सागर के पर्यावरण का रक्षक ‘समुद्र प्रताप’

भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 5 जनवरी 2026 को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के सबसे बड़े जहाज आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। यह न केवल भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रक्षा-औद्योगिक क्षमता का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित इस जहाज में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा मंत्री ने इसे भारत के “परिपक्व रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र” का उदाहरण बताते हुए कहा कि देश अब जटिल समुद्री और रणनीतिक चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है। समुद्र प्रताप को विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका इससे कहीं व्यापक है। आधुनिक प्रदूषण पहचान प्रणालियों, तेल रिसाव नियंत्रण उपकरणों, समर्पित प्रतिक्रिया नौकाओं और अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणालियों से लैस यह पोत समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव, तटीय गश्त और समुद्री कानून प्रवर्तन में भी अहम भूमिका निभाएगा। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और विमानन सहायता सुविधाएं भी हैं, जिससे इसकी परिचालन पहुंच और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है।
रक्षा मंत्री ने समुद्री पर्यावरण संरक्षण को केवल रणनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी बताया। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि के दौर में तेल रिसाव, जहाज दुर्घटनाएं और समुद्री प्रदूषण तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र प्रताप जैसी क्षमताओं से भारत प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव, मत्स्य संसाधनों और समुद्री जैव विविधता की रक्षा करने में सक्षम होगा, जो सीधे तौर पर तटीय समुदायों और ब्लू इकॉनमी की स्थिरता से जुड़ा है।
इस जहाज की कमीशनिंग का एक ऐतिहासिक पहलू यह भी है कि पहली बार किसी अग्रिम पंक्ति के तटरक्षक पोत पर महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। रक्षा मंत्री ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि आज महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं में नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा में अग्रिम मोर्चे पर डटी हैं। यह कदम भारतीय तटरक्षक बल को अधिक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार संगठन बनाता है।
वैश्विक समुद्री अनिश्चितता के दौर में, समुद्र प्रताप जैसे पोत यह संदेश देते हैं कि भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने वाला एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति भी है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)


