अयोध्या की तीन मुख्य घटनाएं

अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के नव्य-भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्ष गांठ 2025 के अंतिम दिन अर्थात 31 दिसम्बर को सम्पन्न हुई। यह प्रतिष्ठा द्वादशी इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण रही क्योंकि साल में दो बार इसका आयोजन हुआ। पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था। इसी के अनुसार वर्ष 2025 में पहले जनवरी में प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ मनायी गयी थी और 31 दिसंबर को पुनः इसी तिथि पर आयोजन हुआ। इस समारोह में केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से उपस्थित थे। योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर तीन मुख्य घटनाओं का उल्लेख किया। ये तीन मुख्य घटनाएं पिछले 11 वर्षों की हैं जब से केन्द्र कमें भाजपा की सरकार आयी। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के संघर्ष को भी याद किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संदेश भेजा था। इस संदेश में असंख्य रामभक्तों के संघर्ष को याद किया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जिस तरह निसिचर हीन करौं महि… की प्रतिज्ञा की थी उसी तरह योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को अपराधी विहीन करने का संकल्प लिया था। यूपी की पुलिस ने 2017 से 2025 तक का आंकड़ा जारी किया है जो बताता है कि इस अवधि में कितने अपराधी मारे गये। योगी आदित्यनाथ ने 20 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश की कमान संभाली थी।
अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म से ऊपर कोई नहीं है। कुछ लोगों ने अयोध्या से षड्यंत्र किया। अयोध्या में राम मंदिर परिसर में प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ये बातें कहीं। सीएम योगी ने कहा, पिछले 11 वर्षों में पीएम मोदी के यशस्वी नेतृत्व में उन तीन अहम घटनाओं को विस्मृत नहीं किया जा सकता। याद करिए 5 अगस्त 2020 जब देश का कोई पीएम स्वयं अयोध्या धाम पधारा और 500 वर्षों के कलंक को समाप्त करते हुए अपने करकमलों से राम जन्मभूमि के कार्यक्रम को संपन्न किया था।
सीएम योगी ने आगे कहा, दूसरी तारीख 22 जनवरी 2024 को पीएम मोदी स्वयं अयोध्या पधारे और श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को अपने कर कमलों से संपन्न किया। तीसरा जब अभी 25 नवंबर को विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं आए और राम मंदिर के मुख्य शिखर पर उन्होंने सनातन धर्म की
ध्वजा को प्रतिष्ठित करके सनातन से ऊपर कोई नहीं का संदेश दिया। सनातन की पताका यूं ही लहराती रहेगी, यह संदेश पूरी दुनिया को दिया। सीएम योगी ने कहा, अयोध्या ने जो संघर्ष देखा था.. पिछली सरकार ने अयोध्या को लहूलुहान करने का काम किया था। उन्होंने शासन में आतंकी हमले कर अयोध्या को लहूलुहान करने का प्रयास हुआ था। लेकिन प्रभु की कृपा और बजरंग बली जहां की रक्षा स्वयं कर रहे हों वहां तो भूत पिशाच निकट नहीं आवे.. महावीर जब नाम सुनावे.. यहां तो हनुमान जी स्वयं विराजमान हैं, फिर कोई आतंकी यहां कैसे प्रवेश कर जाता।
अयोध्या में रामलला मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों के लिए संदेश दिया है, जिसमें 5 सदियों के संघर्ष की गूंज है। उनके पोस्ट में उस भारत की तस्वीर भी झलकती है, जहां संस्कार, आस्था और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे से जुड़ते नजर आते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पीएम मोदी ने ये भी कामना की कि हर भारतवासी के दिल में समर्पण और करुणा की भावना बढ़े। पीएम मोदी ने पोस्ट किया, अयोध्या जी की पावन धरा पर आज रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ मनाई जा रही है। ये वर्षगांठ हमारी आस्था और संस्कारों का एक दिव्य उत्सव है। इस पावन-पुनीत अवसर पर देश-विदेश के सभी रामभक्तों की ओर से प्रभु श्री राम के चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन और वंदन! समस्त देशवासियों को मेरी अनंत शुभकामनाएं। अपने अगले पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा, भगवान श्री राम की असीम कृपा और आशीर्वाद से असंख्य रामभक्तों का पांच सदियों का संकल्प साकार हुआ है। आज रामलला अपने भव्य धाम में पुनः विराजित हैं और इस वर्ष अयोध्या की धर्म ध्वजा, रामलला की प्रतिष्ठा द्वादशी की साक्षी बन रही है। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले महीने मुझे इस ध्वजा की पुण्य स्थापना का सुअवसर मिला।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी लिखा, मेरी कामना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम की प्रेरणा हर देशवासी के हृदय में सेवा, समर्पण और करुणा की भावना को और प्रगाढ़ करे, जो समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सशक्त आधार भी बने। जय सियाराम!
