।

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव के लिए आगामी 30 जुलाई को वोटिंग होनी है। ये सीट नितिन नबीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई थी। बीजेपी का गढ़ रही इस सीट पर हो रहे उप चुनाव में प्रशांत किशोर की एंट्री ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें पार्टी को 3.4 फीसदी वोट मिले थे।

रण व नीति दोनों में फेल प्रशांत
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस सीट पर रेखा गुप्ता को, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया है। पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों में से एक, बांकीपुर महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। पटना के कदमकुआं, राजेन्द्र नगर, गर्दनीबाग, सचिवालय, बोरिंग रोड, मीठापुर, गांधी मैदान

सहित कई महत्वपूर्ण मोहल्ले इस विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। कायस्थ बहुल मानी जाने वाली इस सीट में कुल मतदाता 3,79,402 हैं। साल 1995 से इस सीट पर बीजेपी जीतती रही है। उस वक्त ये सीट पटना पश्चिम कहलाती थी। साल 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट बांकीपुर कही जाने लगी। 1995 में यहां से नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा ने जीत हासिल की थी। नवीन किशोर पीरमुहानी इलाके में ही किराए के घर पर रहते थे। बहुत सौम्य, सहज और सामाजिक रिश्तों को महत्व देने वाले थे। विधायक बनने के बाद भी वो अपनी प्रिया स्कूटर से घूमते थे। उनकी सहजता का गुण नितिन नबीन में भी दिखता है जो राजनीति में अपने सहयोगियों और विरोधियों के साथ मधुर रिश्ता रखते हैं।

साल 2005 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नवीन किशोर सिन्हा का निधन हो गया था, जिसके बाद नितिन नबीन ने अपनी राजनीतिक पारी बांकीपुर से शुरू की। अप्रैल 2006 में हुए चुनाव में नितिन नबीन को बांकीपुर में हुई कुल वोटिंग का 80 फीसदी से ज्यादा वोट मिला था। साल 2006 से 2025 तक नितिन नबीन ही इस सीट से जीतते रहे। साल 2025 में उनको 63 फीसदी वोट मिले थे और उन्होंने आरजेडी की रेखा गुप्ता को 51 हजार से ज्यादा वोट से शिकस्त दी थी। पटना पश्चिम (अब बांकीपुर) से 1962 में कृष्ण वल्लभ सहाय और 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा जीते थे। ये दोनों ही पटना पश्चिम से विधायक बनने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने। बांकीपुर शहरी सीट है। इस सीट से पांच बार विधायक रहे

नितिन नबीन, बिहार सरकार में पथ निर्माण और नगर विकास मंत्री रहे, इस विधानसभा क्षेत्र में शत्रुघ्न सिन्हा, शेखर सुमन, सुशील कुमार मोदी, शारदा सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूड़ी, सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के निजी आवास हैं। बीजेपी ने पहले अपना उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा को बनाया था। लगभग 26 साल से पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे अभिषेक बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय थे। नितिन नबीन के करीबी अभिषेक भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में सक्रिय रहे हैं और मंडल अध्यक्ष सहित कई पदों पर रहे हैं।

उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया है, जिसके बाद बीजेपी ने बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। नीरज कुमार सिन्हा को जब बांकीपुर से प्रत्याशी बनाए जाने की सूचना मिली तब वो बूथ के लिए पर्ची बना रहे थे।
जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर कह रहे हैं, बांकीपुर का चुनाव किसी एक विधानसभा क्षेत्र का चुनाव नहीं है, बल्कि ये सीएम सम्राट चैधरी के तीन महीने के कार्यकाल पर

जनमत है। बांकीपुर विधानसभा में डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चला रहे प्रशांत किशोर क्या बीजेपी का ये किला भेद पाएंगे?
ये कायस्थ बहुल सीट है जिसके वोटर जनसंघ के जमाने से बहुत कमिटेड वोटर हैं। प्रशांत राष्ट्रीय नेता हो सकते हैं लेकिन बीजेपी ने उनके खिलाफ एक बूथ लेवल के कार्यकर्ता को उतारा है। दूसरा ये कि प्रशांत किशोर के लिए ये क्षेत्र नया है। यहां के वोटर उनके नाम से परिचित हैं लेकिन बीजेपी के लोग गली-गली से परिचित हैं, जो उनके लिए जीत की कुंजी साबित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बांकीपुर सीट से तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है। वीणा मानवी सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हालांकि, बांकीपुर में लड़ाई फिलहाल त्रिकोणीय है। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र, उन क्षेत्रों में से एक है जहां सबसे कम मतदान होता है।

साल 2020 में यहां 37 फीसदी और साल 2025 में यहां मात्र 41 फीसदी वोटिंग हुई थी। जन सुराज के नायक प्रशांत किशोर का चुनावी मुद्दा कहीं बैक फायर तो नहीं कर रहा है? प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की जंग जीतने के लिए जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, बीजेपी के रणनीतिकार अब उल्टा प्रशांत किशोर के विरुद्ध ही इस्तेमाल करने लगे हैं। हो ये रहा है कि जन सुराज जिन मुद्दों का पहाड़ खड़ा कर चुनावी ट्रेंड बदलना चाह रहे हैं, उसकी विस्तृत व्याख्या कर उन मुद्दों की धार को कुंद करने में बीजेपी के नेता जुट गए हैं। हालांकि प्रशांत किशोर चुनावी जीत से बीजेपी नेतृत्व को ये क्लियर संदेश देना चाहते हैं कि सम्राट चैधरी का नेतृत्व बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार्य नहीं है। उनकी इस मुहिम को बीजेपी को प्रशांत किशोर को पिछड़ों की राजनीति के विरुद्ध राजनीति करने वाला बताने में जुटी है।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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