लेखक की कलम

देशभक्ति इन कुत्तों से भी सीख सकते हैं गद्दार

हाल ही में सैन्य बल को जम्मू डिवीजन के कठुआ, ऊधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में सेना के डाग स्कवायड ने जान पर खेल कर बेहतरीन काम किया है। यहां तक कि आतंकियों की गोलीबारी में सेना का टायसन नामक डाग जख्मी भी हुआ है। सेना के कुत्ते, जिन्हें अक्सर साइलेंट वॉरियर्स कहा जाता है, सुरक्षा, जासूसी, बारूदी सुरंगों का पता लगाने, तलाशी और बचाव अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेरठ के रीमाउंट और वेटरनरी कॉर्प्स सेंटर में प्रशिक्षित ये कुत्ते जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, बेल्जियन मैलिनोइस जैसी नस्लों के होते हैं, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों में सैनिकों की जान बचाते हैं। दूसरी ओर गौर कीजिए देश में काश्मीर से लेकर कोलकाता और तमिलनाडु केरल तक ऐसे सक्रिय और स्लीपर सैल से जुड़े आतंकी और आतंकियों के मददगार पकड़े जा रहे हैं जो इस देश का अन्न जल खाकर भी मजहबी उन्माद और नफरती विषवमन से ग्रसित होकर देश के खिलाफ गद्दारी कर रहे हैं। ये गद्दार देशद्रोही इंसान का जन्म लेकर भी नमक का फर्ज अदा करना तो दूर देश के दुश्मनों के मंसूबों को पूरा करने में मददगार बन रहे हैं ये इन जानवरों में जन्म लेने के बावजूद प्रशिक्षण लेकर देश के लिए काम करने वाले डाग्स से भी सबक ले सकते हैं।
आपको बता दें हाल ही में सुरक्षा बलों को जम्मू डिवीजन में सक्रिय इन आतंकवादियों का सफाया करने के लिए चलाए जा रहे ऑप्रेशन त्राशि-1 के दौरान आखिरकार 22 फरवरी, 2026 को बड़ी सफलता मिली।जम्मू के किश्तवाड़ के घने जंगल में हुई भीषण मुठभेड़ में भारतीय सेना के जवानों ने एक ढोक भेड़-बकरियां आदि चराने वालों अर्थात गड़रियों द्वारा मौसम बदलने पर रहने के लिए बनाए गए अस्थायी आवास में छिपे हुए आतंकवादियों पर रॉकेट दागकर जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष पाकिस्तानी कमांडर और सात साल से सुरक्षा बलों को चकमा दे रहे 10 लाख के ईनामी सैफुल्लाह सहित तीन आतंकवादियों को मार गिराया। एक रिपोर्ट के अनुसार राकेट दागने से हुआ धमाका इतना जबरदस्त था कि इसके परिणामस्वरूप एक आतंकवादी की खोपड़ी ही पूरी तरह छलनी हो गई तथा तीनों आतंकवादियों के शव पूरी तरह जल गए। मुठभेड़ स्थल से 2 ए. के. 47 राइफलें और भारी मात्रा में युद्धक सामग्री बरामद हुई।
गत कुछ वर्षों से ये आतंकवादी लगातार अपनी लोकेशनें बदलते आ रहे थे और पहाड़ी इलाकों व घने जंगलों का लाभ उठाकर अपना नैटवर्क बनाने में जुटे हुए थे। इस आप्रेशन को सफल बनाने में भारतीय सेना के मददगार डाॅग स्कवायड के टायसन नामक खोजी श्वान का बड़ा योगदान रहा। आतंकवादियों के ठिकानों की ओर वही सबसे पहले बढ़ा था।
जानकारी के अनुसार सेना की के9 यूनिट का वो बहादुर डॉग जो आतंकवाद के खिलाफ कई ऑपरेशन में हिस्सा रहा लेकिन रविवार को किश्तवाड़ में वो जिस तरह आतंकियों का काल साबित हुआ उसे सुनकर आपको गर्व होगा। जिस वक्त आतंकी सेना पर गोली चला रहे थे। उस वक्त भी टायसन रुका नहीं। बल्कि आतंकियों की ओर बढ़ता चला गया। इस फायरिंग में टायसन को एक गोली भी लग गई। फिर भी वो चट्टान की तरह उनके सामने डटा रहा और गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी टायसन ने जवानों को आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचाया, जिसके बाद सेना ने जैश के तीन आतंकियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन के बाद गंभीर हालत में ‘टायसन’ एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया वहां आपरेशन के बाद उसकी हालत