टेलीग्राम के फाउंडर पर शिकंजा

भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट का पेपर लीक होने के बाद तहलका मच गया। केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इसी के चलते अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। युवाओं की आनलाइन राजनीतिक पार्टी काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा खोला तो सोनम वांगचुक जैसे एक्टिविस्ट भी अनशन पर बैठ गये। गांधीवादी आंदोलनकारी अन्ना हजारे भी मैदान मंे आने वाले थे कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने सीजेपी के दो प्रवक्ता युवाओं से वार्ता कर आंदोलन खत्म कराया। इस मामले मंे सोशल मीडिया टेलीग्राम की भूमिका को संदिग्ध पाते हुए भारत ने उसे प्रतिबंधित कर दिया था। बोलने की स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले कुछ लोगों ने टेलीग्राम का पक्ष भी लिया लेकिन अब रूस ने टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव को इंटरनेशनल वांटेड की सूची मंे डाल दिया है। माना जा रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध में दोनों तरफ टेलीग्राम का बड़े स्तर पर प्रयोग किया जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने डुरोव पर संगीन आरोप लगाए हैं। रूस ने टेलीग्राम एैप के फाडंडर पर आतंकवाद मंे मदद करने का गंभीर अरोप लगाया तो भारत मंे नकल माफियाओं की मदद करने में पेपर लीक का सुनियोजित काम टेलीग्राम कर रहा था। इसलिए समूची दुनिया को इस तरह के सोशल मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देना चाहिए। फ्रांस के अफसर भी टेलीग्राम के कारनामों पर गंभीरता से जांच कर रहे हैं। सोशल मीडिया जहां शिक्षा में मदद करती है वहीं, कैंसर जैसी बीमारी भी दे रही है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक के बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा था और 22 लाख से ज्यादा छात्रों पर सीधा इसका असर हुआ। इसके बाद जब 21 जून को री-नीट यानी दोबारा नीट का पेपर हुआ तो सबसे पहले सरकार ने टेलीग्राम को बैन कर दिया, जहां पेपर लीक के सबसे ज्यादा दावे किए जाते हैं। टेलीग्राम का नाम कई तरह के पेपर लीक के मामलों से जुड़ा। माना जाता है कुछ लोगों ने एग्जाम से पहले ही पेपर के कुछ सैंपल डाले और लोगों से जमकर वसूली की। अब इसे लेकर अथेनियम टेब्स की तरफ से एक थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें टेलीग्राम और डार्क वेब पर चल रहे परीक्षा पेपर लीक और धोखाधड़ी के नेटवर्क का पूरा एनालिसिस किया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नीट के दूसरे पेपर से पहले ही सरकार को पता चला कि टेलीग्राम पर जैसे चैनलों के जरिए छात्रों से भारी रकम लेकर नकली या लीक पेपर बेचे जा रहे थे। इसके बाद 16 जून 2026 को सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके 22 जून तक पूरे देश में टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी रोक लगा दी। सरकार का कहना था कि सिर्फ चैनलों को बंद करना काफी नहीं था, क्योंकि धोखाधड़ी करने वाले तुरंत नए ग्रुप और बॉट्स बना लेते थे।
टेलीग्राम ने इस बैन को दिल्ली हाईकोर्ट में चैलेंज किया, लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के सबूतों को देखते हुए इस रोक को सही ठहराया। इस दौरान सरकार ने टेलीग्राम को नया डार्क वेब तक कह दिया।
थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क काम कैसे करता है। ये नेटवर्क कुल तीन स्टेप्स में काम करता है। सबसे पहले परीक्षा से जुड़े नामों का इस्तेमाल करके टेलीग्राम पर पब्लिक चैनल बनाए जाते हैं, जिससे छात्र या अभ्यर्थी उनसे जुड़ते जाते हैं। दूसरा स्टेप छात्रों का भरोसा जीतना होता है। इसके लिए उन्हें सैंपल पेपर्स, अच्छे नोट्स और बाकी तरह के स्टडी मटीरियल दिए जाते हैं। इसके बाद तीसरा और आखिरी स्टेप छात्रों में डर पैदा करना और जल्दबाजी मचाना होता है। पेपर से ठीक पहले दावा किया जाता है कि जो सैंपल पेपर हमारे पास है, उससे ज्यादातर सवाल पूछे जाएंगे। इसके बाद सीधे पैसों की डिमांड होने लगती है। कई बार पेपर के लिए 50 हजार से 1 लाख तक भी मांग लिये जाते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी टेलीग्राम पर 500 से लेकर 15 हजार का रेट तय होता है। पेमेंट होने के बाद छात्रों को एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता है और वहीं सवाल दिए जाते हैं। भले ही क्वेश्चन पेपर सही ना हों, लेकिन पैनिक और डर के चलते छात्र आसानी से यकीन कर लेते हैं और धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
इस तरह के सोशल मीडिया को पूरी दुनिया में प्रतिबंधित होना चाहिए। इसीलिए रूस ने टेलीग्राम ऐप के फाउंडर पावेल डुरोव पर आतंकवाद में मदद करने का आरोप लगाया है। उन्हें रूस की मुख्य इंटरनल सुरक्षा एजेंसी ने गत 29 जुलाई 2026 को इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया। रूस का आरोप है कि टेलीग्राम से ऐसे चैनलों, चैट्स और बॉट्स को नहीं हटाया गया है जिसका कथित रूप से रूस के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। रूस की इस एजेंसी का आधिकारिक नाम फेडरल सिक्योरिटी सर्विस है, जिसे एफएसबी के नाम से भी जाना जाता है।
इस एजेंसी ने एक बयान में कहा कि टेलीग्राम के एडमिनिस्ट्रेशन ने कई ऐसे चैनलों, चैट्स और बॉट्स को नहीं हटाया है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन की इंटेलिजेंस एजेंसियों, आतंकवादी और चरमपंथी संगठनों द्वारा रूस में तोड़-फोड़, आतंकवाद, सामूहिक हत्या और साइबर धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों की तैयारी और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जाता है। आतंकवाद अब किसी एक देश की समस्या नहीं रह गयी है। उसे यदि सोशल मीडिया का प्रश्रय मिल रहा है तो यह बहुत खतरनाक है।
41 साल के डुरोव पर ये आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब रूस देश के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में से एक, टेलीग्राम पर पाबंदियां लगा रहा है। 2013 में शुरू हुई एन्क्रिप्टेड मैसेंजर ऐप टेलीग्राम का कहना है कि उसके 1 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों तरफ इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। हाल के सालों में रूस ने टेलीग्राम के इस्तेमाल पर रोक लगाने की कई बार कोशिश की है और अपनी सरकारी मैसेंजर सर्विस को बढ़ावा दिया है।
डुरोव ने इस साल की शुरुआत में बताया था कि रूसी अधिकारियों ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारी प्राइवेसी और बोलने की आजादी के अधिकार को दबाने की कोशिश के तहत टेलीग्राम तक पहुंच को सीमित करने के लिए झूठे बहाने बना रहे हैं। बता दें कि डुरोव का जन्म रूस में हुआ था और उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पासपोर्ट हैं। अभी वह फ्रांस में हैं। वैसे फ्रांसीसी अधिकारी भी डुरोव की जांच कर रहे हैं। फ्रांस में उन पर आरोप है कि टेलीग्राम अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अनुरोधों पर उसने पर्याप्त सहयोग नहीं किया। हालांकि डुरोव ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



