इस बार बसन्त पंचमी पर बन रहे हैं शुभकारी योग

लखनऊ। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय बताते हैं कि बसंत पंचमी पर्व माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। इस वर्ष माघ शुक्ल पंचमी तिथि शुक्रवार को पूरे दिन व रात्रि 12.08 तक है, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र व सिद्धि नामक योग मिल रहा है । अतः इस बार की वसन्त पंचमी सर्वमंगलकारी है।
सरस्वती पूजन का सर्वोत्तम मुहूर्त प्रातः 8 से 09.32 तक है। यह पर्व वास्तव में ऋतुराज वसन्त की अगवानी की सूचना देता है। इस दिन से ही होली तथा धमार,गीत प्रारम्भ किये जाते है। गेहूँ तथा जौ की स्वर्णिम बालियाँ भगवान को अर्पित की जाती है। भगवान विष्णु तथा सरस्वती के पूजन का विशेष महत्व है ।
वसन्त ऋतु कमोद दीपक होती है। इसलिए चरक संहिता कार का कथन है कि इसके प्रमुख देवता काम तथा रति है। अतएव काम तथा रति का प्रधानतया पूजन करना चाहिए ।
पौराणिक आख्यान के अनुसार भगवान विष्णु की आज्ञा से प्रजापति ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करके जब उसे संसार में देखते थे तो चारों और सुनसान दिखाई देता था। उदासी से सारा वातावरण मूक सा हो गया था। जैसे किसी के वाणी न हो। यह देखकर ब्रह्मा जी ने उदासी तथा मलिनता को दूर करने के लिए अपने कमण्डलु से जल छिड़का । उन जलकणों के पड़ते ही वृक्ष से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो दोनों हाथों से वीणा बजा रही थीं तथा दोनों हाथों में क्रमशः पुस्तक तथा माला धारण किये थी। ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाकर संसार की मूकता तथा उदासी दूर करने को कहा तब उस देवी ने वीणा के मधुर-नाद से सब जीवों को वाणी प्रदान की इसलिए उस देवी को सरस्वती कहा गया। यह देवी विद्या, बुद्धि को देने वाली है। इसलिए जो व्यक्ति माँ सरस्वती की पूजा निष्ठा पूर्वक करता है उसे बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। (पं. राकेश पाण्डेय-हिफी फीचर)



