लेखक की कलम

तिरंगा यात्रा से देशभक्ति का माहौल

इस सच्चाई से हम मुंह नहीं मोड़ सकते कि आज हमारे अंदर देश भक्ति की वो भावना नहीं है जो होनी चाहिए। ऐसा क्यों है, इस पर गंभीरता से विचार भी नहीं किया जाता। हर कोई एक-दूसरे पर इसका दायित्व थोप देता है। यह भावना कोई कानून बनाकर नहीं पैदा की जा सकती लेकिन इसके लिए प्रयास तो करना ही पड़ेगा। घर-परिवार, स्कूल-कालेज, जनसभा और मीडिया के माध्यम से यह प्रयास होना चाहिए। संस्कारपरक शिक्षा इस मामले मंे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है लेकिन वहां राजनीति होने लगती है। अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 को जब आजादी मिली थी, उस समय की खुशी का वर्णन शब्दों से नहीं किया जा सकता। यह देश प्रेम की भावना लगभग डेढ़ दशक तक तो बनी रही क्योंकि 1962 मंे जब चीन ने भारत के साथ विश्वासघात करते हुए हमला किया था, तब हमने गांव की महिलाओं को देश के सैनिकों के लिए जेवर दान करते हुए देखा था। हालंाकि उस समय भी स्वार्थी तत्व थे जो अनाज और अन्य वस्तुओं की जमाखोरी कर महंगाई बढ़ा रहे थे। इसलिए शत-प्रतिशत सफलता की उम्मीद इंसानों से तो नहीं की जा सकती। अधिक से अधिक लोगों मंे देशभक्ति का विचार पैदा किया जा सके तो स्वतंत्रता दिवस मनाने का उद्देश्य सफल होगा। आगामी 15 अगस्त 2026 को हम 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। उससे पूर्व उत्तर प्रदेश मंे भाजपा देशभक्ति का माहौल बनाने का प्रयास करेगी। इसका दायित्व पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चैधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को सौंपा गया है। दोनों कर्मठ नेता प्रदेश मंे तिरंगा यात्राएं निकालकर देशभक्ति का माहौल बनाएंगे। हमारे देश की महान विभूतियों के आदर्श से भी युवा पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। इन महान लोगों में संत रविदास का नाम भी शामिल है। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने गत 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा से वाराणसी में संत रविदास का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के सभी जिलों मंे कलश यात्राएं निकाले जाने का कार्यक्रम चलाया।
राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने का प्रयास निरंतर होना चाहिए। उततर प्रदेश अभियान समिति की कमान प्रदेश उपाध्यक्ष बृज बहादुर भारद्वाज को दी गई है, जबकि उपाध्यक्ष नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, प्रदेश मंत्री अनिल यादव एवं रजनी पांडे को अभियान सह-संयोजक बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चैधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा खींचते हुए क्षेत्र टोली, जिला टोली एवं मंडल टोली बनाने के लिए कहा है। एक अगस्त को विश्वश्वैरया हाल में प्रदेश कार्यशाला होगी, जहां प्रदेश, क्षेत्र एवं जिलों की इकाइयां होंगी, साथ ही सभी मोर्चे आमंत्रित किए गए हैं। चार से पांच अगस्त के बीच जिला योजना बैठक होगी, जिसमें जिला प्रभारी, जिलाध्यक्ष, विधायक, एमएलसी समेत कई इकाइयों के पदाधिकारी रहेंगे। छह अगस्त को मंडलों की बैठक होगी। हर मंडल में 10 से 12 अगस्त के बीच तिरंगा यात्रा आयोजित होगी, जिसमें युवा मोर्चा एवं महिला मोर्चा की मुख्य भूमिका होगी। इसके बाद 12 से 14 अगस्त तक स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्मारकों एवं आंदोलन से जुड़े स्थलों पर स्वच्छता अभियान चलेगा। इस बीच 13 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों पर तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी और 13 से 15 तक सभी घरों पर तिरंगा फहराएंगे। भाजपा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाते हुए सभी जिलों में मौन जुलूस निकालेगी। इस दौरान संगोष्ठियों के लिए वक्ताओं के नाम मुख्यालय से भेजे जाएंगे। स्वतंत्रता सेनानियों एवं राष्ट्र निर्माताओं के योगदान का स्मरण किया जाएगा।
