योगी का ईज आफ लिविंग विजन

कहते हैं स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। काया अर्थात् शरीर निःरोग है तभी सुख और संतुष्टि मिलती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिनों (18 जनवरी) यूपी हेल्थ टेक काॅन्क्लेव में बताया कि उत्तर प्रदेश चिकित्सा सेवा और तकनीक का हब बनेगा। इसी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईज आफ लिविंग विजन को भी साकार किया जाएगा। चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीक का अधिकतम उपयोग जरूरी है। रोबोट अब सर्जरी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि स्क्रीनिंग गांव से शुरू हो ताकि लोगों को चिकित्सा के लिए 40-50 किमी. न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि हेल्थ वेलनेस सेंटर पर ही तय हो जाए कि मरीज को कैसी चिकित्सा की जरूरत है। योगी ने इस अवसर पर निवेशकों और उद्योग जगत को भी आमंत्रित किया और बताया कि प्रदेश में बेहतर इन्फ्रा स्ट्रक्चर, सुरक्षा और सिंगल विंडो सिस्टम मौजूद है।
सरकार समयबद्ध स्वीकृति और हर स्तर पर सहयोग भी देगी। इस प्रकार उत्तर प्रदेश हेल्थ केयर और फार्मा क्षेत्र में दुनिया का प्रमुख केन्द्र बन जाएगा। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थ केयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों का भार वहन करता है अर्थात् अपने प्रदेश की 25 करोड़ आबादी के साथ दूसरे राज्य के लेागों को भी स्वास्थ्य सेवा दे रहा है। उन्होंने कहा यूपी सरकार सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती है। प्रदेश में साढ़े पांच करोड़ परिवारों को आयुष्मान कार्ड जारी किये जा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गत 18 जनवरी को स्वास्थ्य और तकनीक के महासंगम यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव का हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट करार दिया। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि यूपी अब केवल बीमारियां ठीक करने वाला राज्य नहीं, बल्कि मेडिकल टेक्नोलॉजी और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। सीएम योगी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए कहा कि यूपी की आबादी भले ही 25 करोड़ है, लेकिन हमारा स्वास्थ्य ढांचा पड़ोसी राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड) और पड़ोसी देश नेपाल सहित लगभग 35 करोड़ लोगों की चिकित्सा आवश्यकताओं का भार उठा रहा है। हम इस जिम्मेदारी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभा रहे हैं। सीएम योगी ने पिछले पौने नौ वर्षों (2017 से अब तक) के बदलावों को आंकड़ों के जरिए पेश किया। उन्होंने बताया मेडिकल कॉलेज 2017 से पहले यूपी में कुल 40 (सरकारी व निजी) जो अब बढ़कर 81 हो चुके हैं। प्रदेश में 2 एम्स पूरी तरह क्रियाशील हैं और 100 से अधिक जिला अस्पताल सरकारी तौर पर संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत चेन दूर-दराज के इलाकों तक मुफ्त इलाज पहुंचा रही है।
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की सफलता का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इसके तहत हर परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस योजना के दायरे में नहीं आ सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सीधे मदद दी जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहर बरपाने वाली बीमारी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले 40 साल में 50 हजार मासूम बच्चों की मौत हुई थी लेकिन 2017 के बाद हमने इस पर निर्णायक प्रहार किया। आज नतीजा यह है कि यूपी में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य पर पहुंच गया है। इसके साथ ही प्रदेश में संस्थागत प्रसव का ग्राफ अब राष्ट्रीय औसत के बराबर आ चुका है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का खाका खींचते हुए बताया कि यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किया जा रहा है। ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का काम युद्धस्तर पर जारी है। सीएम योगी ने ने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड है, ताकि चिकित्सा उपकरणों के लिए दुनिया की निर्भरता यूपी पर बढ़े। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने तकनीक की दिशा में दो बड़े कदम उठाए। उन्होंने एकीकृत चिकित्सा अनुसंधान अनुप्रयोग प्रणाली का लोकार्पण किया गया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म क्लिनिकल ट्रायल और मेडिकल रिसर्च को पारदर्शी और पेपरलेस बनाएगा। इसके अलावा क्लिनिकल ट्रायल के लिए 22 प्रकार के मानक संचालन प्रक्रियाओं वाली पुस्तक जारी की गई, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शोध को बढ़ावा देगी। सीएम योगी ने देश-विदेश के उद्यमियों और स्टार्टअप्स को उत्तर प्रदेश में निवेश का खुला निमंत्रण दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से समयबद्ध स्वीकृतियां और सुरक्षित निवेश वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा।
1960 में स्थापित, चिकित्सा विज्ञान संस्थान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का चिकित्सा विद्यालय है और इसमें तीन फैकल्टी (चिकित्सा, आयुर्वेद और दंत चिकित्सा विज्ञान) हैं। इसमें आधुनिक चिकित्सा के 33 विभाग हैं, जिनमें सुपर-स्पेशलिटी के 10 विभाग, दंत चिकित्सा के चार विभाग, आयुर्वेद के ग्यारह विभाग और नर्सिंग का एक स्कूल शामिल है।किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को एनआईआरएफ 2023 द्वारा मेडिकल श्रेणी में 12वां स्थान और एनआईआरएफ 2023 की ओर से ओवरऑल श्रेणी में 77वां स्थान दिया गया है। केजीएमयू लखनऊ की स्थापना 1905 में हुई थी। साल 1962 में स्थापित, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (जिसे जेएनएमसी एएमयू के नाम से भी जाना जाता है) अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में से एक है। कॉलेज को एनएमसी की ओर से मान्यता प्राप्त है और एनआईआरएफ 2021 द्वारा इसे 15वां स्थान दिया गया है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित एक प्रतिष्ठित संस्थान है। यह संस्थान मेडिकल के यूजी, पीजी और एडवांस्ड मास्टर्स कार्यक्रमों के साथ डिग्री पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इस प्रकार प्रदेश मंे उच्च चिकित्सा के कई संस्थान हैं। (मोहिता स्वामी-हिफी फीचर)



