योगी का समावेशी अनुपूरक बजट

उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए अपनी अनुपूरक अनुदान की मांग और प्रस्तावित टिप्पणी जारी कर दी थी।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 205 के प्रावधानों के अनुसार, यह अनुपूरक बजट तब प्रस्तुत किया जाता है जब मूल आय-व्ययक (बजट) में स्वीकृत धनराशि उस वर्ष के खर्चों के लिए अपर्याप्त साबित होती है। साथ ही, जब नई मदों के लिए धन की आवश्यकता होती है, तो उसे प्रतीक मांग (टोकन डिमांड) के रूप में विधान-मंडल के समक्ष रखा जाता है। इस अनुपूरक मांग का मुख्य कारण यह है कि व्यय की वास्तविक आवश्यकताओं की तुलना में वर्तमान बजट में आवंटित राशि के कम पड़ने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, कुछ नई विकास योजनाओं और मदों पर खर्च किया जाना है, जिनकी व्यवस्था मूल बजट में नहीं थी। वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के तहत, इन मांगों के साथ उत्तर प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्ध अधिनियम, 2004 की धारा-6(5) के अधीन अपेक्षित विवरण पत्र भी प्रस्तुत किया गया। यह आधिकारिक प्रस्ताव 04 अगस्त 2026 को वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, दीपक कुमार द्वारा जारी किया गया। पूंजीगत व्यय पर विशेष बल देने का उद्देश्य प्रदेश में सड़क, ऊर्जा, उद्योग, चिकित्सा, ग्रामीण विकास तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार करना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिले।
इसीलिए उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया। इसमें राजस्व लेखे का व्यय 17,399.50 करोड़ रुपये और पूंजी लेखे का व्यय 41,620.04 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। बजट भाषण के दौरान सदन में समाजवादी पार्टी के विधायकों की लगातार नारेबाजी और हंगामा जारी रहा। बजट पर सार्थक बहस होनी चाहिए थी और सरकार से यह पूछा जाता कि अतिरिक्त धन की जरूरत क्यों पड रही है लेकिन विपक्ष ने अपना दायित्व नहीं निभाया। अनुपूरक बजट बिना चर्चा के पारित हो गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नारे लगा रहे सपा विधायकों से कहा कि आप लोग कुछ अच्छी बात भी सीखकर आया करिये।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुपूरक बजट किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों को ध्यान में रखकर जारी योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पेश किया गया है। मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप और रजनी तिवारी ने इसे बुनियादी ढांचे व जनहित के कार्यों को मजबूती देने वाला बताया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पास कर दिया गया है। यह बजट बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण की योजनाओं को गति देने के लिए लाया गया है।
विकास के लिए सबसे जरूरी अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर होता है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, ऊर्जा सुधार और औद्योगिक विकास की छोटी-बड़ी परियोजनाओं को गति मिलती है। भारत गांवों का देश है। ग्रामीण विकास के बिना देश का विकास हो ही नहीं सकता। इसी लिए योगी सरकार के अनुपूरक बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और रोजगार के लिए 17,942.73 करोड़ रुपये से अधिक रुपए का प्रावधान किया गया है। गांव का मुख्य धंधा खेती है। कृषि क्षेत्र को समृद्ध करने के लिए खेती और किसान कल्याण योजनाओं के वास्ते अनुपूरक बजट में 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना भी शामिल है।
राजस्व एवं प्रशासनिक ढांचा दुरुस्त रखना सरकार का प्रमुख दायित्व है। अनुपूरक बजट में जिलों में प्रशासनिक सुविधाओं और इमारतों के लिए 1,014.11 करोड़ रुपये (आपदा प्रबंधन सहित) का प्रावधान किया गया है। जनसेवा में निरंतर कार्य कर रहे लोग आर्थिक संकट में न रहें, इसके लिए उनके मानदेय में वृद्धि की गयी है। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों, ग्राम रसोइयों और ग्राम चैकीदारों के मानदेय बढ़ाने का मार्ग अनुपूरक बजट में प्रशस्त किया गया है। अनुपूरक बजट में युवाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। परीक्षाओं के निष्पक्ष और तकनीकी रूप से बेहतर आयोजन के लिए अलग से 100 करोड़ से अधिक की व्यवस्था की गयी है। अनुपूरक बजट में वकीलों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं व कैशलेस इलाज तथा छात्राओं व युवाओं से जुड़ी योजनाओं पर भी फोकस रखा गया है।
सरकार के मुताबिक इस अनुपूरक बजट के माध्यम से प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत बनाना है। यूपी सरकार में मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने पेश किए गए अनुपूरक बजट में भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए 22 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इसके जरिए औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करने के कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा सरकार ने अनुपूरक बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी है।
सरकार ने ग्राम विकास विभाग के लिए 17,942.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण अधोसंरचना, पंचायत विकास, ग्रामीण आजीविका, मूलभूत सुविधाओं तथा गांवों में विकास कार्यों को गति देने में किया जाएगा। इसके अलावा बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार के लिए ऊर्जा विभाग को 7,422.27 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इसके अलावा अनुपूरक बजट में स्वास्थ्य, चिकित्सा विभाग के लिए 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का आवंटन किया गया है। इस फंड से अस्पतालों की सुविधाओं का विस्तार, चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग को 1,655 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।वहीं महिला कल्याण विभाग के लिए घ्1,094.40 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं के सशक्तीकरण, सुरक्षा और
कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



