संसद में राहुल गांधी का दिखा नया रूप

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आमतौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की आलोचना करते रहते हैं। यहां तक कि विदेश यात्रा मंे भी राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी सरकार की शिकायत करते नजर आते हैं। अभी हाल मंे रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भारत की यात्रा पर आये तो राहुल गांधी ने शिकायत की थी कि मोदी सरकार विदेशी मेहमानों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को नहीं मिलवाती है। इस प्रकार एक अति असंतुष्ट नेता की छवि राहुल गांधी की बन गयी है लेकिन गत 12 दिसम्बर को राहुल गाध्ंाी ने संसद मंे अपनी इस छवि को ताख पर रख दिया। वह ऐसे रूप मंे दिखे जो सुखद लगा। राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी सरकार से सहयोग का हाथ बढ़ाया। उन्होंने एक जनहित का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए सरकार और विपक्ष को एक साथ आने की अपील की। उन्हांेने प्रदूषण की समस्या को सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहने दिया और कहा यह पूरे देश के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा है। इस पर दलगत राजनीति छोड़कर सभी दलों को साथ बैठकर ठोस समाधान निकालना होगा। उम्मीद करनी चाहिए कि राहुल गांधी की इस चिंता मंे सरकार भी पक्ष-विपक्ष की नुक्ताचीनी नहीं निकालेगी। हालंािक राहुल गांधी
की इस अपील पर संसदीय कार्यमंत्री किरेण रिजिजू ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। राहुल गांधी का यह कहना उचित है कि प्रदूषण पर चर्चा दोषारोपण वाली नहीं होनी चाहिए।
लोकसभा में गत 12 दिसम्बर को नजारा बदला दिखा। राहुल गांधी ने लोकसभा में सरकार से मिल-जुलकर प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। राहुल ने कहा कि प्रदूषण गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इससे निपटने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना होगा। लोकसभा में शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रदूषण के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इससे निपटने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना होगा। राहुल गांधी ने कहा, हमें मिलकर प्लान बनाना होगा। आपस में बैठक करनी होगी। इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। एक-दूसरे पर आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। हमें डिटेल चर्चा करके ऐसा प्लान तैयार करना चाहिए कि अगले 5-10 साल में प्रदूषण से कैसे निपटें। उन्होंने जोर दिया कि प्रदूषण सिर्फ दिल्ली या किसी एक राज्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा संकट है।
राहुल गांधी ने प्रदूषण को बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए मीडिया से कहा, दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण की मैंने बात की। ये ऐसा मुद्दा है, जिसपर सारी पार्टियां एकमत हो सकती हैं। हमारा भविष्य, छोटे बच्चे हैं, उनका नुकसान हो रहा है। लोगों को कैंसर हो रहा है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस समस्या के हल पर बिना आरोप-प्रत्यारोप के चर्चा होनी चाहिए और देश को दिखाना चाहिए कि हम मिल कर प्रदूषण पर काम कर सकते हैं वंदे मातरम और एसआईआर पर चर्चा कटुतापूर्ण हुई। हमें दोनों बहस में उनकी धज्जियां उड़ा दी। राहुल बोले, यह ऐसा मुद्दा है जहां आप हमें गाली दें और हम आपको गाली दें। इसका कोई फायदा नहीं। देश को मैसेज जाना चाहिए कि हम साथ मिलकर समाधान ढूंढ रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि संसद में डीटेल चर्चा हो, हर शहर के लिए स्पष्ट प्लान बने, प्रधानमंत्री इस विषय पर खुद जानकारी दें।
कांग्रेस सांसद ने कहा, हमारे अधिकांश बड़े शहर जहरीली हवा की चादर में लिपटे हुए हैं। लाखों बच्चे फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। लोग कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और मुझे पूरा विश्वास है कि इस पर सरकार और हम सभी के बीच पूर्ण सहमति होगी। यह कोई वैचारिक मुद्दा नहीं है। इस सदन में सभी इस बात से सहमत होंगे कि वायु प्रदूषण और इससे हमारे लोगों को हो रहे नुकसान पर हम सभी सहयोग करना चाहेंगे। राहुल की इस अपील पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है और कब-कैसे चर्चा हो इस पर फैसला बिजनेस एडवाइजरी कमेटी कर सकती है। राहुल ने साफ कहा कि चर्चा दोषारोपण वाली न हो, बल्कि ऐसी हो जिसमें सोचा जाए कि लोगों की तकलीफ कैसे कम की जाए, भले ही प्रदूषण पूरी तरह खत्म न किया जा सके।
प्रदूषण का अर्थ है वायु, जल, मिट्टी या अन्य प्राकृतिक संसाधनों का हानिकारक पदार्थों या ऊर्जा से दूषित होना, जिससे सजीवों और पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके मुख्य प्रकार वायु, जल, भूमि, ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण हैं, जो मानवीय गतिविधियों (वाहनों, कारखानों, कचरे) और प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होते हैं और सांस की बीमारियाँ, हृदय रोग जैसी समस्याएं बढ़ाते हैं, जिन्हें कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और बेहतर कचरा प्रबंधन जरूरी है। पर्यावरण (हवा, पानी, मिट्टी) में अवांछित और हानिकारक पदार्थों (प्रदूषक) का मिलना है, जो जीवित प्राणियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ये प्रदूषक रासायनिक पदार्थ, धूल, धुआँ, ध्वनि, या ऊष्मा (गर्मी) जैसी ऊर्जा के रूप भी हो सकते हैं। वायु प्रदूषण वाहनों, कारखानों, धूल, और जंगल की आग से निकलने वाले धुएँ और गैसों (जैसे पीएच2.5, सल्फर डाइऑक्साइड) के कारण होता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। जल प्रदूषण उद्योगों और घरों से निकलने वाले कचरे और रसायनों से जल स्रोतों का दूषित होने से और भूमि/मृदा प्रदूषण कचरा, प्लास्टिक और रसायनों से मिट्टी का दूषित होना है।
साल 2022 में दुनिया का 8वां सबसे प्रदूषित देश भारत रहा। साल 2021 में भारत 5वें स्थान पर था। चिंता की बात यह भी है कि भारत के लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से सात गुना जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। स्विस संस्था की वल्र्ड एयर क्वॉलिटी रिपोर्ट में 2022 के प्रदूषण के आधार पर 131 देशों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 20 शहरों में 19 एशिया के हैं, जिनमें 14 भारतीय शहर हैं। टॉप 50 प्रदूषित शहरों में 39 भारत के हैं। भारत का सबसे प्रदूषित शहर राजस्थान का भिवाड़ी रहा। महानगरों में सबसे
प्रदूषित दिल्ली रही थी। ग्रीनपीस इंडिया के कैंपेन मैनेजर अविनाश चंचल का कहना है कि वायु प्रदूषण भारत के लिए बड़ा खतरा है। सरकार को
इसे कम करने के लिए तुरंत
ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उद्योगों, गाड़ियों से होने वाले
प्रदूषण को कम करने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है। इसके साथ
ही सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट
सिस्टम में निवेश करने की भी
जरूरत है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



