लेखक की कलम

मान का हुनर नौकरी देगा या वोट!

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान विधानसभा चुनावों से पहले युवाओं को अपनी पार्टी और सरकार के पक्ष में लाना चाहते हैं। राज्य में चार महीने के बाद विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। युवाओं को ड्रग की लत के चलते एक तरफ जहां अपराध बढ़ रहे हैं, वहीं यह प्रमुख चुनावी मुद्दा भी बनता जा रहा है। भाजपा ने राज्य भर मंे नशामुक्ति यात्राएं निकालीं। नशा मुक्त करने के आश्वासन पर ही आम आदमी पार्टी (आप) को जनता ने सरकार बनाने का मौका भी दिया था। अब पांच साल बाद भगवंत मान की सरकार राज्य को नशा से मुक्त कराने का वादा तो कर नहीं सकती, इसलिए युवाओं को रोजगार देकर नशे से भी दूर कर सकती है। मान सरकार ने गत 8 अक्टूबर को इसी सिलसिले मंे ‘हुनर पंजाब पोर्टल’ लांच किया है। इसके चार प्रमुख कार्य होंगे। संस्थान खोज माॅड्यूल, भर्ती और प्लेसमेंट माॅड्यूल, इंटर्नशिप और औद्योगिक प्रदर्शन माॅडॅयूल तथा उद्योग संस्थान सहयोग माॅड्यूल। सरकार का दावा है कि इसके जरिए युवाओं को पंजाब में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। निश्चित रूप से यह चुनावी कदम है और देखने की बात यह होगी कि इससे क्या सचमुच युवाओं को नौकरी या रोजगार मिलेगा अथवा आम आदमी पार्टी वोट बटोरने के लिए जाल बिछा रही है। एक बात तो तय है कि इस बार आम आदमी पार्टी की राह पिछली बार की तरह आसान नहीं होगी। भाजपा भी जोर-शोर से तैयारी कर रही है और पुराना साथी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने 23 अक्टूबर को संकेत दिया है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा और एसएडी के बीच गठबंधन हो सकता है।
पंजाब में उद्योगों की जरूरतों और स्थानीय युवाओं के कौशल के बीच तालमेल बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने हुनर पंजाब पोर्टल लॉन्च किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 8 अक्टूबर को चंडीगढ़ में इस पोर्टल के साथ फास्ट-ट्रैक पंजाब इंसेंटिव्स मॉड्यूल की शुरुआत की। सरकार की इस पहल का उद्देश्य उद्योगों को कुशल युवाओं की पहचान करने, उन्हें भर्ती करने और प्रशिक्षण देने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना है। इसके जरिए पंजाब के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, हुनर पंजाब और फास्टट्रैक पंजाब मिलकर उद्योगों के लिए राज्य के एकीकृत इंटरफेस का कौशल विकास और प्लेसमेंट स्तंभ तैयार करेंगे। यह पोर्टल लॉन्च हो चुका है और इसके विभिन्न मॉड्यूल चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं। पोर्टल लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी चार प्रमुख समस्याओं का जिक्र किया। इनमें उपलब्ध कुशल प्रतिभाओं की सीमित जानकारी, उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच तालमेल की कमी, कंपनियों की जरूरतों और युवाओं के कौशल के बीच सीधा संपर्क न होना और आवेदनों के निपटारे के लिए तय समय-सीमा का अभाव शामिल है।
हुनर पंजाब के जरिए इन कमियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि कंपनियों को अपनी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित कर्मचारी तलाशने में आसानी हो और युवाओं को रोजगार पाने के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सात प्रशासनिक विभागों के अंतर्गत आने वाले 1,700 से अधिक संस्थान पहले ही इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं। यह शुरुआती भागीदारी राज्य में कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े संस्थानों को एक साझा मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हुनर पंजाब को चार प्रमुख मॉड्यूल में विकसित किया गया है। इनमें संस्थानों की खोज, भर्ती और प्लेसमेंट, इंटर्नशिप एवं औद्योगिक प्रशिक्षण और उद्योग-संस्थान सहयोग शामिल हैं। संस्थान खोज मॉड्यूल के जरिए कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार संबंधित शिक्षण और प्रशिक्षण संस्थानों की पहचान कर सकेंगी। भर्ती और प्लेसमेंट मॉड्यूल उद्योगों को कुशल युवाओं तक पहुंचने और भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इंटर्नशिप और औद्योगिक प्रशिक्षण मॉड्यूल के अंतर्गत उद्योगों, शिक्षण संस्थानों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों और संबंधित विभागों के बीच इंटर्नशिप तथा औद्योगिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया को एक मंच पर लाने की योजना है। उद्योग-संस्थान सहयोग मॉड्यूल के जरिए कंपनियों और शिक्षण संस्थानों के बीच औपचारिक साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि प्रशिक्षण और शिक्षा को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके।
पोर्टल के माध्यम से उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन यानी एमओयू के जरिए सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत गेस्ट लेक्चर, फैकल्टी डेवलपमेंट, काम के दौरान प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, पाठ्यक्रम में सुधार के सुझाव, बुनियादी ढांचे और तकनीकी सहायता तथा कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत सहयोग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
उधर, पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन हो सकता है, इसका संकेत शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दिया है। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टी के साथ गठबंधन किया जा सकता है। पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया देते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि अकाली दल के मुख्य राजनीतिक विरोधी आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस हैं। वहीं, भाजपा का नाम लिये बिना उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टी के साथ गठबंधन किया जा सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में ही पंजाब में एनडीए की सरकार बनने का दावा किया था। अमित शाह के पंजाब में एनडीए की सरकार बनने के बयान के बाद सुखबीर सिंह बादल की यह पहली प्रतिक्रिया है। बादल के इस बयान के बाद अटकलें लगने लगी हैं कि पंजाब में बीजेपी और अकाली दल का एक बार फिर से गठबंधन हो सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर दोनों दलों की तरफ से बयान सामने नहीं आया है।
पंजाब में अकाली दल और बीजेपी लंबे समय तक सहयोगी रहे थे, लेकिन कृषि कानूनों को लेकर गठबंधन टूट गया था। उस समय एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल ने 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद एसएडी ने गठबंधन से नाता तोड़ लिया। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं। जिसमें दोनों को ही करारी हार हुई।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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