भगवान शिव को प्रिय है सावन

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में शिव भक्त भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना करते हैं। मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होने लगती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि हर साल श्रद्धालु सावन माह का बेसब्री से इंतजार करते हैं। शिव जी को सावन का महीना विशेष रूप से प्रिय है क्योंकि इस दौरान समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद महादेव को शीतलता की आवश्यकता थी, जिसे सावन की बारिश और गंगा जल ने प्रदान किया। इस महीने में माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी इसके अलावा, सावन के महीने को प्रिय मानने के अन्य मुख्य कारण हैं।
सावन के महीने से जुड़ी सबसे प्रमुख कथा समुद्र मंथन की है। कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उसमें से 14 रत्न निकले। लेकिन रत्नों से पहले हलाहल नामक भयंकर विष प्रकट हुआ, जिसकी ज्वाला से पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मच गया। सृष्टि की रक्षा के लिए सभी देवता और असुर भगवान शिव की शरण में पहुंचे। तब महादेव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव पर पवित्र नदियों का शीतल जल अर्पित किया। मान्यता है कि यह घटना सावन मास में ही हुई थी। इसलिए श्रद्धालु सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उन्हें बेलपत्र अर्पित करते हैं।
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में अपने प्राण त्यागने के बाद माता सती ने हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने सावन के पूरे महीने निराहार रहकर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी माह उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसलिए सावन का महीना अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
एक धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के महीने में भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा (चातुर्मास) में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। यह भी कहा जाता है कि सावन में भगवान शिव अपनी ससुराल कनखल (हरिद्वार) आते हैं और पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं। इसलिए इस महीने में की गई पूजा-अर्चना और भक्तों की प्रार्थना सीधे महादेव तक पहुंचती है।
पंचांग के अनुसार, सावन की शुरुआत आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से मानी जाती है। आज 29 जुलाई को पूर्णिमा तिथि है। ऐसे में साल 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई गुरुवार से होगी। यह महीना श्रावण पूर्णिमा के दिन समाप्त होगा, जो 27 अगस्त को पड़ेगी। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त की सुबह शुरू होकर 12 अगस्त की रात तक रहेगी। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए सावन शिवरात्रि का व्रत 11 अगस्त मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी। सावन का महीना केवल व्रत और पूजा का ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति का भी समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है।
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, व्रत और साधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग पूजा-पाठ के साथ कई धार्मिक नियमों का पालन भी करते हैं। इन्हीं में एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या सावन में बाल, दाढ़ी और नाखून काटना सही है। पंडित आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इसे लेकर शास्त्रों में कुछ पारंपरिक मान्यताएं बताई गई हैं, जिनका पालन श्रद्धा के अनुसार किया जाता है।
(चक्षु-हिफी फीचर)