गौरतलब है कि अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 2 साल पहले 22 जनवरी 2024 को संपन्न हुई थी। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पीएम मोदी मुख्य यजमान के तौर पर शामिल हुए थे और उसी दिन रामलला अपने भव्य मंदिर के गर्भगृह में विराजित हुए थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धर्म और कर्म साथ-साथ चलता है। मर्यादा की स्थापना के लिए कानून-व्यवस्था का कठोर होना भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने इस बात की जानकारी साझा की है कि साल 2025 में उत्तर प्रदेश में कितने अपराधियों का एनकाउंटर किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि साल 2017 से अब तक राज्य में कितने एनकाउंटर हुए। इन एनकाउंटरों में कितने अपराधी मारे गए और कितने घायल हुए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया है कि साल 2025 में यूपी में पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान 48 बदमाश मारे गए हैं। बता दें कि ये आंकड़ा बीते 8 साल में सबसे ज्यादा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डीजीपी ने बताया कि साल 2025 में भी पुलिस कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पूरी तरह से एक्टिव रही। 2025 में राज्य में कुल 2739 मुठभेड़ हुए हैं। इनमें 48 अपराधी मारे गए हैं। इसके साथ ही 3153 अपराधी जख्मी भी हुए हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में पुलिस के साथ कुल 16,284 एनकाउंटर हुए हैं। पुलिस की ओर से इन मुठभेड़ों में 266 अपराधियों को ढ़ेर किया गया है। इसके साथ ही 10,990 बदमाश घायल भी हुए हैं। राजीव कृष्ण ने बताया है कि यूपी पुलिस राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ने इस दौरान माफिया अपराधियो की 4137 करोड़ रुपये की संपत्ति या तो जब्त की गई या बुल्डोजर से ध्वस्त की गई है। इसके अलावा धार्मिक स्थलों से 1,17,145 लाउडस्पीकर हटवाए गए हैं। वहीं, 1,85,468 लाउडस्पीकरों की आवाज कम की गई है। शासन माफिया व अपराधियों पर जीरो टालरेंस के तहत कार्रवाई कर रहा। प्रदेश के सूचीबद्ध माफिया की बात करें तो इनमें पांच माफिया फरार हैं, जिनकी पुलिस लंबे समय से तलाश कर रही है। जबकि बृजेश सिंह समेत बीस माफिया जमानत पर बाहर हैं। पुलिस उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही उनके मुकदमों में और प्रभावी पैरवी की रणनीति के तहत कदम बढ़ा रही है। चिन्हित 66 माफिया की सूची में शामिल रहे अतीक अहमद की पुलिस अभिरक्षा में हत्या हो चुकी है और पुलिस अभिरक्षा से भाग निकले आदित्य राणा उर्फ रवि मुठभेड़ में मारा गया था। भू-माफियाओं द्वारा सरकारी एवं निजी सम्पत्तियों पर अवैध कब्जा करने की शिकायतें शासन एवं प्रशासन स्तर पर प्राप्त होती रहती हैं। ऐसे अतिक्रमणकर्ताओं, भूमाफियाओं को चिन्हित कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही किया जाना आवश्यक है,
ताकि जनमानस में सुरक्षा की भावना उत्पन्न हो। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