भाजपा उत्तर प्रदेश मंे संत रविदास की 650वीं जयंती पर उनके संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाना चाहती हैं। काशी स्घ्थित संत रविदास की जन्म स्थली प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के नेतृत्व मंे कलश यात्रा निकालकर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक संत रविदास के संदेश के साथ पहुंचाई गयी। संत रैदास 15वीं-16वीं सदी के महान भक्तिकालीन कवि, समाज सुधारक और संत थे। उनका जन्म काशी में सन् 1398 ईस्वी (माघ पूर्णिमा) को हुआ था। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत और कबीर के समकालीन माने जाते हैं। वर्तमान में देश की स्थिति नाजुक होती जा रही है क्योंकि भारत में कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतों के इशारे पर असामाजिक तत्वों द्वारा दलित समाज को उकसाया जा रहा है कि तुम हिन्दू नही हो तुम बुद्धिष्ठ हो और हमारे संत रविदास थे वो भी हिन्दू नही थे, मुसलमान और दलित भाई-भाई हैं और हिन्दू हमारे दुश्मन हैं, इस तरीके से भारत को टुकड़े-टुकड़े करने का भयंकर षड्यंत्र चल रहा है। आज जो दलितों को हिन्दू समाज से तोड़ रहे हैं वो बड़े भयंकर पाप के भागीदार हो रहे हैं, उनको महान हिन्दू संत रविदास का इतिहास ठीक से पढ़कर दलित समाज को उनका मूल धर्म हिन्दू धर्म से दूर न करें। भाजपा इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी।
गुरू रविदास जी का जन्म काशी में चर्मकार (चमार) कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम संतोख दास (रग्घु) और माता का नाम कलसा देवी बताया जाता है जिस दिन उनका जन्म हुआ उस दिन रविवार था इस कारण उन्हें रविदास कहा गया। भारत की विभिन्न प्रांतीय भाषाओं में उन्हें रोईदास, रैदास व रहदास आदि नामों से भी जाना जाता है। रैदास ने साधु-सन्तों की संगति से पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया था। जूते बनाने का काम उनका पैतृक व्यवसाय था और उन्होंने इसे सहर्ष अपनाया। वे अपना काम पूरी लगन तथा परिश्रम से करते थे और समय से काम को पूरा करने पर बहुत ध्यान देते थे। उनकी समयानुपालन की प्रवृति तथा मधुर व्यवहार के कारण उनके सम्पर्क में आने वाले लोग भी बहुत प्रसन्न रहते थे।
युग प्रवर्तक स्वामी रामानंद उस काल में काशी में पंच गंगाघाट में रहते थे। वे सभी को अपना शिष्य बनाते थे। रविदास ने उन्हीं को अपना गुरू
बना लिया। कहा जाता है कि भक्त रविदास का उद्धार करने के लिये
भगवान स्वयं साधु वेश में उनकी झोपड़ी में आये लेकिन उन्होनें उनके द्वारा
दिये गये पारस पत्थर को स्वीकार नहीं किया।
वेद अतिरिक्त और सब भरमा।
वेद वाक्य उत्तम धरम, निर्मल वाका ग्यान
यह सच्चा मत छोड़कर, मैँ क्योँ पढूँ कुरान
स्त्रुति-सास्त्र-स्मृति गाई, प्राण जाय पर धरम न जाई।।
आगे कहते हैँ कि मुझे कुरानी बहिश्त की हूरे नहीँ चाहिए क्योँकि ये व्यर्थ
बकवाद है।
कुरान बहिश्त न चाहिए मुझको हूर हजार।
वेद धरम त्यागूँ नहीं जो गल चलै कटार।।
वेद धरम है पूरन धरमा।
करि कल्याण मिटावे भरमा।।
सत्य सनातन वेद हैँ, ज्ञान धर्म मर्याद।
जो ना जाने वेद को वृथा करे बकवाद।।
संत रविदास की शिक्षा से भी धर्मपाल सिंह जन-जन को कत्र्तव्य याद दिलाना चाहते हैं।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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