यूएई को ब्रिटेन ने समझा था घाटे का सौदा

आज चमक-धमक के साथ अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट से यूरोप को पीछे छोड़ने वाला यूएई हमेशा से ऐसा नहीं था। भारत की तरह यूएई ने भी ब्रिटेन शासन का दौर देखा है, लेकिन यूएई को भारत की तरह आजादी की लड़ाई नहीं लड़नी पड़ी और ना ही ब्रिटेन का यूएई पर भारत जैसा कब्जा था। तेल की खोज से पहले यूएई एक गरीब देश था। यहां के लोग मछली पकड़ने, मोती निकालने, छोटे पैमाने के व्यापार और खानाबदोश पशुपालन से अपनी आजीविका चलाते थे। यूएई की विकास दर काफी कम थी, लोग कम पड़े लिखे थे और बहुत कम इंफ्रास्ट्रक्चर था। ऐसे में ब्रिटेन के लिए यूएई पर पूर्ण रूप से कब्जा करना फायदा का सौदा नहीं था। हालांकि उसकी समुद्र स्थिति के चलते ब्रिटेन ने ट्रूसियल स्टेट्स (यूएई) पर 1820 से 1971 तक नियंत्रण रखा जिसके जरिए ब्रिटिशर्स ने भारत के लिए सुरक्षित व्यापार मार्ग बनाया। ट्रूसियल स्टेट्स में ब्रिटिश दखल 19वीं सदी की शुरुआत में कई समुद्री संधियों के जरिए शुरू हुआ (जिसकी शुरुआत 1820 की जनरल मैरीटाइम ट्रीटी और 1853 की पर्पेचुअल मैरीटाइम ट्रूस से हुई) जिसका मुख्य मकसद समुद्री डकैती को रोकना, भारत के लिए व्यापार मार्गों को सुरक्षित करना और दूसरी यूरोपीय शक्तियों को प्रभाव हासिल करने से रोकना था।



