कैसे बनें मर्यादा पुरुषोत्तम राम

हमारे देश में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि विशेष महत्व रखती है। इसका महत्व इसलिए है कि जहां एक तरफ वासंतिक नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है वहीं इसी दिन श्री हरि विष्णु के सातवें अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। देवताओं का दुःख हरण करने और पृथ्वी पर मर्यादा की स्थापना करने के लिए त्रेता युग में अयोध्या के महाराजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र के रूप में राम का अवतार हुआ था। गोस्वामी तुलसीदास के राम तो एकमात्र परम सत्ता के स्वामी हैं जिन्होंने अपनी महामाया और अपने अंशों के साथ असुरों का विनाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। भगवान राम का जन्मोत्सव अयोध्या समेत पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल राम नवमी तिथि दो दिन होने के कारण थोड़ा असमंजस भी बन गया है। पंचाग के अनुसार आमतौर पर अधिकांश व्रत सूर्योदय के आधार पर मनाए जाते हैं लेकिन करवा चैथ जैसे कुछ व्रत चंद्रोदय के अनुसार मनाए जाते हैं। रामनवमी सूर्योदय के आधार पर मनाया जाती है और ज्योतिषियों ने इसलिए 27 मार्च को रामनवमी मनाने पर सहमति जतायी है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11.48 बजे से शुरू होकर अगले दिन 27 मार्च 2026 को सुबह 10.06 बजे तक रहेगी। ऐसे में सामान्य जन राम नवमी का पर्व 26 मार्च को मनाएंगे। वहीं, वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग उदया तिथि के आधार पर 27 मार्च 2026 को रामनवमी मनाएंगे। साल 2026 की रामनवमी इसलिए भी खास है, क्योंकि इस दिन कई शुभ नक्षत्रों का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, इस दिन पूजा करने से न केवल मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलेगा, बल्कि भगवान राम की कृपा से जीवन के सारे अटके हुए काम पूरे हो जाएंगे। चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि को राम नवमी भी कहते हैं। यह दिन भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है।
राम नवमी के दिन मध्याह्न काल का विशेष महत्व होता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान राम का जन्म दोपहर के समय हुआ था। ज्योतिषयों के अनुसार इस साल मध्याह्न का शुभ समय सुबह 11.13 बजे से दोपहर 1.41 बजे तक रहेगा, जबकि मध्याह्न का सटीक क्षण 12.27 बजे माना गया है। इस समय पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें फिर एक साफ जगह पर भगवान श्री राम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। गंगाजल से अभिषेक करें और चंदन, अक्षत, फूल और वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर पूजा करें और भोग लगाएं। आप राम मंत्र या रामायण का पाठ भी कर सकते हैं। अंत में भगवान से सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना जरूर करें। राम नवमी के दिन घर को सजाना, नए कपड़े पहनना और हवन करना भी शुभ माना जाता है।
श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जीवन की हर विपरीत परिस्थिति में धर्म, नैतिकता, कर्तव्य और मानवीय मर्यादाओं का पालन किया। वे सत्य, त्याग, आज्ञाकारिता और करुणा के सर्वोच्च आदर्श हैं, जिन्होंने राजा, पुत्र, भाई और पति के रूप में मर्यादा की मिसाल कायम की राम की मर्यादा के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं जैसे-
आदर्श पुत्र- पिता दशरथ के वचन की रक्षा के लिए बिना किसी संकोच के 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया।
आदर्श राजा (रामराज्य)- प्रजा के हित को सर्वोपरि माना और धर्म व न्याय के मार्ग पर शासन किया। आदर्श पति-सीता जी के प्रति अटूट प्रेम और एकपत्नी व्रत का पालन किया। आदर्श भाई व मित्र भाइयों के प्रति प्रेम और सुग्रीव-विभीषण से सच्ची मित्रता निभाई। धैर्य व शांत आचरण-राज्य खोने, पत्नी के वियोग और भारी दुखों में भी वे शांत व आनंदमय रहे। भगवान राम जी को भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अपना पूरा जीवन एक मर्यादा में रहकर व्यतीत किया। भगवान राम जी के चरित्र की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो उन्हें लोगों का आदर्श बनाती हैं। भगवान राम ने अपने आचरणों से हर किसी के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।
प्रभु श्री राम एक आदर्श मनुष्य, पुत्र, भाई और पति होने के साथ-साथ एक आदर्श कुशल शासक भी थे। उनके शासन काल में व्याप्त सुव्यवस्था के कारण ही आज भी रामराज्य का उदाहरण दिया जाता है।
भगवान श्री राम में गजब की सहनशीलता और धैर्य था। कैकेयी की आज्ञा पर राम जी ने 14 वर्ष का वनवास बिताया। समुद्र पर सेतु तैयार करने के लिए तपस्या की। राजा होते हुए भी उन्होंने संन्यासी की तरह जीवन व्यतीत किया। रावण द्वारा माता सीता के अपहरण के बाद भी उन्होंने संयम से काम लेते हुए सही समय की प्रतीक्षा की। सहनशीलता की ऐसी पराकाष्ठा भगवान राम में ही देखने को मिलती है। आज भी हर व्यक्ति को भगवान राम के इस गुण को अपनाना चाहिए। भगवान राम के अंदर दयालुता का भाव कूट-कूट कर भरा था। वह पशु-पक्षी से लेकर हर प्राणी के लिए दयालु स्वभाव रखते थे। भगवान राम ने अपने इसी गुण के कारण हर किसी को अपनी छत्रछाया में लिया। भगवान राम ने सुग्रीव, हनुमानजी, केवट, निषादराज, जाम्बवंत और विभीषण सभी के प्रति दया भाव दिखाई। राजा होते भी उन्होंने इन लोगों को समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया।
भगवान राम राजा होने के साथ-साथ एक कुशल प्रबंधक भी थे। वो सभी को साथ लेकर चलने में यकीन रखते थे। भगवान राम के बेहतर नेतृत्व क्षमता की वजह से ही लंका जाने के लिए पत्थरों का सेतु बन पाया। भगवान राम ने सामान्य लोगों को जोड़कर ऐसी ताकत का निर्माण किया जिससे रावण जैसे एक शक्तिशाली शासक को भी पराजित होना पड़ा। भगवान राम ने लोगों को संगठन में ताकत की सीख दी। भगवान राम अपनी अच्छी मित्रता के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने जिससे भी मित्रता की उससे अपना रिश्ता पूरे दिल से निभाया। महान राजा होते हुए भी राम जी ने हर जाति, हर वर्ग के व्यक्तियों के साथ मित्रता की। केवट हो या सुग्रीव, निषादराज या विभीषण सभी मित्रों के लिए भगवान राम ने कई बार संकट झेले और अपनी सच्ची मित्रता का परिचय दिया।
भगवान राम एक आदर्श भाई थे। लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न के प्रति उनके प्रेम,त्याग और समर्पण के कारण ही उन्हें आदर्श भाई कहा जाता है। भगवान राम अपने सभी भाइयों के साथ एक समान व्यवहार करते थे। बड़े भाई की तरह हर मुश्किल में साथ दिया और उन्हें सही मार्ग दिखाया। भाइयांे का भी उनके प्रति अथाह प्रेम था। वनवास जाते समय लक्ष्मण जी भी उनके साथ वन गए। वहीं, भरत ने राजपाट मिलने के बावजूद सिंहासन पर बड़े भाई राम की चरण पादुका रख जनता की सेवा की। राम ने जनमत का सम्मान किया और मर्यादा का उल्लंघन करने वाले को सजा दी। यही राम राज्य माना जाता है।
(मोहिता-हिफी फीचर)



