मणिशंकर की राहुल को सलाह

कांग्रेस में पलीता लगाने वाले वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर भी कभी-कभी अच्छी सलाह देते हैं। अभी हाल में उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कहा कि उन्हें (राहुल को) विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया का नेतृत्व छोड़कर इसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंप देना चाहिए। यहां
ध्यान देने की बात यह है कि इंडिया गठबंधन का नेतृत्व राहुल गांधी को अब तक औपचारिक रूप से सौंपा भी नहीं गया है लेकिन जिस तरह से यह गठबंधन बिखर गया है उससे संभलने के लिए मणिशंकर की सलाह कारगर दिख रही है। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसका विरोध भी किया और कहा कि यह मणिशंकर अय्यर की निजी राय हो सकती है लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने जिस तरह अच्छे कद के नेताओं जैसे ममता बनर्जी, एमके स्टालिन जैसे युवाओं को आगे बढ़ाने की बात कही है और स्पष्ट रूप से अपना विचार रखा कि वह गांधीवादी हैं, नेहरूवादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं हैं। इसका साफ मतलब है कि राहुल गांधी को अभी कांग्रेस के गौरव के अनुरूप अपने को ढालना होगा। राहुल गांधी की आलोचना उनकी पार्टी के अंदर भी हो रही है। पंजाब में नवजोत कौर ने उनकी आलोचना की और असम में भूपेन बोरा ने भी कांग्रेस छोड़ने के पीछे राहुल गांधी को जिम्मेदार बताया है। मणिशंकर अय्यर का सुझाव इसलिए सामयिक लगता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन की कमान छोड़ने की सलाह दी है। अय्यर ने कहा है कि राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन की कमान छोड़कर ममता बनर्जी, स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव को दे देनी चाहिए। इससे गठबंधन मजबूत होगा और ये नेता गठबंधन को काफी समय दे पाएंगे। मणिशंकर का बयान ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन में राहुल के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ममता बनर्जी गठबंधन से दूरी बनाए हुए हैं। वहीं, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव भी राहुल को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
मणिशंकर अय्यर ने कहा, ममता दीदी के बिना इंडिया अलायंस का इंडिया और सब निकल जाएगा क्योंकि ममता बनर्जी ही इस गठबंठन की नेता हैं और साथ-साथ दो-चार और लोग हैं जो इस पद को हासिल कर सकते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि बजाय राहुल गांधी इसी पद पर रहने की कोशिश करें किसी और को, जो छोटी पार्टियों का है स्टालिन हो, ममता दीदी हों, अखिलेश हो, तेजस्वी हो या कोई और हो इंडिया का महत्व संभाले तो उनके पास ज्यादा टाइम रहेगा गठबंधन को चलाने के लिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर इन दिनों तमाम ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे पार्टी के अंदर बवाल मचा हुआ है। हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने केरल में पिनरई विजयन के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी। उन्होंने विपक्षी सरकार के तमाम कामों की तारीफ भी की थी। इसे लेकर पहले से ही कांग्रेस पार्टी में बवाल मचा हुआ था। वहीं अब मणिशंकर अय्यर ने एक और बयान दे दिया है, जिसके जरिए उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी पर निशाना साधा है। मणिशंकर अय्यर ने एक बयान में कहा है कि वह राहुलवादी नहीं हैं।
अय्यर के इस बयान से बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले हलचल मच गई है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने अय्यर की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव सुमन रॉय चैधरी ने कहा कि अय्यर लंबे समय से पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूर हैं और उनका बयान पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है। उन्होंने कहा, मणिशंकर जी क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी पर्दे के पीछे बीजेपी की कठपुतली की तरह काम करती हैं, जिसके खिलाफ इंडिया ब्लॉक लड़ रहा है? मुझे नहीं लगता कि पार्टी से दूर रहने के बाद कांग्रेस पार्टी का कोई भी फैसला लेने में आपका कोई हिस्सा है। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को लेकर यह भी कहा है कि मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं।
मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी को लेकर तीखा बयान दिया है। मणिशंकर अय्यर ने कहा, डॉ. अंबेडकर की जीवनी ए पार्ट बट अपार्ट है। बस इतना ही मैं कह सकता हूं। राहुल गांधी यह भूल गए हैं कि मैं पार्टी का सदस्य हूं। इसलिए, मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं। जाहिर सी बात है कि अब मणिशंकर अय्यर के इस बयान से कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर से उथल-पुथल तेज हो गई है।
हाल ही में सीनियर नेता मणिशंकर अय्यर ने केरल में सत्ताधारी एलडीएफ सरकार के पंचायती राज मॉडल की भी तारीफ की थी। अय्यर ने विजन 2031 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डेमोक्रेसी एंड डेवलपमेंट नाम के इंटरनेशनल सेमिनार में कहा, मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिनके बारे में मुझे यकीन है कि वे अगले मुख्यमंत्री होंगे, मैं केरल को देश का सबसे अच्छा पंचायती राज राज्य बनाने की अपनी अपील दोहराता हूं। हालांकि, कांग्रेस ने अय्यर की बातों से खुद को अलग करते हुए कहा कि वे पर्सनल तौर पर कही गई थीं। बता दें कि केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मणिशंकर अय्यर की बगावत कांग्रेस पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है।
ध्यान रहे कि असम में पूर्व एपीसीसी अध्यक्ष भूपेन बोरा ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा, जब मैंने राहुल गांधी से कहा, सर, मुझे बहुत अपमान महसूस हो रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें भी बहुत अपमान सहना पड़ रहा है। उस क्षण मुझे लगा कि मेरे अपमान का कोई महत्व नहीं है लेकिन मैं इतना सहन नहीं कर सकता, मुझमें इसे सहने की इतनी क्षमता नहीं है।
उनके इस बयान पर असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह कहते हैं, प्रियंका गांधी के असम कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार, 9 तारीख को एक बैठक हुई थी जिसमें यह चर्चा हुई कि हमें जल्द से जल्द गठबंधन सरकार बनानी होगी और इतने कम समय में केवल भूपेन बोरा ही ऐसा कर सकते हैं। योजना यह थी कि प्रियंका गांधी के यहां पहुंचते ही सभी गठबंधन सहयोगी एक साथ हाथ उठाकर गठबंधन की घोषणा कर देंगे। मुझे भी इस अवसर का लाभ उठाने में खुशी हुई अब भी गठबंधन होगा। गौरव गोगोई ने गठबंधन इसलिए तोड़ा क्योंकि अगर गठबंधन सरकार बनती तो वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाते उन्हें डर था कि अगर गठबंधन जारी रहा तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इस प्रकार असम कांग्रेस के स्तंभ रहे कई वरिष्ठ नेताओं को अपमानित होना पड़ा। उधर कांग्रेस से निकाली गई पंजाब की सीनियर नेता नवजोत कौर सिद्धू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें लीडरशिप के प्रति उनके नजरिए को समझने में मुश्किल होती है। उन्होंने कहा कि वह अभी उस लेवल पर नहीं पहुंचे हैं जहां वह सबके साथ एक जैसा बर्ताव करें और बातचीत के लिए तैयार रहें। उनके मुताबिक, वह अभी भी गांधी परिवार की सोच से बंधे हुए लगते हैं और उन्हें उन सच्चे शुभचिंतकों की बात सुनने का समय नहीं मिलता जो उन्हें गाइड करने की कोशिश कर रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि अगर किसी से मिलने में आठ महीने लगें, तो यह ठीक नहीं है। इस प्रकार राहुल गांधी की आलोचना पार्टी के अंदर से हो रही है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



