लेखक की कलम

सुनेत्रा व अजित को क्लीन चिट

एक दिन पहले ही दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को दोष मुक्त किया था और जांच एजेंसियों को फटकार भी लगाई थी। दूसरे ही दिन अर्थात् 28 फरवरी को मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने 25 हजार करोड़ रुपये के घोटाले मंे
स्व. अजित पवार और उनकी पत्नी, जो वर्तमान मंे महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम हैं, सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट दे दी। स्पेशल कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दायर क्लोचर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। सवाल एक बार फिर वहीं है कि संवैधानिक पद पर बैठे लोगों पर इस तरह के गंभीर आरोप अदालत मंे थोथे क्यों साबित हो रहे हैं? दिल्ली की आबकारी नीति के कथित घोटाले मंे दो दर्जन से ज्यादा लोग आरोपित थे और जेल भी गये। उसी तरह महाराष्ट्र के इस अरबों-खरबों के कथित घोटाले मंे 75 लोग आरोपित थे और सभी को क्लीन चिट दी गयी है। क्लोजर रिपोर्ट का गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी विरोध किया था।
यह मामला 2022 मंे तब भी चर्चा में आया जब महाराष्ट्र में सरकार बदल गयी।
महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) से जुड़े कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले में मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. इस फैसले के साथ ही ट्रायल कोर्ट के स्तर पर इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले का अंत हो गया है. इस केस में दिवंगत अजित पवार और सुनेत्रा पवार को भी क्लीन चिट मिल गई है। ईओडब्ल्यू ने कोर्ट को बताया कि कोई क्रिमिनल ऑफेंस नहीं बना। ईओडब्ल्यू ने कहा कि लोन रिकवरी में कथित गड़बड़ियों में कोई क्राइम नहीं हुआ है।
इस मामले में एक एक्टिविस्ट ने याचिका दायर की थी। स्पेशल कोर्ट ने याचिका खारिज करके हुए अजित पवार और सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट दे दी। इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने फाइल की थी। अदालत के इस फैसले से करीब 75 आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई है। इसमें महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार, पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार, जिनका हाल ही में निधन हुआ और कई अन्य पूर्व बैंक निदेशक और वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि बैंक लोन और संपत्तियों (जैसे चीनी मिलों) की बिक्री में अनियमितताओं के आरोप तो लगे थे, लेकिन आपराधिक साजिश का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। बैंक को कोई जानबूझकर अनुचित नुकसान नहीं पहुंचाया गया। जांच के दौरान बैंक ने करीब 1,343 करोड़ रुपये की वसूली भी कर ली है। साक्ष्यों की कमी के कारण चार्जशीट दाखिल करने का कोई आधार नहीं बनता। जज जाधव ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करने वाले अन्ना हजारे और अन्य के आवेदन को भी खारिज कर दिया। इन आवेदनों में दावा किया गया था कि ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान केस के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की है, इसलिए क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार न किया जाए, लेकिन जज ने आवेदन को अस्वीकार कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 2019 में कथित घोटाले के आरोपों की ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की थी। तब अजित पवार एक बैंक के निदेशक थे। एफआई में पवार के अलावा अन्य लोगों के नाम भी शामिल थे। शुरू में ईओडब्ल्यू ने दावा किया था कि जनवरी 2007 से दिसंबर 2017 के बीच कर्ज वितरण में अनियमितताओं के चलते राज्य के सरकारी खजाने को 25 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले एमवीए की सरकार के दौरान ईओडब्ल्यू ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। हालांकि, 2022 में सरकार बदलने के बाद जांच एजेसी ने मामले को फिर से खोलने की मांग की, लेकिन एनसीपी में विभाजन के बाद पवार सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो गए थे। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने फिर क्लोजर रिपोर्ट दायर की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। मामले में ईडी ने भी पहले हस्तक्षेप का आवेदन किया था।
क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी महाराष्ट्र के बारामती में एक प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत के एक महीने बाद मिली है। स्पेशल जज महेश जाधव ने एक्टिविस्ट अन्ना हजारे और दूसरों की क्लोजर रिपोर्ट को चैलेंज करने वाली प्रोटेस्ट पिटीशन खारिज कर दीं। बॉम्बे हाई कोर्ट के कहने पर 2019 में इस मामले की जांच शुरू हुई थी। उस समय एक डिस्ट्रिक्ट बैंक के डायरेक्टर पवार के अलावा एफआईआर में सरकारी अधिकारियों, एमएससीबी के उस समय के डायरेक्टर, अधिकारियों और दूसरों के नाम थे।
सुनेत्रा अजीत पवार एक भारतीय राजनीतिक नेता हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र की 11वीं उपमुख्यमंत्री के रूप में एकनाथ शिंदे के साथ काम किया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही वे राज्य के इतिहास में इस पद को संभालने वाली पहली महिला बन गईं, जो महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। उनके राजनीतिक सफर में राज्यसभा में संसद सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल शामिल है, जहां उन्होंने विकास, शासन और सामाजिक कल्याण पर चर्चा में योगदान दिया। उच्च स्तरीय सार्वजनिक पद संभालने से पहले, उन्होंने कई वर्षों तक सामुदायिक विकास, पर्यावरण संबंधी पहलों और ग्रामीण सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से पश्चिमी महाराष्ट्र में। शांत नेतृत्व, सशक्त संगठनात्मक क्षमता और समावेशी प्रगति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक सम्मान दिलाया है।
उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका में, सुनेत्रा पवार सार्वजनिक कल्याण प्रणालियों को मजबूत करने, युवा विकास और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करती हैं, साथ ही महाराष्ट्र के लिए पारदर्शी शासन और दीर्घकालिक, टिकाऊ विकास की वकालत करती हैं। राज्य के सर्वोच्च पदों में से एक पर उनका पहुंचना उनके दृढ़ संकल्प, नेतृत्व क्षमता और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है- जो उन्हें समकालीन महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली हस्ती बनाता है।
श्रीमती पवार एक उत्साही पर्यावरणविद् हैं, जिन्होंने जैव विविधता संरक्षण, लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और सूखा राहत पर केंद्रित व्यापक जमीनी स्तर के अभियान चलाए हैं। उनके प्रभावशाली कार्यों को मान्यता देते हुए, उन्हें प्रतिष्ठित ग्रीन वॉरियर अवार्ड से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने योगदान के अलावा, श्रीमती पवार शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे विद्या प्रतिष्ठान की न्यासी हैं, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और ग्रामीण शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए समर्पित एक प्रतिष्ठित संस्थान है। वैश्विक स्तर
पर उनकी भागीदारी भी उल्लेखनीय है। वे 2011 से विश्व उद्यमिता मंच (फ्रांस) की थिंक टैंक सदस्य हैं और स्थिरता और सामाजिक नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

 

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