लेखक की कलम

झारखंड में छात्र आंदोलन

नौजवानों विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा सरकार की व्यवस्था से नाराज ही नहीं विश्वास खो चुके हैं। विश्वास की यह कमी केवल झारखंड तक ही सीमित नहीं है। पिछले महीने दिल्ली में हुए कहीं अधिक व्यापक विरोध प्रदर्शन हाल के वर्षों में परीक्षाओं और नौकरियों को लेकर युवाओं के गुस्से की सबसे तीखी अभिव्यक्तियों में से एक बन गए। इन प्रदर्शनों के पीछे स्वतंत्र युवा आंदोलन, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने झारखंड में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को भी अपना समर्थन देने की घोषणा की है। भाजपा तो खुलकर इसके पक्ष में खड़ी है क्योंकि उसे दिल्ली आंदोलन का बदला लेना है। उस आंदोलन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रियंका के साथ धरना भी दिया था। आंदोलन से मोदी सरकार को झुकना पड़ा था। धर्मेन्द्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब झारखंड में उसी मुद्दे पर युवा आक्रोश उभरा है तो भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। झारखंड में युवा आक्रोश का तात्कालिक कारण अप्रैल में आयोजित प्रारंभिक सिविल सेवा परीक्षा है। जुलाई में परिणाम घोषित होने के बाद, उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर साझा की गई लीक हुई उत्तर पुस्तिकाओं से पता चला है कि कुछ सफल आवेदकों ने अपेक्षा से कहीं कम प्रश्नों के उत्तर दिए थे। इससे नतीजों में हेराफेरी की आशंकाएं और बढ़ गईं। प्रदर्शनकारी परीक्षा रद्द करवाकर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं। वे यह भी चाहते हैं कि इस मामले की जांच भारत की प्रमुख संघीय जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जाए।
झारखंड हेमंत सोरेन सरकार ने आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा इन आरोपों की जांच शुरू भी करवाई और झारखंड लोक सेवा आयोग ने परीक्षा के अगले चरण को स्थगित कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष एल खियांगते ने 22 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था और जांच के तहत उनसे पूछताछ की जा रही है। जांचकर्ता उस निजी कंपनी की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं जिसने परीक्षा प्रक्रिया के कुछ हिस्सों का संचालन किया था, क्योंकि उम्मीदवारों ने उसके चयन के तरीके पर सवाल उठाए थे। झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने बीबीसी को बताया कि राज्य ने मौजूदा विरोध प्रदर्शन से पहले ही आरोपों की जांच शुरू कर दी थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे मामले को सीबीआई को सौंपने के बजाय सीआईडी को अपनी जांच पूरी करने दें। उन्होंने कहा, हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं, और आगे कहा कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा- चाहे वह नौकरशाह हो, कर्मचारी हो, बिचैलिए हों या कोई बड़ा राजनेता- उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अप्रैल की परीक्षा रद्द करने की प्रदर्शनकारियों की मांग पर उनसे सीधे चर्चा करेगी लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। वे भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और लंबे समय से अटकी भर्तियों को समय पर पूरा करने की मांग कर रहे हैं। सबसे बढ़कर, वे नियमित और पारदर्शी परीक्षाएं चाहते हैं ताकि उम्मीदवारों को अनिश्चित काल तक इंतजार न करना पड़े। हालांकि समस्या से ज्यादा राजनीति मुखर है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि नौकरी को लेकर भारत में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। युवा अब सोचते हैं कि सरकारी नौकरी स्थिर वेतन, सामाजिक प्रतिष्ठा और मध्यम वर्ग में प्रवेश का मार्ग प्रदान करती है। प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है और कई उम्मीदवार एक नौकरी पाने के लिए वर्षों तक प्रयास करते हैं। प्रतियोगितात्मक परीक्षा के पेपर लीक होने से उनका आक्रोश इसीलिए उबल पड़ता है। झारखंड में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अनिश्चितता से इंतजार और लंबा हो जाता है। जैसे-जैसे दोस्त नौकरी पाते हैं, शादी करते हैं और आगे बढ़ते हैं, कई लोग अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं। हर स्थगित परीक्षा, रुकी हुई भर्ती और नए विवाद के साथ, जिस भविष्य के लिए उन्होंने इतनी मेहनत की है, वह उनसे और दूर होता जा रहा है।
एक प्रतियोगी परीक्षार्थी का कहना है कि उसके लिए इंतजार लगभग 7 साल पहले शुरू हुआ था। अब वह 28 साल की हो चुकीं हैं। राज्य सिविल सेवा परीक्षा दो बार दी है। उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्होंने इस साल प्रारंभिक चरण पास कर लिया है, इसलिए वे फाइनल परिणाम का इंतजार करती रहीं, जो लगभग आधी रात को घोषित हुआ। उनका नाम परिणाम में नहीं था। इससे निराशा हुई लेकिन यह निराशा आक्रोश में उस समय बदल गयी जब पता चला कि परीक्षा में धांधली हुई है। कुछ परीक्षार्थियों का यह भी आरोप है कि खास उम्मीदवारों ने उत्तरों को खाली छोड़ दिया ताकि बाद में उन्हें भरा जा सके। सीआईडी ने सफल उम्मीदवारों से उत्तर पुस्तिकाएं मांगी हैं और झारखंड लोक सेवा आयोग के कार्यालयों और अन्य स्थानों पर छापेमारी की है। इस जांच प्रक्रिया के बीच आंदोलनकारी ज्यादा उग्र हो गये तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। एबीवीपी को ऐसे ही मौके की तलाश थी। उसने 11अगस्त को प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड विधानसभा का घेराव करने की घोषणा कर दी।जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, वाटर कैनन के इस्तेमाल और गिरफ्तारी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 11 अगस्त को झारखंड विधानसभा का शांतिपूर्ण घेराव किया।
आरएसएस के छात्र संगठन ने एक बयान में कहा कि हजारों छात्रों द्वारा पुराने विधानसभा भवन टिंकोनिया ग्राउंड से विधानसभा तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने और सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी गयीं।एबीवीपी ने छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन के इस्तेमाल और गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है।
उधर, अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को 9 अगस्त को रांची में झारखंड विधानसभा के बाहर दिनभर चले विरोध प्रदर्शन के बाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शनकारियों पर फिर लाठीचार्ज किया। झारखंड भाजपा ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद की घोषणा की थी । विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में 11 अगस्त को झारखंड बंद की संयुक्त घोषणा की। यह घोषणा रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। झारखंड भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो को 10 अगस्त को रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, क्योंकि विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मार्च में भाग लेने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई थी। छात्र कहते हैं कि जब तक उनकी मांगें पूरी होंगी आंदोलन चलेगा। उधर, भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी घटनास्थल पर पहुंच गये हैं।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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