लेखक की कलम

2025 में भाजपा व एनडीए की बल्ले-बल्ले

वर्ष 2025 का अंतिम सूरज जब ढलने वाला था, तब विभिन्न क्षेत्रों में इस वर्ष के प्रभाव का आकलन किया जाना स्वाभाविक है। बीत गया, सो बीत गया, कहने से काम नहीं चलता। दरअसल, इतिहास हमेशा कुछ न कुछ सीखने की नसीहत देता है। सियासत की नजर से देखें तो इस बीते वर्ष ने भाजपा ओर एनडीए को झोली भर-भर कर दिया है। उससे पहले अर्थात् 2024 मंे लोकसभा चुनाव ने भाजपा को थोड़ा निराशा किया था। इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार केन्द्र मंे सरकार बन गयी। इसके बाद 2025 का सूरज निकला और जगह-जगह कमल खिलने लगा। अभी अंतिम महीने मंे भाजपा को बिहार विधानसभा के साथ महाराष्ट्र, अरुणाचल और गोवा के निकाय चुनावांें में जिस तरह सफलता मिली है। उससे अगले साल की खुशियों का भी संकेत मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इकबाल 2025 के समापन तक भरपूर कायम रहा है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन 2025 बीजेपी और एनडीए के लिए शानदार रहा है। मौजूदा समय में 21 राज्यों में बीजेपी की अगुआई वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में है। वहीं, एक साल पहले 20 राज्यों में एनडीए गठबंधन की सरकार थी। 2025 में कुल दो चुनाव हुए और दोनों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। पहले दिल्ली में बीजेपी ने आम आदमी पार्टी को सत्ता से बेदखल करते हुए 27 साल बाद सरकार में वापसी की। इसके बाद बिहार में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करते हुए अपनी पकड़ मजबूत की और एनडीए गठबंधन को बड़ी जीत दिलाई। उससे पहले 2024 का साल बीजेपी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में उसे सरकार बनाने के लिए नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी के साथ की जरूरत थी। केंद्र में हालात अभी भी जस के तस हैं, लेकिन राज्यों में बीजेपी की मजबूत पकड़ एनडीए सरकार को और ज्यादा मजबूत करती है। इसके बाद 2025 में देश के सियासी नक्शे में सबसे अहम बदलाव यह हुआ कि दिल्ली में एक दशक बाद आम आदमी पार्टी सत्ता से बेदखल हुई और 27 साल बाद बीजेपी सत्ता में लौटी। देश के नक्शे में दिल्ली बेहद छोटा नजर आता है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता हासिल करना कितना अहम है। यह सभी पार्टियां बखूबी जानती हैं। इसी वजह से यह इस साल बीजेपी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। वहीं, भ्रष्टाचार के आरोप में घिरी आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी हार रही। कांग्रेस के लिए यह साल बेहद निराशाजनक रहा। दिल्ली और बिहार दोनों राज्यों में पार्टी का वोट प्रतिशत बेहद कम था और सीटें न के बराबर रहीं। ऐसे में लगभग 45 साल तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस के लिए वापसी की राह और मुश्किल होती नजर आ रही है। बिहार में पहले से ही एनडीए सरकार थी और अभी भी एनडीए ही सत्ता में है, लेकिन पहले आरजेडी की सीटें सबसे ज्यादा थीं और अब बीजेपी के पास सबसे ज्यादा सीटें हैं।
अगले साल 2026 में चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से असम और केंद्र शासित प्रदेश में एनडीए की सरकार है। केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में बीजेपी सत्ता में नहीं है। अगर इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी या एनडीए सत्ता हासिल करता है तो बीजेपी इतिहास रच देगी। यह पहला मौका होगा, जब 22 राज्यों में बीजेपी सत्ता में होगी। इससे पहले 2018 में बीजेपी 21 राज्यों में सत्ता में रह चुकी है और मौजूदा समय में भी पार्टी 21 राज्यों में सत्ता में है।
उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा, मेघालय, असम, मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, पुडुचेरी और गोवा में भाजपा अथवा उसके गठबंधन की सरकार है।
2025 का साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी कि एनडीए के लिए राजनीतिक दृष्टि से बेहद सफल रहा। दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में मिली जीत ने बीजेपी के नेतृत्व वाले इस गठबंधन का आत्मविश्वास बढ़ाया है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाकर एक दशक से अधिक समय बाद सत्ता में वापसी की, जबकि बिहार में बीजेपी ने जेडीयू के साथ मिलकर सत्ता बरकरार रखी। दोनों ही राज्यों में आए ऐतिहासिक चुनावी नतीजों के बाद अब भाजपा की निगाह 2026 में होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों पर टिकी है।दिल्ली और बिहार दोनों ही चुनावों के नतीजे भाजपा और एनडीए के लिए अलग-अलग मायनों में महत्वपूर्ण रहे। दिल्ली में बीजेपी की जीत को शहरी मतदाताओं के बीच संगठन की पकड़ मजबूत होने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, बिहार में गठबंधन राजनीति की जटिलताओं के बावजूद सत्ता में बने रहना यह दिखाता है कि बीजेपी क्षेत्रीय दलों के साथ संतुलन
साधने में सफल रही है। इन दोनों जीतों ने यह संदेश दिया कि
एनडीए राष्ट्रीय और प्रांतीय, दोनों स्तरों पर चुनावी रणनीति गढ़ने और फिर उन्हें जमीनी स्तर पर उतारने में सक्षम है।
आने वाले साल 2026 में जिन 5 राज्यों यानी कि असम, पश्चिम बंगाल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनका राजनीतिक महत्व अलग-अलग कारणों से है। इनमें से कुछ राज्यों में एनडीए पहले से सत्ता में है, तो कुछ ऐसे हैं जहां वह कभी भी सत्ता में नहीं आई। इन चुनावों के नतीजे न केवल राज्यों की भविष्य की राजनीति तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एनडीए की दिशा और दशा का संकेत भी देंगे। इन पांचों राज्यों के हालात पर गौर करें तो यही कहा जाएगा कि 2026 बीजेपी के साथ-साथ एनडीए के लिए अहम साल है। बीजेपी जहां इस बार पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज करना चाहेगी वहीं गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर तमिलनाडु में भी परचम लहराने पर उसकी नजर होगी। केरल में बीजेपी या एनडीए अभी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन फिर भी उसकी कोशिश सूबे की सियासत में बड़ा खिलाड़ी बनने की होगी। असम और पुदुचेरी में एनडीए की कोशिश एक बार फिर अपनी सत्ता बरकरार रखने की होगी। केरल मंे राजधानी तिरुवनंतपुरम मंे भाजपा का मेयर बनना 2026 का शुभ संकेत माना जा रहा है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

 

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