लेखक की कलम

मोदी व योगी ने दी यूपी को नई दिशा व दशा

उत्तर प्रदेश का अतीत और वर्तमान दो अलग-अलग राजनीतिक संस्कृतियों की कहानी कहता है। एक ओर वे पूर्ववर्ती सरकारें थीं, जिनके लिए सत्ता का अर्थ जातीय गणित, तुष्टिकरण और अपराधियों से समझौता था, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का वह शासन है, जिसमें केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ राष्ट्रनीति और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कठोर, अनुशासित और परिणामकारी प्रशासन उत्तर प्रदेश की दिशा और दशा दोनों को बदल रहा है।
पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में उत्तर प्रदेश भय के साये में जीता था। माफिया खुलेआम सत्ता के संरक्षण में फलते-फूलते थे, थाने और तहसीलें दलालों के अड्डे बन चुकी थीं और आम नागरिक न्याय की उम्मीद छोड़ चुका था। कानून-व्यवस्था राजनीतिक सौदेबाजी का विषय थी। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के लागू किया। आज अपराधी सत्ता से नहीं, कानून से डरता है- और यही बदलाव उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
पूर्ववर्ती सरकारों ने गरीब को वोट बैंक समझा, नागरिक नहीं। योजनाएँ घोषणाओं तक सीमित रहीं, लाभ बिचैलियों में बँट गया और पात्र व्यक्ति लाइन में खड़ा रह गया। मोदी की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर नीति और योगी की सख्त प्रशासनिक निगरानी ने इस लूटतंत्र को ध्वस्त कर दिया। उज्ज्वला, प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, हर घर जल और मुफ्त राशन जैसी योजनाएँ आज उत्तर प्रदेश में किसी नेता की कृपा नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार बन चुकी हैं। यह अंत्योदय का वह स्वरूप है, जिसे पूर्ववर्ती सरकारें कभी समझ ही नहीं सकीं।
आर्थिक मोर्चे पर भी अंतर दिन और रात जैसा है। जिन सरकारों ने उत्तर प्रदेश को “बीमारू राज्य” की पहचान दिलाई, वे निवेश, उद्योग और रोजगार की बात करने का नैतिक अधिकार खो चुकी हैं। असुरक्षा, भ्रष्टाचार और नीति-शून्यता के कारण निवेशक उत्तर प्रदेश से दूर भागते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीतियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमीन पर उतारकर उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक गलियारे और मेडिकल हब में परिवर्तित किया। आज वही उत्तर प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है- यह परिवर्तन संयोग नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है।
सांस्कृतिक चेतना के प्रश्न पर पूर्ववर्ती सरकारों की भूमिका और भी चिंताजनक रही। आस्था को या तो राजनीतिक अपराधबोध से देखा गया या तुष्टिकरण के तराजू में तौला गया। मंदिरों, परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को सत्ता के लिए असुविधाजनक माना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता ने इस हीन भावना को समाप्त किया। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास और मथुरा-वृंदावन की गरिमा की पुर्नस्थापना- यह स्पष्ट संदेश है कि उत्तर प्रदेश अब अपनी सभ्यता पर शर्मिंदा नहीं, बल्कि गर्व करता है।
पूर्ववर्ती सरकारों में प्रशासनिक ढिलाई, भ्रष्टाचार और जवाबदेही का अभाव सामान्य बात थी। फाइलें चलती थीं, काम नहीं। आज योगी सरकार में प्रशासन अनुशासन, समयबद्धता और परिणाम से पहचाना जाता है। डिजिटल शासन, पारदर्शी प्रक्रियाएँ और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई- यह वही बदलाव है, जिसकी कल्पना भी पहले असंभव लगती थी।
सबसे बड़ा अंतर राजनीतिक नीयत का है। पहले सत्ता का उद्देश्य कुर्सी बचाना था, आज सत्ता का उद्देश्य प्रदेश बनाना है। “जो कहा, वही किया”- यह कथन केंद्र सरकार व उत्तर प्रदेश में अब नारा नहीं, बल्कि जनअनुभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतिगत स्पष्टता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निर्भीक कार्यशैली ने यह सिद्ध कर दिया है कि मजबूत इरादों वाली सरकार ही बड़े परिवर्तन ला सकती है।
भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश की प्रदेश मंत्री होने के नाते मैं पूरे राजनीतिक उत्तरदायित्व के साथ यह कहती हँ। कि पूर्ववर्ती सरकारों ने उत्तर प्रदेश को भय, भ्रम और पिछड़ेपन की राजनीति दी, जबकि भाजपा ने सुरक्षा, सुशासन और स्वाभिमान दिया है। यह अंतर केवल सरकारों का नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं का है- एक जो सत्ता के लिए समाज को बाँटती है और दूसरी जो राष्ट्रहित में समाज को जोड़ती है। मोदी के नेतृत्व और योगी के शासन में उत्तर प्रदेश अब पीछे देखने वाला नहीं, बल्कि देश को दिशा देने वाला राज्य बन चुका है। प्रदेश मंत्री भाजपा, उत्तर प्रदेश

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