कैलाश खेर ने पिता की मौत के बाद लिखा था..पिया घर आवेंगे

कैलाश खेर का सुपरहिट गाना ‘पिया घर आवेंगे’ हैं। दुल्हन की विदाई से लेकर बारात के स्वागत तक, यह गाना खुशी और उत्साह का प्रतीक बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गीत प्यार की कहानी नहीं, बल्कि एक पिता की मौत के दर्द से उपजा है?
कुछ गीत लिखते ही अमर हो जाते हैं और ये गीत उन्हीं में से एक है। कैलाश खेर के पिता पंडित मेहर सिंह खेर 2009 में इस दुनिया को अलविदा कह गए। इस गाने को उन्होंने पिता की मौत के बाद ही लिखा और कंपोज किया। यह गीत उनके एल्बम ‘चंदन में’ का हिस्सा है, जो कैलासा बैंड का तीसरा एल्बम था। गाने को आवाज दी थी कैलाश खेर, परेश कामथ और नरेश कामथ ने। गाने के बोल ‘हे री सखी मंगल गाओ री, धरती अम्बर सजाओ री’ हर दुल्हन को अपने पिया के मिलन की याद दिलाते हैं, लेकिन इसके पीछे कैलाश का व्यक्तिगत दुख और आध्यात्मिक जश्न छिपा है।
कैलाश खेर ने एक इंटरव्यू में इस गाने को लिखने के पीछे का दुख और सुख दोनों बयां किया था। उन्होंने कहा था कि 2009 के नवंबर में मेरे पिता का अचानक निधन हो गया। वह बताते हैं कि मेरी माँ का निधन पहले ही चुका था और फिर पिता भी छोड़कर चले गए। कैलाश खेर ने बताया था कि ये गाना फिर अपनी मां की खुशी के इजहार के चलते लिखा था, कि अब उनकी मां ने अपने पति का स्वागत स्वर्ग में कैसे किया होगा। ये गाना उनकी मां की सालों बाद स्वर्ग में अपने पति से मिलन को बताता है।’ कैलाश ने इसे ‘दूसरी शादी’ का रूप दिया, जहां आत्मा परमात्मा से मिलती है। गाने के बोल इसी भावना को दर्शाते हैं ‘चोक पुराओ, माटी रंगाओ, आज मेरे पिया घर आवेंगे’ यहां ‘पिया’ प्रेमी नहीं, बल्कि परमात्मा का प्रतीक है, और ‘घर आना’ मौत के बाद की घर वापसी। ‘हे री सखी मंगल गाओ री’ में मंगल का अर्थ शुभ गान है, लेकिन यह दुख की छाया में जश्न मनाने की बात करता है। कैलाश कहते हैं, ‘पूरी दुनिया को इस पल का जश्न मनाना चाहिए क्योंकि मेरा प्रिय जल्द ही यहां होगा।’ वह बताते हैं कि आज भी जब वे यह गाना सुनते हैं, तो आधे घंटे तक कोई और गाना नहीं सुनना चाहते, क्योंकि यह उन्हें पिता की यादों में डुबो देता है। (हिफी)