में सुधार हो रहा है। घायल हो जाने के बावजूद टायसन ने आतंकवादियों का डटकर मुकाबला किया और अंततः उसने आतंकवादियों को सुरक्षा बलों की रेंज में ला दिया और भारतीय जवानों ने उनको ढेर कर दिया। सैन्य रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना के जांबाज के नाइन डॉग टायसन ने किश्तवाड़ में आतंकियों से लोहा लेते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया। गोली लगने के बावजूद भी वो चट्टान की तरह उनके सामने डटा रहा। टायसन की मदद से जैश के तीन आतंकी मारे गए। टायसन जैसे जर्मन शेफर्ड डॉग भारतीय सेना की शान हैं, जो कठिन प्रशिक्षण के बाद देश की सेवा करते हैं। इस सम्बन्ध में जारी एक बयान में कहा गया है कि टायसन की बहादुरी के दम पर व्हाइट नाइट कोर्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा सी.आर.पी. एफ. उक्त पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों पर सटीक निशाने साध कर उन्हें ठिकाने लगा सकीं। टायसन एक सच्चा योद्धा सिद्ध हुआ है।
टायसन के अलावा आतंकवादियों के विरुद्ध भारतीय सुरक्षा बलों की विभिन्न सैन्य कार्रवाइयों में अनेक मददगार खोजी कुत्तों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार इनमें सेना के डोमीनो नामक कुत्ते तथा उसके हैंडलर लक्की कुमार को राजौरी में एक आतंकवादी का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए 2023 में सम्मानित भी किया गया था। 2023 में ही जम्मू के राजौरी जिले में एक आप्रेशन के दौरान 2 आतंकवादियों तक सुरक्षा बलों को पहुंचा कर उन्हें मार गिराने में योगदान देने वाली कैंट नामक एक मादा खोजी डाॅग अपने हैंडलर को आतंकवादियों से बचाने की कोशिश के दौरान उस पर चलाई गई गोली से मारी गई थी। कैंट का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था।
ये तो चंद नजीर हैं वास्तव में मददगार वफादार डाॅग की सूची में जूम, फैंटम और एक्सल जैसे और भी कई नाम हैं जिन्होंने देश की माटी का ऋण अपने प्राण देकर चुकाया है। आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में इन खोजी श्वानों का योगदान किसी भी दृष्टि से कम कर नहीं आंका जा सकता है।
समय-समय पर देश की सीमाओं और प्रमुख एतिहासिक स्थलों व्यक्तियों नेताओं अधिकारियों की सुरक्षा को जब जब देश के दुश्मनों ने निशाना बनाने की कोशिश की है, भारतीय सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण प्राप्त कुत्तों ने जबरदस्त मदद कर दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करने में अपना योगदान दिया है। इन खोजी श्वानों के प्रशिक्षण तथा देखभाल को और बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों को भी समुचित पुरस्कार देकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि वे और मुस्तैदी से देश के दुश्मनों का सफाया कर सकें।
सीमा पर घुसपैठियों को पकड़ने और चैकी की सुरक्षा में ये बहुत मददगार हैं। प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध के दौरान लापता लोगों को खोजने में ये अहम हैं। वाहनों और इमारतों की जांच में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सीधे ऑपरेशन्स में भाग लेते हैं और दुश्मन के ठिकाने का पता लगाने में मदद करते हैं।
2015 से, सेवानिवृत्त सैन्य कुत्तों को गोद लेने की अनुमति है। भारतीय सेना में इन कुत्तों को न केवल सैनिक माना जाता है, बल्कि वे वफादार दोस्त के रूप में भी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। इन डाॅग्स की देशभक्ति को नमन।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)

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