लेखक की कलम

पश्चिम बंगाल में मस्जिद की राजनीति

मंदिर और मस्जिद अब राजनीति के प्रमुख हथकंडे बन गये है। इसी साल नवम्बर मंे सम्पन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव मंे सीतामढ़ी मंे माता जानकी के मंदिर निर्माण की चर्चा भी जोर शोर से हुई थी। अब पश्चिम बंगाल मंे अगले साल ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। वहां पर बाबरी मस्जिद के निर्माण का मामला प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। गत 6 दिसम्बर को मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पार्टी से निष्कासित कर दिया है लेकिन मुख्य विपक्षी दल भाजपा अब भी इस मस्जिद के पीछे ममता बनर्जी की सहमति बता रही है। उधर, 12 दिसम्बर शुक्रवार को जुमे की नमाज के दिन मस्जिद निर्माण वाले स्थल पर हजारों की भीड़ उमड़ी। इनके लिए खाने का इंतजाम भी किया गया था। मस्जिद निर्माण को अब उन्माद का रूप दिया जा रहा है। नमाजियों के लिए खाना पकाने वाले कह रहे थे कि यह बहुत ही सबाब का कार्य है। जाहिर है कि हुमायूं कबीर ने मस्जिद निर्माण को जिहाद का रूप दे दिया है और ममता बनर्जी की सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गयी है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा मंे यह मस्जिद बनायी जा रही है जहां मुसलमानों की बड़ी आबादी है। हुमायूं कबीर ने युवाओं के साथ ही क्षेत्र के किसानों को भी अपने साथ जोड़ लिया है। गत 12 दिसम्बर को पड़ोस के पलाशी इलाके से सैकड़ों किसान बेलडांगा पहुंचे थे। मस्जिद के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। मजेदार बात यह कि भाजपा इसके लिए टीएमसी को जिम्मेदार बता रही है जबकि ममता बनर्जी कहती हैं कि यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है। ध्यान रहे 2021 के विधानसभा चुनाव मंे यहां टीएमसी का प्रभाव देखा गया था।
हुमायूं कबीर के मुर्शिदाबाद ने बेलडांगा के जिस प्लॉट पर बाबरी मस्जिद की नींव रखी गई है, वहां 12 दिसम्बर को जुम्मे की पहली नमाज में हजारों की भीड़ उमड़ी। नमाज के बाद लोगों को दावत का इंतजाम किया गया है। करीब एक हजार लोगों के लिए खाना बनाया गया। जुमे के नमाज का जैसे ही वक्त हुआ सैकड़ों की संख्या में लोग प्रस्तावित मस्जिद साइट पर जुटे। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि हरी सरसों की खेतों को पार करते हुए लोग मस्जिद वाली साइट पर जा रहे थे। लाउडस्पीकर से लोगों को रास्ता बताया जा रहा था। आयोजकों ने नमाजियों के खाने का भी इंतजाम किया। खाना बनाने में जुटे एक शख्स ने बताया, लोगों को खिलाकर हमको सवाब मिलेगा। गौरतलब है कि 6 दिसंबर को कबीर ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। इस दौरान उसके सैकड़ों समर्थकों की भीड़ वहां जुटी थी। पड़ोसी पलाशी इलाके से सैकड़ों किसान बेलडांगा आए थे। कबीर की प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के लिए लोग जमकर दान दे रहे हैं। बेलडांगी बाबरी मस्जिद के लिए बक्से पैसों से भर जा रहे हैं। आयोजकों ने पैसों के बॉक्स के अलावा क्यू आर कोड भी लगा रखे थे। गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद में कबीर के प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के बाद पूरे देश में काफी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आई हैं। बीजेपी ने इसे लेकर ममता बनर्जी को घेर लिया तो टीएमसी ने इसके पीछे बीजेपी का पैसा बताया। हालांकि, कबीर ने कहा कि हमने लोगों से दान मांगा है और लोग हमें पैसे दे रहे हैं। उन्होंने फेसबुक पर दान के पैसों को गिनते वीडियो भी डाला था।
मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बन रही है। यह अयोध्या में ध्वस्त की गई बाबरी मस्जिद जैसी होगी, जिसे तृणमूल कांग्रेस से सस्पेंड किए गए विधायक हुमायूं कबीर बना रहे हैं। भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर 22 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान करेंगे। उनकी पार्टी असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएआईएम से गठबंधन करेगी। हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में चुनिंदा 135 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद वह किंगमेकर बनेंगे। इसका दूसरा पहलू भी है, हुमायूं कबीर अगर किंगमेकर बने तो बीजेपी बंगाल में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी। अभी हुमायूं कबीर का किंगमेकर बनने का दावा पहली नजर में राजनीतिक स्टंट नजर आ रहा है। मगर उन्होंने मस्जिद, मुसलमान और ओवैसी का जो पॉलिटिकल कॉकटेल बनाया है, उससे पश्चिम बंगाल में नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
हुमायूं कबीर इस दावे के परिप्रेक्ष्य में 2021 के चुनाव परिणाम को जानना जरूरी है। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है। पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 215 सीटें मिली थीं, जो बहुमत से 67 सीटें ज्यादा हैं। पहली स्थिति यह बनती है कि टीएमसी को 100 के करीब सीटों का नुकसान हो और हुमायूं कबीर 40-45 सीटें हासिल करें तभी वह सत्ता में निर्णायक होंगे। अगर टीएमसी को इतना भारी नुकसान हुआ तो निश्चित तौर से बीजेपी को 50 से अधिक सीटों का फायदा होगा। बीजेपी 77 से बढ़कर 125-130 के आसपास पहुंचकर नंबर वन पार्टी बन जाएगी जो अभी के माहौल में सामान्य तौर पर संभव नहीं है। ऐसा तभी हो सकता है, जब मुस्लिम वोटर पूरी तरह हुमायूं कबीर के पक्ष में जाएं और बीजेपी को हिंदू बाहुल्य वाले 165 सीटों पर बड़ी जीत मिले।
बिहार चुनाव के बाद असदुद्दीन ओवैसी ऐसे मुस्लिम नेता के तौर पर उभरे हैं, जिनकी स्वीकार्यता हैदराबाद के बाहर अन्य राज्यों में बढ़ी है। लेकिन 2011 से बंगाल के मुस्लिम वोटर हर चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के पाले में रहे हैं। बीजेपी के खिलाफ सशक्त विपक्ष को समर्थन करने के ट्रेंड ने मुसलमानों को पहले ही लेफ्ट-कांग्रेस से दूर कर दिया है। पश्चिम बंगाल के गत विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने 6 सीटों पर कैंडिडेट उतारे थे, मगर मुसलमान टीएमसी के पक्ष में बने रहे। अब हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद वाला एलिमेंट डालकर नया प्रयोग किया है। हुमायूं कबीर को उम्मीद है कि 294 सदस्यों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा का परिणाम 2026 में टीएमसी के पक्ष में एकतरफा नहीं रहेगा। इस कारण उन्हें किंगमेकर बनने का मौका मिलेगा। दरअसल, हुमायूं कबीर का कैलकुलेशन बंगाल में मुस्लिम आबादी और मुसलमान बाहुल्य सीटों के आंकड़े के हिसाब
से फिट बैठता है, बशर्ते वोटों का ध्रुवीकरण हो जाए। पश्चिम बंगाल
में 30 फीसदी मुसलमानों की आबादी माना जाती है और करीब 120-126 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक
माने जाते हैं। 50 फीसदी से ज्यादा आबादी वाली 45 विधानसभा सीटें हुमायूं कबीर के उम्मीदों को मजबूत करती है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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