फिर एक होगा शरद पवार का कुनबा

महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार नयी पीढ़ी की गणित मंे उलझ गये हैं। एक तो उम्र का तकाजा है और दूसरा धन-बल का प्रभुत्व। नेताओं पर तरह-तरह के दबाव भी रहते हैं। इसलिए अब कोई भी नेता गारण्टी के साथ नहीं कह सकता कि उसके साथी कब तक साथ रहेंगे? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल को अपने-अपने साथियों पर बहुत भरोसा था लेकिन किसी न किसी कारण से वे साथ छोड़ गये। शरद पवार ने भी जब कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनायी थी, तब उनके वफादारों की कमी नहीं थी। हालात बदले तो भतीजे अजित पवार ने ही उनके खिलाफ ताल ठोंक दी। एक तरह से पार्टी पर ही कब्जा कर लिया। वरिष्ठ नेता शरद पवार तभी से चिंतित हैं। हालांकि उन्हांेने बाला साहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर जिस महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को राज्य मंे सत्तारूढ़ कराया था, उसके प्रति निष्ठा अब भी जतायी है लेकिन परिवार मंे इस बात पर जोर दिया जा रहा कि अब कुनबे को फिर से एक किया जाए। अभी कुछ दिनों पहले ही शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात हुई थी। उस समय भी यही अटकलें लगाई जा रही थीं कि दोनों धड़े एक होकर भाजपा के साथ जुड़ जाएंगे। अब उनकी बेटी सुप्रिया सुले की केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात ने कुनबे के एक होने की अटकलों को पुख्ता कर दिया है। भाजपा चाहती है कि पहले एनसीपी के दोनों गुट एक हो जाएं, उसके बाद एनडीए का हिस्सा बनाने में कोई हर्ज नहीं होगा। शरद पवार को भी लगता है कि उनकी एनसीपी अब और ज्यादा बिखर सकती है।
राजनीतिक गलियारे में ऐसी अटकलें हैं कि एनसीपी के दोनों गुट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं। एनसीपी के एक गुट का नेतृत्व शरद पवार और दूसरे का नेतृत्व दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार कर रही हैं। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी राजग का हिस्सा है। महाराष्ट्र की एनडीए सरकार में सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम भी हैं। हाल ही में अजित पवार की जयंती के मौके पर सुप्रिया सुले ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी वर्तमान में विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। अजित पवार गुट के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने 28 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सुनील तटकरे की मुलाकात के कुछ समय बाद एनसीपी के शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले और बीड से सांसद बजरंग सोनवणे ने भी अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने बताया कि वे सुप्रिया सुले की बेटी रेवती के विवाह समारोह के रिसेप्शन का निमंत्रण देने पहुंचे थे। इस दौरान अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी गृह मंत्री से चर्चा की गई।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बीजेपी चाहती है कि एनसीपी के दोनों गुट पहले एकजुट हों और इसके बाद एनडीए का हिस्सा बनें। इसी दिशा में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और एनसीपी के दोनों गुटों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि, अब तक किसी भी पक्ष ने विलय या इन बैठकों के राजनीतिक एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इससे पहले शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात और दिल्ली में प्रफुल्ल पटेल के साथ बैठक के बाद भी संभावित विलय को लेकर अटकलें तेज हुई थीं। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद शरद पवार ने कहा कि उन्होंने और सुले ने प्रधानमंत्री के साथ नीट प्रश्नपत्र लीक से संबंधित छात्रों की मांगों, किसानों की समस्याओं, जल प्रबंधन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) में संभावित टूट और एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं के बीच पार्टी प्रमुख शरद पवार ने चुप्पी साधे रखी। उनसे पार्टी में संभावित विभाजन और एनडीए में शामिल होने की अटकलों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि अभी इस विषय पर बात करने का समय नहीं है। शरद पवार का यह रुख जून महीने में दिए गए उनके बयान से अलग माना जा रहा है। उस समय उन्होंने पार्टी में किसी भी तरह की अंदरूनी टूट की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा था कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों में टूट हुई है, लेकिन उनकी पार्टी का कोई सांसद नहीं टूटेगा।
इस बीच, पार्टी की कार्यकारी
अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने भी एनडीए के साथ किसी तरह के गठबंधन, विलय या पर्दे के पीछे चल रही बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था। सुप्रिया सुले ने हाल ही में एक्स पर जारी बयान में कहा था कि परिसीमन के मुद्दे पर पार्टी का रुख बताने वाली मीडिया की कुछ खबरें गलत और केवल अटकलों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, अभी तक ऐसा कोई विधेयक पेश नहीं हुआ है। सुप्रिया सुले ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार संसद में परिसीमन से जुड़ा संशोधित विधेयक औपचारिक रूप से पेश नहीं करती, तब तक किसी भी प्रस्ताव पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब मुंबई में देर रात एनसीपी (एसपी) के नेता जयंत पाटिल, सत्तारूढ़ एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बैठक की खबर सामने आई। एनसीपी (एसपी) ने इन बैठकों को राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक विषयों से जुड़ा बताया और कहा कि इनका किसी संभावित राजनीतिक पुनर्गठन या गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।
दिल्ली में जंतर मंतर पर गत दिनों पहुंची सुप्रिया सुले ने अजित पवार को याद करते हुए कहा, “मेरा भाई अब हमारे बीच नहीं है। इसलिए मेरे भाई को लेकर या उनके नाम पर चल रही तमाम चर्चाओं पर अब पूर्ण विराम लग चुका है। मेरे भाई को गुजरे पांच महीने हो चुके हैं। अब हमारा परिवार धीरे-धीरे इस दुख से उबर रहा है। मेरे भाई की आखिरी इच्छा थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट एक हो जाएं और मिलकर राज्य तथा देश की सेवा करें। उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा करने की हमारी पूरी तैयारी थी। आज भी यही भावना है लेकिन दूसरी ओर से अब ऐसी कोई सकारात्मक भावना दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए मैंने और हमारे संगठन ने इस विषय को पूरी तरह समाप्त मान लिया है। अजित पवार को लेकर सुप्रिया सुले ने कई बातें याद कीं। वे कहती हैं जिस दिन दादा का निधन हुआ, उसी दिन हमारे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस विषय का उल्लेख किया लेकिन सामने वाले पक्ष ने यह कह दिया कि ऐसी कोई बात या ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। इससे हमें बेहद दुख और पीड़ा हुई।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



