गठबंधनों में खटास

राजनीतिक दलों में स्वार्थ के लिए गठबंधन किये जाते हैं और निजी हित टकराते हैं तो खटास भी पैदा होते देर नहीं लगती। इंडिया अलायंस नाम वाले विपक्षी दलों के गठबंधन में महाराष्ट्र में खटास पैदा होती दिख रही है। इतना ही नहीं महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा नीत महायुति के भीतर भी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। खासतौर पर भाजपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के बीच कई जिलों में तनाव बढ़ता दिख रहा है। ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर और नासिक समेत कई जगहों में दोनों दल अब ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी अपने दम पर चुनाव लड़ने की योजना बनाने लगे हैं। राज्य के ग्रामीण विकास और सोलापुर जिले के पालक मंत्री जय कुमार गोरे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक दिलीप माने सहित अन्य दूसरे दलों के नेताओं को बीजेपी में शामिल करना चाहते हैं। बीजेपी लगातार उन लोगों को पार्टी में ले रही है जिनका दलबदल का इतिहास रहा है। ऐसे दलबदलू नेताओं के खिलाफ बीजेपी के निष्ठावान कर्मठ, वफादार, नेताओं, कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने बिगुल बजा दिया है। इसकी शुरुआत सोलापुर जिसे से हुई है जहां बीजेपी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी का विरोध किया है। उन्होंने साफ किया कि दूसरे दलों के दलबदलू नेताओं को वे अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। विरोध करने वालों ने सोलापुर बीजेपी पार्टी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर नारेबाजी की। उधर, महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में 96 लाख फर्जी वोटर हैं, इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि पहले मतदाता सूची की सफाई करें फिर चुनाव कराएं।राज ठाकरे बोले, जब वोटरों की गिनती ही गलत हो, तो हमारी पार्टी के विधायक और सांसद आएंगे कैसे? पिछले साल राज्य विधानसभा चुनाव में मनसे को एक भी सीट नहीं मिली थी। ठाकरे ने कहा कि सत्ता में आने से पहले भाजपा भी निर्वाचन आयोग पर ऐसे ही आरोप लगाती थी। इस तरह गठबंधनों में खटास साफ साफ दिख रही है।
महाराष्ट्र में कांग्रेस का कहना है कि हम निकाय चुनाव में अकेले उतरना पसंद करेंगे। पार्टी का कहना है कि हम उस गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ना चाहेंगे, जिसमें राज ठाकरे होंगे। सीनियर कांग्रेस लीडर और मुंबई के पूर्व अध्यक्ष भाई जगताप ने गत 21 अक्टूबर को यह बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज ठाकरे के साथ चुनाव में नहीं रहना चाहेगी और न ही हम ऐसी स्थिति में उद्धव ठाकरे के साथ रहना चाहेंगे। हम अकेले लड़ना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के प्रभारी रमेश चेन्निथला के साथ नई गठित कमेटी ने मीटिंग की थी और तब यह मसला उठा था। फिलहाल इस बारे में कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है। वहीं शिवसेना नेता आनंद दुबे ने भी भाई जगताप को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई फैसला तो राहुल गांधी या फिर मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे या फिर शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे लेंगे। भाई जगताप किस हैसियत से ऐसा बोल रहे हैं। शिवसेना लीडर ने कहा कि हमें चुनौती मत दीजिए। हम शिवसेना हैं और पिछले चुनाव में हमने अकेले चुनाव लड़ा था और भाजपा को हराया था। हम अपने गठबंधन सहयोगियों का सम्मान करते हैं, लेकिन अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हैं।
कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी 2019 से सहयोगी हैं। इस गठबंधन की नींव एनसीपी नेता शरद पवार की ओर से 2019 में तब रखी गई थी, जब भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर विवाद हुआ था। तब उद्धव ठाकरे को सीएम बनाते हुए गठबंधन किया गया था। हालांकि 2022 में तब चीजें पलट गईं, जब एकनाथ शिंदे ने पार्टी में ही फूट कर दी और 40 विधायक लेकर खुद ही भाजपा के सहयोग से सीएम बन गए।हालांकि अब चीजें फिर से महाराष्ट्र में बदल रही हैं। उद्धव ठाकरे की अपने बिछड़े चचेरे भाई के साथ फिर से नजदीकी बढ़ती दिख रही है। तभी से सवाल उठ रहा है कि क्या वे गठबंधन का हिस्सा बनेंगे, जिसमें कांग्रेस और एनसीपी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि बीएमसी को एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय कहा जाता है। इसी को लेकर राज और उद्धव के बीच समझौते की चर्चाएं हैं। महा विकास अघाड़ी के दूसरे सहयोगी शरद पवार इस पर क्या प्रतिक्रिया देंगे, इसका फिलहाल इंतजार है।
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा नीत महायुति के भीतर खींचतान की संभावनाएँ काफी पहले से दिख रही थीं । एकनाथ शिन्दे सीएम देवेंद्र फडणवीस से दूरी बनाकर चल रहे थे। अब निकाय चुनाव को लेकर खटास सामने आने लगी है। भाजपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के बीच कई जिलों में तनाव बढ़ता दिख रहा है। ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर और नासिक समेत कई जगहों में दोनों दल अब ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी अपने दम पर चुनाव लड़ने की योजना बनाने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई जगह भाजपा नेताओं से मतभेद और अंतर्विरोध के चलते शिंदे गुट में नाराजगी बढ़ रही है। ठाणे नगर निगम में भाजपा नेता गणेश नाईक और संजय केलकर ने बिना गठबंधन के लड़ने की बात कही, जिसके बाद शिंदे सेना ने भी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। नवी मुंबई में भी दोनों दलों के बीच संबंध ठीक नहीं है। मीरा भयंदर नगर निगम के चुनाव में भी भाजपा और शिवसेना अकेले उतर सकती हैं।
कल्याण-डोंबिवली में विधायक गणपत गायकवाड़ से जुड़े गोलीकांड के बाद से ही दोनों दलों के रिश्तों में खटास कायम है। उल्हासनगर नगर निगम में शिवसेना की सत्ता है, लेकिन भाजपा विधायक कुमार आयलानी ने आयुक्त के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। बदलापुर नगर निगम में भाजपा के किसन कथोरे और शिंदे सेना के वामन म्हात्रे के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। सांगली में वैभव पाटिल के भाजपा में जाने से शिवसेना से संबंध खराब हो गए हैं।
नासिक में एनसीपी (अजित पवार) नेता व मंत्री छगन भुजबल और विधायक सुहास कांदे के बीच वाद-विवाद ने स्थिति और पेंचीदा बना दी है। सतारा में भी शिंदे गुट के नेता व मंत्री शंभूराज देसाई के खिलाफ लड़ने वाले सत्यजीत पाटनकर के भाजपा में शामिल होने से शिंदे गुट में नाराजगी की खबर है। रायगढ़ में स्नेहल जगताप के एनसीपी में आ जाने से शिंदे सेना से तनाव बढ़ गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जिला स्तर पर समीक्षा बैठकों के बाद ही गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा था कि आगामी निकाय चुनावों के लिए जहां भी संभव हो गठबंधन करें और जहां यह संभव न हो, वहां दोस्ताना मुकाबला सुनिश्चित करें। इसी महीने मुंबई में समीक्षा
बैठक के दौरान कोंकण क्षेत्र के
भाजपा कार्यकर्ताओं से फडणवीस ने कहा, ‘अगर गठबंधन नहीं भी होता
है, तो सहयोगी दलों के उम्मीदवारों
की कोई तीखी आलोचना नहीं होनी चाहिए।’
फिलहाल, यह साफ दिख रहा है कि महाराष्ट्र में महायुति के भीतर
भी दरार गहरी हो रही है और आने
वाले निकाय चुनावों में यह राजनीतिक समीकरण पर बड़ा असर डाल सकती है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



