दीपावली अब विश्व मंच पर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल मंे भारत के योग को विश्व मंच पर स्थापित किया गया। इसके तहत 21 जून को दुनिया भर मंे योग दिवस मनाया जाता है। अब भारत के एक बड़े पर्व दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त बिरासत में शामिल किया गया है। इस प्रकार अब दीपावली को ग्लोबल पहचान मिलेगी। यह उपलब्धि दुर्गा पूजा, कुंभ मेला और गरबा जैसे त्योहारों को पहले शामिल करने के बाद मिली हैं जिससे भारत की सांस्कृतिक पहचान विश्व स्तर पर और बढ़ गयी हैं। दीपावली भारत का प्रमुख त्योहार है। यह अंधकार पर प्रकाश की जीत और धर्म की विजय का प्रतीक पर्व माना जाता है। इस त्योहार का सीधा संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से भी है। त्रेता युग मंे श्रीराम जब 14 वर्ष के वनवास की अवधि पूर्ण करके और अत्याचारी रावण का संहार कर अयोध्या लौटे, तब उनके आगमन की खुशी में घी के दीपक से पूरा नगर रोशन किया गया था। वह कार्तिक महीने की अमावस्या की काली रात थी और दीपकों की रोशनी ने अंधेरे को मिटा दिया था। ऐसे त्योहार को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची मंे शामिल करने से सांस्कृतिक विरासत समृद्ध होगी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श अब विश्व का मार्गदर्शन करेंगे। इससे भारत में पर्यटन बढ़ने की भी संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अन्तरराष्ट्रीय सम्मान भारत की बढ़ी सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का प्रतिविम्ब है। यहां ध्यान देने की बात है कि योगी आदित्यनाथ ने जब से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली, तभी से अयोध्या मंे दीपावली भव्य रूप से मनायी जा रही है और सरयू के तट पर दीपक जलाने का हर वर्ष नया रिकार्ड बनता है।
रोशनी के पर्व दीपावली को यूनेस्को की सूची में जगह मिली है। दरअसल यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी की बैठक में दीपावली को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत में जगह मिली है. इस ऐतिहासिक मौके को सेलिब्रेट करने के लिए दिल्ली के लाल किले, चांदनी चैक और कई सरकारी इमारतों को दीपों और लाइटिंग से सजाया गया। सरकार इसे एक राष्ट्रीय उपलब्धि मानते हुए पूरे देश में रोशनी कार्यक्रम किया। लाल किला इस उत्सव का मुख्य केंद्र बना। दीपावली से पहले भारतीय त्योहारों को यह सम्मान मिल चुका है। दीपावली से पहले भारत की कुल 15 सांस्कृतिक परंपरा यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है। यह परंपराएं भारत की विविधता, लोक कला और
आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है। कुटियाट्टम, केरल-2008- कुटियाट्टम भारत का सबसे पुराना जीवंत संस्कृत रंगमंच है, जिसे चाक्यार और नंग्यारम्मा निभाते हैं। इसे 2008 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया था।वैदिक मंत्रोच्चार, 2008- हजारों वर्षों से चली आ रही वेद मंत्रों की मौखिक परंपरा को भी 2008 में यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया। रामलीला, 2008-भगवान राम की जिस कथा का पारंपरिक मंचन देश भर में दीपावली से पहले किया जाता है, इसे भी 2008 में यूनेस्को ने अपनी सांस्कृतिक लिस्ट में शामिल किया था। राममन, 2009- उत्तराखंड- राममन उत्तराखंड के गढ़वाल सामुदायिक का स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो सलूर डुंगरा गांव में मनाया जाता है। इसे भी 2009 में यूनेस्को की लिस्ट में शामिल किया गया था। इसी प्रकार छऊ नृत्य, 2010-पश्चिम बंगाल- झारखंड और उड़ीसा की तीन अलग-अलग शैलियों वाले मुखौटा नृत्य को भी यूनेस्को की लिस्ट में शामिल किया गया था। कालबेलिया नृत्य, 2010- राजस्थान-राजस्थान के सपेरा समुदाय का प्रसिद्ध लोक नृत्य कालबेलिया को भी यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था इस नृत्य को अपनी लय और तेज गतियों के लिए जाना जाता है। मुदियेट्टू, 2010-केरल- केरल मुदियेट्टू मां काली और दारिका की कथा पर आधारित धार्मिक नाटक परंपरा है, जिसे यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था। लद्दाख का बौद्ध जप, 2012- तिब्बती बौद्ध परंपरा से जुड़ें लद्दाख के बौद्ध को भी यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था। यह संतों की ओर से किया जाने वाला पवित्र ग्रंथ का पाठ होता है। मणिपुर का संकीर्तन, 2013- श्री कृष्ण भक्ति पर आधारित मणिपुर के संकीर्तन को भी 2013 में यूनेस्को की लिस्ट में शामिल किया गया था। ठठेरों की धातु कारीगरी, 2014- पंजाब- जंडियाला गुरु में बनाई जाने वाली पारंपरिक पीतल और तांबे की कला होती है, जिसे भी यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया है। नवरोज, 2016- पारसी समुदाय का नया साल यानी नवरोज को भी यूनेस्को ने 2016 में अपनी लिस्ट में शामिल किया था। योग, 2016- शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के मिश्रण योग को भी 2016 में यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था। कुंभ मेला, 2017- दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम जो भारत के चार शहरों में आयोजित किया जाता है। उसे भी 2017 में यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था। कोलकाता की दुर्गा पूजा, 2021- कोलकाता में होने वाली दुर्गा पूजा दुनिया भर में मशहूर है। 2012 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था। इसके साथ ही गुजरात का गरबा, 2023- नवरात्र के दौरान खेले जाने वाला गुजरात का गरबा दुनिया भर में अपनी अलग छाप छोड़ता है। 2023 में गुजरात में होने वाले गरबा को भी यूनेस्को ने अपनी लिस्ट में शामिल किया था।
यूनेस्को की इस लिस्ट में शामिल होना किसी भी परंपरा के लिए बड़ा सम्मान माना जाता है. इसके कई फायदे भी होते हैं। यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होने पर त्योहार या परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और दुनिया भर में इसकी चर्चा होती है। इसके अलावा यूनेस्को इन परंपराओं को सुरक्षित रखने, दस्तावेज तैयार करने और आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करता है. इससे देश में पर्यटकों की संख्या बढ़ती है, आर्थिक गतिविधियां तेज होती है और स्थानीय कलाकारों को लाभ मिलता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर यूनेस्को आर्थिक और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराता है।
दिल्ली स्थित लाल किले में यूनेस्को की बैठक का आयोजन हुआ। इस दौरान यूनेस्को ने दीपावली को इंटेन्जिबिल कल्चरल हेरिटेज की लिस्ट में शामिल करने का फैसला लिया है।
यह भारत के लिए गर्व का पल है। यह पहली बार है जब देश में यूनेस्को की बैठक देखने को मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है। पीएम मोदी ने पोस्ट में लिखा, देश और दुनिया के लोगों में गजब का उत्साह है। दीपावली हमारी संस्कृति और मूल्यों के बेहद करीब है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह ज्ञान और धर्म का प्रतीक है। यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची का हिस्सा बनने के बाद दीपावली को दुनियाभर में और अधिक लोकप्रियता मिलेगी। यूनेस्को की बैठक 8 दिसंबर से शुरू हुई और 13 दिसंबर तक चलेगी। यूनेस्को ने जैसे ही अमूर्त विरासत की सूची में संशोधन करते हुए दीपावली को शामिल किया, वैसे ही हर तरफ वंदे मातरम् और भारत माता की जय का शंखनाद हो गया।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने को देश और प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उस उत्सव की वैश्विक पहचान है, जिसे अंधकार पर प्रकाश की विजय और नए आरंभ के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और परंपराओं की महत्ता को विश्व मंच पर और मजबूती प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के दृष्टिकोण से इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अयोध्या प्रभु श्रीराम की पावन भूमि है। यहीं से दीपावली की ऐतिहासिक उत्सव परंपरा की शुरुआत हुई थी।
अयोध्या का दीपोत्सव विश्वविख्यात होता जा रहा है। इस वर्ष के नौवें संस्करण में कई नए कीर्तिमान स्थापित हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या स्थित श्रीरामलला के दरबार में दीप प्रज्ज्वलित किया और सरयू तट पर महाआरती में सम्मिलित हुए। राम दरबार में दीप प्रज्ज्वलन के बाद राम की अयोध्या रोशनी से जगमगा उठी। यह आयोजन गिनीज बुक में भी दर्ज किया गया।
(मोहिता-हिफी फीचर)


