पुतिन ने धैर्य से जीता यूरोप का समर्थन

मास्को। यूक्रेन पर रूस ने जब हमला किया तो सबने सोचा कि कुछ घंटों या दिनों में पुतिन ये युद्ध जीत जाएंगे। मगर, घंटे, दिनों में बदले, दिन महीनों में और महीने सालों में। युद्ध अब तक जारी है। इस दौरान अमेरिका से लेकर यूरोप ने पुतिन को विलेन और जेलेंस्की को हीरो बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी। यूक्रेन को भर-भरकर हथियार भेजे। आर्थिक मदद भी दी। सैटेलाइट से लेकर खुफिया मदद भी की। यहां तक की ये भी पश्चिमी मीडिया में खबरें चलने लगीं कि रूस हार की तरफ बढ़ रहा है। पुतिन के खिलाफ बगावत होने वाली है और उन्हें गंभीर बीमारी हो गई है। मगर, पुतिन शांति से अपने काम में लगे रहे। उधर, जेलेंस्की समर्थक देशों को धीरे-धीरे खोते चले गए और पुतिन स्वीकार्य होते गए।
पुतिन ने कभी भी अपनी पूरी ताकत युद्ध में नहीं झोंकी। युद्ध पर हर बयान पुतिन ने नहीं दिए, बल्कि वो सेना देती रही। कूटनीतिक स्तर पर काम विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव संभालते रहे। पुतिन सिर्फ सभी कामों में फिनिशिंग टच देते रहे। रूस ने युद्ध में सबसे पहले अपने सोवियत काल के हथियारों को लगाया। अपने रक्षा उद्योग को नये हथियारों, बमों और मिसाइलों बनाने के लिए पूरा सहयोग और समय दिया। सबसे खतरनाक हथियारों का उपयोग अब तक नहीं किया। जहां जरूरत पड़ी वहां बहुत थोड़े समय के लिए नये हथियारों का इस्तेमाल किया।
उधर, जेलेंस्की ने युद्ध के बाद खुद को हीरो की तरह पेश किया। युद्ध के बाद यूक्रेन की तरफ से केवल जेलेंस्की ही दिखाई देते रहे।
विदेश दौरों पर भी यूक्रेन की तरफ से जेलेंस्की ही ज्यादातर जगह गए। जेलेंस्की ने अपने देश की आर्थिक स्थिति और रक्षा उद्योग पर ध्यान नहीं दिया। वो अमेरिका और यूरोप के भरोसे बैठे रहे। जेलेंस्की ने पुतिन पर जमकर बयानबाजी की। जेलेंस्की ने हर उस देश को कोसा जिनके रूस के साथ संबंध थे। जेलेंस्की ने भारत को लेकर भी कई बार बयानबाजी की। अपने धैर्य और गरिमा बनाए रखने के कारण पुतिन के पास अब एशिया और अरब देशों के समर्थन के साथ ही अमेरिका का भी समर्थन आ गया है।



