यूपी में फिर बनेंगी महिलाएं मुद्दा

महिला सशक्तिकरण और किसी क्षेत्र में भले ही नहीं हो पाया लेकिन राजनीति में उसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। बिहार में माना जाता है कि नीतीश कुमार की पार्टी इस बार इतनी बड़ी सफलता महिलाओं के समर्थन के चलते ही प्राप्त कर सकी है। पश्चिम बंगाल मंे विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित हो गयी हैं। उससे पहले ही ममता बनर्जी की सरकार ने महिलाओं पर अपना खजाना लुटा दिया है। अब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। राज्य में मुख्य विप़क्षी दल के नेता अखिलेश यादव ने अभी से महिलाओं को 40 हजार रुपये सालाना देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि उनके इस ऐलान का प्रदेश मंे होने वाले पंचायत चुनावों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। प्रदेश की योगी सरकार भी विज्ञापन के माध्यम से मातृ शक्ति वंदन कर रही है। यहां पर वर्ष 2026-27 के बजट मंे उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन मिले हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना पर 35 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन मिलेंगे। इसके लिए योगी सरकार 20 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में 39 हजार से अधिक बीसी सखी तैनात की गयी हैं। इन बीसी सखियों द्वारा 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन देन एवं 116 करोड़ रुपये का लाभांश अर्जित किया गया है। इस प्रकार यूपी में महिलाओं के विकास के लिए योजनाओं की भरमार है। अखिलेश यादव भी महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रहे हैं।
यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल फिलहाल पंचायत चुनाव की तैयारियों में लगे हैं। इसी सिलसिले में महिला वोटरों को अपने पाले में खींचने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला वोटरों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनी तो वो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये पेंशन देंगे। साथ ही नारी समृद्धि सम्मान योजना शुरू की जाएगी।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर उनकी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश में सत्ता में आती है, तो पुनर्जीवित समाजवादी पार्टी पेंशन योजना के तहत वंचित महिलाओं को प्रति वर्ष 40,000 रुपये मिलेंगे। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार और उन्हें अधिक आत्मनिर्भरता प्रदान करने पर विशेष
ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के उद्देश्य से पहले से चल रही योजनाओं को फिर से शुरू करने और नई योजनाएं शुरू करने की बात भी कही।
अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाएं समाज का अहम हिस्सा हैं और राज्य के समग्र विकास के लिए उनकी प्रगति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को सम्मान और समर्थन देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई जैसी योजनाओं को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने के लिए और खासकर कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए नए कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही। उनके अनुसार, महिलाओं का सशक्तिकरण राज्य के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि अपराध बढ़ रहे हैं और लोग, विशेषकर महिलाएं, असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि जब तक सरकार नहीं बदलती, स्थिति में सुधार नहीं होगा। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में हाल की आपराधिक घटनाओं का भी हवाला दिया। अखिलेश यादव ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, विशेष रूप से लखनऊ के ग्रीन कॉरिडोर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि परियोजना में उचित योजना का अभाव है और पैदल यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया है। उनके अनुसार, इतनी ही धनराशि का उपयोग चैड़ी और बेहतर सड़कें बनाने में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता था।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासत में उबाल आता जा रहा है और शह मात के खेल की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सपा के पीडीए के प्लान को फेल करने के लिए भाजपा ने अपना प्लान डी तैयार कर लिया है। यूपी की राजनीति पूरे देश की सियासत से कुछ अलग तरह की है जहां जीत के लिए जाति मुख्य आधार है। यूपी में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक काफी अहम भूमिका निभाता रहा है और इस वोट बैंक पर सभी राजनीतिक दलों की नजर टिकी रहती है। एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए को लेकर अपना प्लान पहले ही बना चुके हैं और इसे लेकर प्रदेश
की सत्ता में एक बार फिर वापसी
की कोशिश में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ है भारतीय जनता पार्टी, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। अखिलेश के पीडीए को मात देने के लिए भाजपा ने ‘डी’ प्लान बनाया है।
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) प्लान बनाया है जिसने यूपी की योगी सरकार के लिए चिंता बढ़ा दी है। अखिलेश यादव ने कहा है, इस नकारा सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए जनता पूरी तरह संकल्पित है। अखिलेश यादव, (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। अखिलेश यादव ने एसआईआर की प्रक्रिया में फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा कि फॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे हैं वो सब पीडीए हैं जिनमें दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक शामिल हैं।
बता दें कि साल 2017 के बाद से बड़ी संख्या में पिछड़ा और दलित वोटर्स सपा और बसपा का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के साथ आ गए थे और जिसके दम पर बीजेपी ने यूपी में जबरदस्त पकड़ बनाई थी लेकिन, सपा के पीडीए फॉर्मूले के चलते ही साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगा और सपा 37 लोकसभा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी को जीत दिलाने में पीडीए एक मजबूत आधार साबित हो सकता है। यूपी चुनाव 2022 के बाद से भाजपा का दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ था और सपा को इसका फायदा मिला था। लेकिन इस बार के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट भाजपा ने निकाल लिया है और इसे लेकर मजबूत रणनीति तैयार की है।
बता दें कि यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण है। इस बार के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए तत्पर है और इसके लिए दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है। इसके लिए 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के कार्यक्रमों से इस समाज के लोगों से वर्षों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाए जाने की रणनीति में जुटी है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



