अध्यात्म

सुख-समृद्धि व शांति के लिए ऐसे करें दिन की शुरुआत

(हिफी डेस्क-हिफी फीचर)
निंद्रा देवी की गोद में अगले दिन कार्य करने की ऊर्जा देती है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में अर्थात् 4 बजे निंद्रा का त्याग कर देना चाहिए। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर जैसे रात्रि पाली मंे काम करने वालों के लिए यह व्यावहारिक नहीं है लेकिन निंद्रा त्यागते ही सबसे पहले अपनी हथेलियों का दर्शन करें।
सुबह उठते ही मंत्र पढ़िये और पाॅजिटिव बने रहिये
कहते हैं कि सुबह उठते ही हम सबसे पहले जिसको देखते हैं उसी से यानी उसकी ऊर्जा से हमारा पूरा दिन कैसे बीतेगा, यह उसी समय तय हो जाता है। आज के समय में जो सबसे बड़ी गलती हम रोज अनजाने में ही कर रहे हैं वह यह है कि हम ज्यादातर लोग उठते ही मोबाइल फोन को देखने लगते हैं। हमारे हिन्दू धर्म में सुबह की शुरुआत शान्त तरीके से करने की बात कही गई है। बहुत कम लोग जानते हैं कि सुबह उठते ही बिस्तर पर बैठे-बैठे ही एक खास मंत्र को पढ़ने की सलाह दी गई है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र को इस तरह पढ़ने से पूरे दिन सकारात्मकता बनी रहती है और मन शान्त रहता है। यह मंत्र है-
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दं, प्रभाते करदर्शनम्।।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः-हाथ के अग्र भाग माने आगे के भाग में धन की देवी लक्ष्मी का वास है, लक्ष्मी यानी समृद्धि, सम्पन्नता।
करमध्ये सरस्वती-हाथ के मध्य यानी बीच में विद्या की देवी माँ सरस्वती का वास है।
करमूले तु गोविन्दं-हाथ के मूल यानी जड़ में संसार के रक्षक पालनहार भगवान गोविन्द अर्थात विष्णु का वास है।
प्रभाते करदर्शनम्-प्रभात यानी सुबह-सुबह मैं अपनी हथेलियों के दर्शन करके लक्ष्मी, सरस्वती और विष्णु की तीनों शक्तियों का स्मरण करता हूँ।
कहते हैं सुबह उठते ही अपनी हथेलियों को देखकर इन मंत्र को पढ़ने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस मंत्र को पढ़कर दिन की शुरुआत सकारात्मकता और ईश्वर के स्मरण के साथ करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। हथेली को देखते हुये इस मंत्र को पढ़ने के बाद हथेलियों को रगड़कर उसकी गर्माहट को अपनी आँखों पर महसूस करना चाहिये।
सुबह उठते ही मत कीजिए मोबाइल फोन देखने की गलती
क्या आप जानते हैं कि आपका दिन अच्छा बीते इसके लिए आपको सुबह सुबह किस को देखना चाहिए और सबसे पहले क्या बोलना चाहिए।
आइए बताते हैं सुबह सवेरे उठकर बोलने वाला मन्त्र ।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दं, प्रभाते करदर्शनम्।।
अब समझिए इस मंत्र का अर्थ
हाथ के अग्र भाग यानि आगे के भाग में धन की देवी लक्ष्मी का वास है, लक्ष्मी यानी समृद्धि, सम्पन्नता।
हाथ के मध्य यानी बीच में विद्या की देवी माँ सरस्वती का वास है।
हाथ के मूल यानी जड़ में संसार के रक्षक पालनहार भगवान गोविन्द अर्थात विष्णु का वास है।
प्रभात यानी सुबह-सुबह मैं अपनी हथेलियों के दर्शन करके लक्ष्मी, सरस्वती और विष्णु की तीनों शक्तियों का स्मरण करता हूँ।
बात यहाँ तक नहीं है। सुबह उठते ही आज कल हम सभी मोबाइल फोन देखने लगते हैं। यह हमारी सबसे बड़ी गलती है जिसकी वजह से पूरा दिन उतना अच्छा नहीं बीतता, जितना होना चाहिए।
तो समझिए कि आपको सुबह-सुबह मोबाइल नहीं देखना बल्कि अपनी हथेलियों को देखना है और ईश्वर को याद करते हुए ऊपर बताए मंत्र को बोलना है। उसके बाद आप को अपनी हथेलियों को रगड़ कर हथेलियों की गर्माहट को अपनी आँखों में महसूस करना है। ऐसा करने से आपका पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा यानी पॉजिटिव एनर्जी से भरा रहेगा और आप जो भी करेंगे उसमें सफल होंगे। (हिफी)

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