
दिग्विजय सिंह का जगा प्रसुप्त ज्ञान
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को अचानक ऐसा ज्ञान मिल गया जिससे कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की संगठनात्मक शक्ति की सराहना की है। वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी उनका समर्थन किया और कहा संघ का अनुशासन अनुकरणीय है। संघ की तारीफ करने पर पार्टी में खींचतान शुरू हो गई है। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता आरएसएस की आलोचना करते रहते हैं। इतना ही नहीं संघ पर प्रतिबंध लगाने की भी कांग्रेस के अंदर से मांग होती रहती है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गत 26 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी सीडब्ल्यूसी की बैठक शुरू होने से ठीक पहले सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुरानी तस्वीर साझा की है, जिसमें नरेन्द्र मोदी लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे नजर आते हैं। दिग्विजय सिंह ने तस्वीर के साथ लिखा, आर एस एस का जमीनी स्वयंसेवक और बीजेपी का जमीनी कार्यकर्ता नीचे बैठकर सीएम और पीएम बना। यह संगठन की शक्ति है। इस पोस्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या दिग्विजय सिंह ये कहकर कांग्रेस नेतृत्व को अप्रत्यक्ष रूप से नसीहत दे रहे हैं? क्या यह कांग्रेस संगठन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कैडर की कमी पर कटाक्ष है? यह सवाल कांग्रेस के भीतर और बाहर तेजी से उठ रहा है।दिलचस्प यह है कि दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे के साथ नरेंद्र मोदी को भी टैग किया है, जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ गया है।
इस पोस्ट की सबसे अहम बात यह है कि दिग्विजय सिंह ने यह पोस्ट तब किया, जब सीडब्ल्यूसी की बैठक चल रही थी और वे खुद भी बैठक में मौजूद थे। यह समय और संदेश दोनों ही इस पोस्ट को राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बना देते हैं। इससे एक हफ्ते पहले 19 दिसंबर को दिग्विजय सिंह ने एक पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को सीधा संदेश देते हुए कहा था कि कांग्रेस पर ध्यान दीजिए। हमें व्यावहारिक विकेंद्रीकरण कार्यशैली की जरूरत है। मुझे उम्मीद है आप ऐसा करेंगे लेकिन समस्या यह है कि आपको मनाना आसान नहीं है। एक्स पर पोस्ट करते हुए दिग्विजय ने लिखा, राहुल जी, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर आपकी राय बिल्कुल सटीक है लेकिन अब कृपया कांग्रेस पर भी ध्यान दें। चुनाव आयोग की तरह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भी सुधारों की आवश्यकता है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा करने पर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, हमारा 140 वर्षों का इतिहास है और हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम स्वयं से भी सीख सकते हैं। किसी भी पार्टी में अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह द्वारा आर एस एस की संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह भी चाहते हैं कि कांग्रेस संगठन मजबूत हो और उसमें अनुशासन बढ़े। किसी भी पार्टी में अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है।
इस पोस्ट के बारे में पत्रकारों ने जब ये पूछा कि इसका क्या मतलब है, कांग्रेस संगठन में क्या वो सुधार चाहते हैं तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि वो आरएसएस और बीजेपी के घोर विरोधी हैं। उन्होंने केवल संगठन की तारीफ की है।दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जो तस्वीर साझा की है वो पुरानी है। उस समय नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बने थे। तस्वीर में एक सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी बीजेपी के तत्कालीन वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आगे बैठे दिख रहे हैं। इस तस्वीर को साझा करते हुए दिग्विजय सिंह ने लिखा, क्वोरा साइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ, बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। ये संगठन की शक्ति है। माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह ने इसके जरिये कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पार्टी संगठन में बदलाव करने का संदेश दिया है।
हालांकि दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा कि उनका मकसद कांग्रेस संगठन की आलोचना करना नहीं था, उन्हें जो कहना था वो उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कह दिया है। उन्होंने कहा, संघ पूरे तरीके से संविधान और देश के कानून को नहीं मानते हैं, जो गैर रजिस्टर्ड संस्था है जिस पर कोई कानून लागू नहीं होता है लेकिन उनकी संगठन क्षमता का प्रशंसक मैं इसलिए हूं क्योंकि एक ऐसी संस्था जो रजिस्टर्ड नहीं है वो इतनी शक्तिशाली हो गई कि देश के प्रधानमंत्री लाल किले से कहते हैं कि ये विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ है। क्या कांग्रेस के संगठन की क्षमता उन्हें कम दिखाई दे रही है? इस सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसमें सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन को सुधार की गुंजाइश रखनी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा, कांग्रेस पार्टी मूल रूप से एक आंदोलन की पार्टी है लेकिन अब किसी आंदोलन को वोटों में तब्दील करने में हम कमजोर पड़ जाते हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी कहती हैं कि दिग्विजय सिंह ने सीडब्ल्यूसी की बैठक में पार्टी संगठन में बदलाव को लेकर कुछ नहीं कहा। वैसे 19 दिसंबर को भी दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी से कहा था कि वो सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ कांग्रेस संगठन पर भी ध्यान दें। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद कांग्रेस
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पार्टी मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत-जी रामजी करने का विरोध सड़कों पर उतरकर करेगी।खड़गे ने कहा, मनरेगा योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का नाम हटाना अपमान है। डॉ. मनमोहन सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी जी ने काम के अधिकार पर आधारित कानून बनाया था। कांग्रेस सरकार ने जनता को अधिकार दिया, लेकिन मोदी सरकार सिर्फ नाम बदलने पर तुली है। हम गरीबों के अधिकार को बचाने के लिए देशव्यापी आंदोलन करेंगे और इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे। वर्किंग कमेटी की बैठक में खड़गे ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट न हटें। वहीं पार्टी नेता राहुल गांधी ने कहा, मनरेगा का नाम बदलने का फैसला कैबिनेट और राज्यों से बिना पूछे ही लिया गया है। मोदी वन मैन शो चला रहे हैं। मोदी जी जो करना चाहते हैं करते हैं। इसका पूरा फायदा दो-तीन अरबपतियों को मिल रहा है। इसका नुकसान ग्रामीण इलाकों को हो रहा है। इस प्रकार मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



