तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का बेटा पहुंचा ढाका

बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद दक्षिण एशिया की सियासत तेज होती दिख रही है। बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) दोबारा सत्ता में आ गई है। तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने हैं। इसके बाद अब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते दोबारा पटरी पर आने लगे हैं लेकिन इस बीच तुर्की ने चुपचाप बांग्लादेश में अपनी चाल चलनी शुरू कर दी है। तुर्की ने जैसे पाकिस्तान में अपनी पहुंच बढ़ाई है, वैसे ही अब वह बांग्लादेश में मौजूदगी बढ़ा रहा है। तारिक रहमान के शपथ ग्रहण के ठीक बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के बेटे बिलाल एर्दोगन 18 फरवरी को अचानक ढाका पहुंच गए। यह दौरा बेहद गुपचुप रहा है। इस दौरे की जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी। स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे जब बिलाल एर्दोगन प्राइवेट जेट से ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे, तभी मीडिया को इसकी खबर लगी। उनके साथ तुर्की सहयोग और समन्वय एजेंसी (टीआईकेए) के प्रमुख अब्दुल्ला एरेन और मशहूर फुटबॉलर मेसुत ओजिल भी मौजूद थे। एयरपोर्ट से निकलने के बाद प्रतिनिधिमंडल सीधे ढाका के एक फाइव स्टार होटल पहुंचा और फिर टीआईकेए के प्रोजेक्ट ऑफिस का दौरा किया।
टीआईकेए की दक्षिण एशिया में बढ़ती गतिविधियों ने पड़ोसी भारत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके प्रोजेक्ट्स और अन्य तुर्की संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी को भारतीय पर्यवेक्षक संभावित रणनीतिक खतरे के रूप में देख रहे हैं। टीआईकेए की विकास योजनाएं, जैसे कि लालमोनिरहाट में तकनीकी संस्थान, जांच के दायरे में हैं। खुफिया एजेंसियों ने यह भी चिंता जताई है कि टीआईकेए और संबंधित तुर्की एनजीओ पैन-इस्लामिस्ट विचारधारा को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे स्थानीय राजनीतिक माहौल पर असर पड़ सकता है और यह कुछ इस्लामिस्ट गुटों, जैसे कि जमात-ए-इस्लामी, की भारत विरोधी सोच के अनुरूप हो सकता है। टीआईकेए के जरिए तुर्की-बांग्लादेश संबंधों की मजबूती को कुछ विश्लेषक तुर्की-पाकिस्तान-चीन गठजोड़ के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, जिसका मकसद भारत के क्षेत्रीय प्रभाव को चुनौती देना है।



