नितिन नवीन के लिए शुभ सगुन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही नितिन नवीन ने पार्टी को एक उपलब्धि प्रदान कर दी है। नितिन नवीन के आगमन के साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में एक पार्टी जुड़ गयी है। यह पार्टी भी उस राज्य की है जहां इसी साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा ने दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है लेकिन तमिलनाडु में अभी उसका आधार बहुत कमजोर है। तमिलनाडु में इसी साल चुनाव होने हैं। यहां पर अन्ना द्रमुक और द्रमुक ही दो बड़ी पार्टियां मुख्य प्रतिद्वन्द्वी हैं। यही देानों बारी-बारी से सत्ता पर कब्जा करती रहती हैं। इस समय द्रमुक की सरकार है जिसके साथ कांग्रेस जुड़ी हुई है। अन्ना द्रमुक की कमान कभी जयललिता संभालती थीं। उनके निधन के बाद पार्टी में विभाजन हो गया।
एक गुट के साथ भाजपा का गठबंधन पहले ही हो चुका है। अब टीटीवी दिनाकरन ने 21 जनवरी को घोषणा की है कि उनकी पार्टी एएमएमके एनडी के साथ जुड़ जाएगी। इस प्रकार तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ही एक नया राजनीतिक समीकरण बन गया है। इससे यह तो नहीं कहा जा सकता कि भाजपा को तमिलनाडु में सत्ता मिल जाएगी लेकिन उसका प्रभाव वहां निश्चित रूप से बढ़ेगा। नितिन नवीन की बड़ी चुनौतियांे में 2026 के विधानसभा चुनाव भी हैं। ध्यान रहे कि पीएम नरेन्द्र मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में रैली कर चुनाव अभियान शुरू करेंगे। दिनाकरण, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके की प्रमुख रहीं जयललिता की सहयोगी वीके शशिकला के भतीजे हैं। एआईएडीएमके से निकाले जाने के बाद दिनाकरण ने 2018 में एएमएमके का गठन किया था।
एक समय शशिकला ही पर्दे के पीछे से एआईएडीएमके को चलाती थीं लेकिन समय के साथ-साथ उनकी पकड़ पार्टी पर कमजोर पड़ती गई। उन्हें 2021 में एआईएडीएमके से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। एएमएमके की दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में रहने वाले थेवर समुदाय में मजबूत पकड़ है लेकिन एएमएमके को एनडीए में रहते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में थेनी और तिरुचिरापल्ली सीट दी गई थी। दोनों ही सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा था। थेनी में तो दिनाकरण खुद ही उम्मीदवार थे। उन्हें डीएमके के थांगा तमिलसेल्वम ने हरा दिया था। वहीं तिरुचिरापल्ली में एएमएमके को चैथे स्थान से संतोष करना पड़ा था। दिनाकरण,शशिकला और पूर्व पन्नीरसेल्वम भी थेवर समुदाय से ही आते हैं। वहीं पलानीस्वामी गौंडर समुदाय से आते हैं, जिसका पश्चिमी तमिलनाडु में अच्छा प्रभाव है। एएमएमके ने सितंबर 2025 में एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी, पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके को खुश करने के लिए उसे नजरअंदाज कर रही है, दिनाकरण ने यह भी कहा था कि वह कभी भी ईपीएस को एनडीए के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसी खबरें भी थीं कि एएमएमके अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन की भी बातचीत कर रही है। दिनाकरण ने विजय की खुलकर तारीफ करते हुए यहां तक कहा था कि टीवीके 2026 के चुनाव में बड़ा असर डालेगी। इतना सब होने के बाद भी बीजेपी एएमएमके को हर हाल में एनडीए में वापसी चाहती थी। इसलिए दिनाकरण को मनाने के लिए उसने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को लगाया था।
अन्नामलाई के संबंध भी एल पलानी स्वामी ईपीएस से ठीक नहीं बताए जाते हैं। दिनाकरण ने इस महीने के शुरू में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा है कि शाह ने उन्हें एनडीए में सम्मानजनक सीटें और पूरा सम्मान देने का भरोसा दिया है।
काफी लंबी बातचीत के बाद एआईएडीएमके एनडीए में शामिल हुई थी। शर्त यह थी कि ईपीएस को सीएम फेस बनाया जाए। बीजेपी ने उसकी इस मांग को मान लिया था। बीजेपी राज्य में एनडीए को मजबूत करने में लगी हुई है। अभी पिछले हफ्ते ही पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) भी एनडीए में शामिल हुई थी। पीएमके प्रमुख अंबुमणि रामदास ने ईपीएस के सामने एनडीए में शामिल होने की घोषणा की थी। टीटीवी दिनाकरण की आखिरकार एनडीए में वापसी हो गई है, जिससे राज्य की सियासी तस्वीर बदलती हुई दिखाई दे रही है। कुछ महीने पहले दिनाकरन ने एनडीए से दूरी बना ली थी, जिसके बाद माना जा रहा था कि एआईएडीएमके और भाजपा के बीच संबंध ठंडे पड़ गए हैं लेकिन हाल में बीजेपी नेता के अन्नामलाई और दिनाकरण की बैठक ने जो संकेत दिए थे, अब वे पूरी तरह सच साबित हो गए हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने एनडीए के साथ मिलकर दो सीटों थेनी और तिरुचिरापल्ली पर चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं मिली। इसके बावजूद भाजपा ने दिनाकरण को तमिलनाडु में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना और लगातार संपर्क बनाए रखा। अब जब दिनाकरण ने औपचारिक रूप से एनडीए में दोबारा प्रवेश कर लिया है, इसे भाजपा के लिए राहत और विपक्ष के लिए
एक चेतावनी के रूप में देखा जा
रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु में भाजपा अपनी जमीन मजबूत करने के प्रयास में लगी है और दिनाकरण जैसे प्रभावशाली नेता का साथ मिलना उसे दक्षिण में नया राजनीतिक स्पेस दे सकता है। वहीं, एएमएमके की वापसी से एनडीए का गठबंधन और बड़ा हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि भाजपा-एआईएडीएमके मिलकर राज्य में नया समीकरण कैसे तैयार करते हैं और क्या यह साझेदारी एआईएडीएमके को भी अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी। दिनाकरण ने कहा, बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हमें पुराने विवादों को पार्टी के हितों, तमिलनाडु के कल्याण या जनता के हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए। जनहित में समझौते करना हमें कमजोर नहीं बनाता।
इसी तरह, अम्मा के कार्यकर्ता होने के नाते, जो हमें एकजुट रखने वाली ताकत हैं, हम सब एक साथ आएंगे और मजबूती से खड़े होंगे, ताकि तमिलनाडु में अम्मा का शासन फिर से लौटे, जनता की सरकार बहाल हो और अच्छा शासन कायम हो। यही हमारा साफ और स्पष्ट रुख है। एएमएमके महासचिव दिनाकरण ने एनडीए में शामिल होने के संकेत कुछ दिए थे। पिछले साल सितंबर में एनडीए छोड़ते हुए एएमएमके ने बीजेपी पर एआईएडीएमके के एडप्पाडी के पलानीस्वामी को आगे बढ़ाने के लिए उसकी अनदेखी करने का आरोप लगाया था। अब एनडीए में शामिल होने के बाद दिनाकरण को गठबंधन के सीएम फेस के रूप में पलनीस्वामी के नाम को ही आगे बढ़ाना होगा। इसी दिनाकरण ने 2018 में एएमएमके के गठन के समय ईपीएस के नाम से मशहूर पलानीस्वामी का राजनीतिक करियर खत्म करने की कसम खाई थी। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



